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राज्योत्सव के अवसर पर कटघोरा को जिला घोषित करने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। कटघोरा के एडवोकेट संघ और स्थानीय संगठनों ने अनुविभागीय अधिकारी (SDM) को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि 1 नवंबर तक सरकार ने कोई ठोस निर्णय नहीं लिया,
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यह मांग सालों से चली आ रही है, जिसके लिए एडवोकेट और स्थानीय संगठन संघर्षरत हैं। ज्ञापन के माध्यम से मुख्यमंत्री से आग्रह किया गया है कि राज्योत्सव के दिन, यानी 1 नवंबर को कटघोरा को जिला घोषित किया जाए। इस मांग को 50 से अधिक सामाजिक संगठन और समुदाय समर्थन दे चुके हैं।
कांग्रेस और भाजपा के कार्यकाल में रखी गई थी बात
एडवोकेट संघ के अध्यक्ष राजेश पाल ने बताया कि कटघोरा को जिला बनाने के संबंध में पहले भी ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं। कांग्रेस और भाजपा दोनों सरकारों के कार्यकाल में यह बात रखी गई थी। उन्होंने यह भी बताया कि इस मांग को लेकर दो साल तक प्रदर्शन भी किया गया था।
जिस दौरान सरकार और मंत्रियों ने जल्द जिला बनाने का आश्वासन दिया था। संघ के सचिव अमित सिंह ने बताया कि इससे पहले अपर कलेक्टर और एडिशनल एसपी की पदस्थापना की मांग भी की गई थी, लेकिन वह भी पूरी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि अब सरकार किसी की भी रहे, एक बड़ा आंदोलन फिर से किया जाएगा, जिसकी तैयारी की जा रही है।
मूलनिवासी किसान संघ ने भी दिया समर्थन
मूलनिवासी किसान संघ के सदस्य लाल बहादुर कोर्राम ने कहा कि उनका संघ जिला वकील संघ के साथ खड़ा है और इस आंदोलन में सभी सदस्य आगे बढ़कर प्रदर्शन करेंगे। संत एकता परिषद के सदस्य मुरली दास ने भी आंदोलन को समर्थन देते हुए कहा कि यदि इस बार जिला नहीं बना तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
कटघोरा के एसडीएम तन्मय खन्ना ने बताया कि एडवोकेट संघ ने अपनी मांग रखी है। इस संबंध में उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा और इस पर विचार किया जाएगा।
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