ये तस्वीर पंकज शर्मा और विकास उपाध्याय की है। (फाइल फोटो)
कांग्रेस पार्टी ने संगठन को मजबूत करने के लिए ‘सृजन अभियान’ की शुरुआत की है। इस अभियान की शुरुआत गुजरात से हुई थी और अब यह छत्तीसगढ़ में जारी है। जिसके तहत जिलाध्यक्ष चयन की प्रक्रिया चल रही है।
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इस बीच एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस के कुछ लोगों ने रायपुर जिले के पर्यवेक्षक प्रफुल्ल गुडाधे से जिलाध्यक्ष के नाम को लेकर लॉबिंग करने की शिकायत की है। उन्होंने विधायक सत्यनारायण शर्मा के बेटे पंकज शर्मा और पूर्व विधायक विकास उपाध्याय पर आरोप लगाया है कि वे श्रीकुमार मेनन के लिए लॉबिंग कर रहे हैं।


जानिए शिकायत में क्या कहा ?
संगठन सृजन अभियान में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे की सोच के अनुरूप कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से नाम की रायशुमारी करने का अभियान है। लेकिन इस अभियान में कुछ वरिष्ठ नेता अपने समर्थकों के लिए जबरिया जोर आजमाइश करते नजर आ रहे हैं, जो कि पार्टी की सोच के विपरीत है।
पूर्व मंत्री सत्यनारायण शर्मा के बेटे पंकज शर्मा और रायपुर ग्रामीण से 2023 चुनाव में 35 हजार से अधिक वोटों से चुनाव हार चुके हैं। वे अपने समर्थक श्रीकुमार मेनन के लिए कार्यकर्ताओं और नेताओं को रोककर प्रचार करते हुए दबाव बना रहे थे, जो इस प्रक्रिया के खिलाफ है।
विकास उपाध्याय जो कि 2024 रायपुर लोकसभा में 6 लाख वोटों से हारे और 2023 विधानसभा 45 हजार से अधिक वोटों से हार चुके हैं, उनके की ओर से भी आज कांग्रेस भवन परिसर में कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को लगातार श्रीकुमार मेनन के पक्ष में प्रभावित करने का काम किया गया, जो कि राहुल गांधी की सोच और संगठन सृजन अभियान की सोच के खिलाफ है।
यदि बड़े नेता चुनाव प्रचार की तरह सामने खड़े होकर लोगों को प्रभावित करेंगे, अपने लोगों के लिए लॉबिंग करेंगे, तो अभियान का क्या अर्थ है? अत: आपसे अनुरोध है कि इन दोनों नेताओं समेत सभी बड़े नेताओं को किसी भी स्थल से दूर रहने की सलाह दी जाए, ताकि एक निष्पक्ष निर्णय लेना संभव हो, अन्यथा ये लोग लॉबिंग करके निर्णय को प्रभावित करेंगे।
क्या है संगठन सृजन अभियान का मकसद ?
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने संगठन को मजबूती देने के लिए ‘संगठन सृजन अभियान’ तेज कर दिया है। इस अभियान के तहत पार्टी के पर्यवेक्षक अलग-अलग जिलों में जाकर कार्यकर्ताओं और स्थानीय पदाधिकारियों से वन-टू-वन चर्चा कर रहे हैं। ब्लॉक से लेकर जिला स्तर तक संवाद और रायशुमारी के आधार पर जिलाध्यक्ष पद के लिए छह नामों का पैनल तैयार किया जा रहा है, जिसे 20 अक्टूबर तक अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) को भेजा जाएगा।
हर वर्ग को मिलेगा प्रतिनिधित्व
पार्टी की कोशिश है कि नए जिलाध्यक्षों के चयन में SC, ST, OBC और सामान्य वर्ग का संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए। रायशुमारी की प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष ढंग से की जा रही है, ताकि हर कार्यकर्ता बिना किसी दबाव या प्रभाव के खुलकर अपनी राय दे सके।
रायपुर में 12 अक्टूबर को होगी चर्चा
रायपुर जिले के लिए 12 अक्टूबर को पर्यवेक्षकों ने जिलाध्यक्ष पद के दावेदारों से वन-टू-वन चर्चा की। इसी तरह ब्लॉक स्तर पर अब तक 121 चर्चाएं हो चुकी हैं, जिनमें कार्यकर्ताओं से राय ली गई है। संगठन चुनाव में 35 से 55 साल के बीच के सक्रिय और स्वच्छ छवि वाले कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है। पार्टी ने साफ कर दिया है कि किसी भी दावेदार पर आपराधिक मामला नहीं होना चाहिए और उसका चरित्र निर्विवाद होना जरूरी है।
ये हैं छत्तीसगढ़ के पर्यवेक्षक
बता दें कि संगठन सृजन अभियान में AICC ने छत्तीसगढ़ के लिए सप्तगिरि उलाका, अजय कुमार लल्लू, सुबोध कांत सहाय, उमंग सिंगार, आरसी खुंटिया, राजेश ठाकुर, विवेक बंसल, डॉ. नितिन राऊत, श्याम कुमार बर्वे, प्रफुल्ल गुडाधे, चरण सिंह सपरा, विकास ठाकरे, सुहिना कावरे, सुरीता चौधरी, रेहाना रेयाज़ चिश्ती, अज़मतुल्लाह हुसैनी और सीताराम लांबा को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है।
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