कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव जरींता लैतफलांग ने गुरुवार को मैनपाट पहुंचकर बॉक्साइट खनन के प्रभावितों से मुलाकात की। एक सप्ताह पूर्व बॉक्साइट खदानों के लिए बिना किसी पूर्व सूचना खनन परियोजनाओं के लिए पर्यावरण स्वीकृति की जनसुनवाई आयोजित की गई थी, जिसका
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कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने स्थानीय लोगों से मुलाकात कर चर्चा की। स्थानीय लोगों ने बताया कि ग्रामीण नहीं चाहते कि बाक्साइट खदानें खुलें। बाक्साइट खदानों से मैनपाट का अब तक विनाश ही हुआ है। मैनपाट में खदानों से सिर्फ गड्ढे ही मिले हैं।
ग्रामीणों का छीना जा रहा है अधिकार ग्रामीणों की सभा को संबोधित करते हुए जरींता लैतफलांग ने कहा कि सरगुजा में पांचवीं अनुसूची लागू है। यह इसलिए लागू है, ताकि यहां के जल, जंगल, जमीन पर आपका अधिकार कायम रहे, लेकिन छत्तीसगढ़ की मौजूदा भाजपा सरकार पूंजीपतियों के इशारे पर आपके इस जल, जंगल और जमीन को लूट रही है। इस लूट के बाद पांचवीं अनुसूची से आपको मिले अधिकार बेमानी हो जाएंगे।
जरींता लैतफलांग ने कहा कि आपके जल, जंगल, जमीन की लड़ाई में कांग्रेस आपके साथ है। कांग्रेस विधानसभा के शीतकालीन सत्र में इन मुद्दों को जोर शोर के साथ उठाने की तैयारी कर रही है।

खनन प्रभावित क्षेत्र के लोगों से कांग्रेसियों ने की वार्ता
पूंजीपतियों को जमीनें बेच रही है सरकार प्रदेश में सरगुजा से बस्तर तक जमीनें पूंजीपतियों को दी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि रायगढ़ के तमनार, सरगुजा के परसोढ़ी कला व मैनपाट में स्थानीय निवासियों की मंशा और स्वीकृति के विपरीत खनन कंपनियों के मुनाफे के लिए सरकार अपने तंत्र का इस्तेमाल कर उन्हें बेदखल कर रही है।
लूटा जा रहा है जल, जंगल, जमीन प्रभावित ग्रामीणों की सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस जिलाध्यक्ष बालकृष्ण पाठक ने कहा कि छत्तीसगढ़ में एक आदिवासी के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके आदिवासी समुदाय के हित में खड़े रहने की संभावना थी, लेकिन उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद पूंजीपतियों और कंपनियों के द्वारा आदिवासियों के जल, जंगल, जमीन को बेखौफ होकर लूटा जा रहा है।
इस दौरान जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष मो.इस्लाम, डॉ.लालचंद यादव, अनिल सिंह, बलराम यादव, तिलक बेहरा, अटल यादव, फूल साय लकड़ा, राजेश गुप्ता, संतोष गुप्ता, गणेश सोनी ,बदरुद्दीन इराक, अमित सिंह सहित मैनपाट ब्लॉक कांग्रेस के पदाधिकारी, मंडल अध्यक्ष एवं कार्यकर्ता मौजूद थे।
लोकतांत्रिक संघर्ष का हिड़मा बनूँगा 30 दिसंबर की जनसुनवाई में एक आक्रोशित युवक ने मीडिया को यह कहकर सनसनी फैला दी थी कि ऐसी ही वजहों से लोग हिड़मा बनते हैं। फूलचंद मांझी नाम का यह युवक आज की मुलाकात के दौरान मौजूद था।
बीएससी द्वितीय वर्ष के छात्र फूलचंद मांझी ने कहा कि हिड़मा बोलने का यह आशय नहीं है कि हथियार उठाना चाहता हूँ। मैं अपने आदिवासी समाज के हक की लोकतांत्रिक लड़ाई लड़ना चाहता हूँ। उसने कहा कि खनन के काम मे स्थानीय लोगों के लिए कोई रोजगार नहीं है। बॉक्साइट निकलने के बाद खनन कंपनियां भूखंडों को जस का तस छोड़ देती हैं। इसमें गिरने से मवेशियों के साथ ही स्थानीय निवासियों की भी मौत हो रही।
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