कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज की तस्वीर।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के दौरे के पहले कांग्रेस ने भाजपा सरकार में हुए नक्सलियों के आत्मसमर्पण को फर्जी बताया है। कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि भाजपा ने नक्सलियों के आत्मसमर्पण को इवेंट बना दिया है। एक तरफ आत्मसमर्पण हो रहा है, दूसरी तरफ ए
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उन्होंने कहा कि सरकार को हाल ही में आत्मसमर्पण करने वाले 103 नक्सलियों के बारे में पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। बस्तर में कई फर्जी सरेंडर, एनकाउंटर हुए, कई निर्दोष आदिवासियों को जेल भेज दिया गया। नक्सलियों के लिए सरकार रेड कारपेट बिछा रही है। आत्मसमर्पण को इवेंट बना दिया गया है। सरकार लिस्ट जारी करें, ताकि साफ हो पाए कि समर्पण करने वाली असली नक्सली हैं या सरकार प्रोपेगेंडा कर रही है।
नक्सलियों को पालती-पोसती आई है कांग्रेस
पीसीसी अध्यक्ष के बयान पर भाजपा प्रवक्ता देवलाल ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा नक्सलियों को पाला-पोसा और उनकी विचारधारा को आगे बढ़ाया है। आज जब हमारे जवान नक्सलियों का बहादुरी से सामना कर रहे हैं। उनका खात्मा कर रहे हैं, तो कांग्रेस के पेट में दर्द क्यों हो रहा है।

भाजपा प्रवक्ता देवलाल ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस नक्सलियों को पाला-पोसा है।
नक्सलवाद खत्म होने की डेडलाइन बताए भाजपा
कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि 15 साल के कार्यकाल में भाजपा ने नक्सलवाद खत्म करने के नाम पर सिर्फ फर्जी अभियान चलाए। गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि साल 2026 तक नक्सलवाद खत्म हो जाएगा। लेकिन जो हालात प्रदेश में हैं, ऐसा लग नहीं रहा है कि नक्सलवाद खत्म हो पाएगा। गृहमंत्री जवाब दें कि कब प्रदेश नक्सलवाद मुक्त हो पाएगा।
अब तक 1890 नक्सली अब तक कर चुके हैं सरेंडर
बता दें कि छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद अब तक 1890 नक्सली सरेंडर कर चुके हैं। वहीं 1100 से ज्यादा नक्सलियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। वहीं साल 2024 में अब तक 282 नक्सलियों को मुठभेड़ में मार गिराया गया है। गृहमंत्री अमित शाह ने नक्सल खात्मे के लिए 31 मार्च 2026 तक की डेडलाइन तय की है।
छत्तीसगढ़ में क्या है आत्मसमर्पण की नीति
छत्तीसगढ़ सरकार आत्मसमर्पण को प्रोत्साहन देने के लिए 50 हजार की प्रोत्साहन राशि के साथ जमीन और रोजगार भी दिलवा रही है। हथियारों के साथ आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को भी प्रोत्साहन दे रही है। इसके मुताबिक एलएमजी के लिए 15,000 रुपए और आईईडी के लिए 10,000 रुपए। इसी तरह नक्सलियों को पुनर्वास के लिए विशेष पोर्टल विकसित किया गया है।
हर जिले और सब-डिविजनल स्तर पर एक-एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। जो पुनर्वास कार्यों की निगरानी करेंगे। राज्य स्तर पर वरिष्ठ अधिकारियों की एक समिति बनाई गई है, जो पुनर्वास कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकारी नौकरियों और सहकारी समितियों में रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे।
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