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Home » Chhattisgarh Coal scam…Court issues notice to EOW Director, ASP-DSP | कोयला घोटाला…EOW डायरेक्टर, ASP-DSP को कोर्ट से नोटिस: पहले से टाइप्ड बयान पेश करने का आरोप, भूपेश बोले- जांच एजेंसियां सुपारी ले रही हैं क्या – Chhattisgarh News
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Chhattisgarh Coal scam…Court issues notice to EOW Director, ASP-DSP | कोयला घोटाला…EOW डायरेक्टर, ASP-DSP को कोर्ट से नोटिस: पहले से टाइप्ड बयान पेश करने का आरोप, भूपेश बोले- जांच एजेंसियां सुपारी ले रही हैं क्या – Chhattisgarh News

By adminOctober 12, 2025No Comments6 Mins Read
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छत्तीसगढ़ कोल स्कैम केस में कोर्ट ने EOW डायरेक्ट अमरेश मिश्रा, ASP और DSP को नोटिस जारी किया है।

छत्तीसगढ़ कोल स्कैम केस में रायपुर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने EOW को नोटिस जारी किया है। EOW ने मजिस्ट्रेट के सामने आरोपी निखिल चंद्राकर का बयान दर्ज कराने के बजाय पहले से तैयार टाइप्ड बयान कोर्ट में पेश कर दिया। इस पर कोर्ट ने EOW-ACB के निदेशक अमर

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रायपुर की स्पेशल कोर्ट में कोल स्कैम के मुख्य आरोपी सूर्यकांत तिवारी की जमानत याचिका पर सुनवाई चल रही थी। इसी दौरान कोर्ट में पहले से टाइप्ड बयान वाले दस्तावेज पेश किए गए। सूर्यकांत तिवारी के वकीलों ने इसका विरोध किया। हाईकोर्ट में भी EOW-ACB की शिकायत की गई है।

रायपुर कोर्ट ने EOW-ACB के निदेशक अमरेश मिश्रा, उप पुलिस अधीक्षक राहुल शर्मा और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक चंद्रेश ठाकुर को नोटिस जारी किया है। तीनों अफसरों से जवाब मांगा है। वहीं पूर्व CM भूपेश बघेल ने भी जांच एजेंसी पर सवाल उठाए हैं।

भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अब जांच एजेंसियां झूठे बयान और सबूत खुद बनाने लगी हैं क्या? किसी को भी फंसाने के लिए अब जांच एजेंसियां सुपारी ले रही हैं क्या? जांच एजेंसी EOW/ACB पर झूठे साक्ष्य बनाकर अदालत के साथ आपराधिक धोखाधड़ी की शिकायत बेहद गंभीर है।

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जानिए क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, कोल घोटाले (केस नंबर 02/2024 और 03/2024) में आरोपी सूर्यकांत तिवारी की जमानत पर सुनवाई हो रही थी। इस दौरान EOW/ACB (EOW/ACB) ने कोर्ट में कुछ दस्तावेज पेश किए। इन दस्तावेजों में सह आरोपी निखिल चंद्राकर का बयान भी शामिल था, जिसे EOW ने कोर्ट को धारा 164 के तहत रिकॉर्ड किया गया बताया।

शिकायतकर्ता गिरीश देवांगन के मुताबिक कोर्ट में जब निखिल चंद्राकर के बयान की कॉपी सूर्यकांत तिवारी के वकीलों को दी गई, तो उसमें कई गड़बड़ियां सामने आईं। इससे EOW/ACB पर झूठे तरीके से साजिश रचने का शक हुआ।

गिरीश देवांगन के मुताबिक बयान की जो प्रति कोर्ट को दी गई वह उस भाषा में नहीं है जो आमतौर पर कोर्ट में इस्तेमाल होती है। उसमें जो फॉन्ट इस्तेमाल हुआ है, वह भी कोर्ट में इस्तेमाल होने वाला फॉन्ट नहीं है। वह फॉन्ट तो छत्तीसगढ़ की अदालतों में कभी उपयोग में लाया ही नहीं जाता।

EOW-ACB के निदेशक अमरेश मिश्रा की तस्वीर है। इन पर और अन्य अफसरों पर आरोपी के बयान कोर्ट के बाहर रिकॉर्ड कराने का आरोप है।

EOW-ACB के निदेशक अमरेश मिश्रा की तस्वीर है। इन पर और अन्य अफसरों पर आरोपी के बयान कोर्ट के बाहर रिकॉर्ड कराने का आरोप है।

बाहर तैयार की गई फाइल को कोर्ट में जमा किया गया

गिरीश देवांगन ने आरोप लगाया कि EOW की गड़बड़ियों से साफ जाहिर होता है कि बयान कोर्ट में नहीं बल्कि बाहर किसी कंप्यूटर पर तैयार किया गया, फिर उसे पेनड्राइव में लाकर कोर्ट में जमा कर दिया गया। मजिस्ट्रेट के सामने निखिल चंद्राकर का बयान दर्ज नहीं कराया गया, बल्कि बाहर तैयार की गई फाइल को ही उसका बयान बताकर जमा कर दिया गया।

शिकायतकर्ता गिरीश देवांगन ने कहा कि इस तरह की गड़बड़ी से साफ पता चलता है कि ईओडब्लू/एसीबी ने दस्तावेजों की कूटरचना (फर्जीवाड़ा) की है। इसलिए इस मामले की गंभीरता से जांच कर जरूरी कार्रवाई की मांग की जा रही है।

कानूनी तौर पर यह प्रक्रिया न्यायालयीन नियमों का घोर उल्लंघन मानी जाती है। इस खुलासे के बाद यह सवाल उठ गया कि अगर जांच एजेंसियां इस तरह बयान तैयार करेंगी, तो निष्पक्ष जांच और न्याय की उम्मीद कैसे की जा सकती है?

जानिए EOW की गड़बड़ी का कैसे हुआ खुलासा

गिरीश देवांगन के मुताबिक मामले का खुलासा तब हुआ, जब वह खुद 12 सितंबर 2025 को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार (सतर्कता) के सामने आवेदन दिया। उन्होंने दस्तावेजों की जांच फोरेंसिक विशेषज्ञ इमरान खान से करवाई।

रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि प्रस्तुत बयान अदालत के फॉर्मेट से मेल नहीं खाता। इसके बाद गिरीश देवांगन ने आज मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रायपुर के सामने शिकायत दर्ज कराते हुए कहा कि यह एक आपराधिक षड्यंत्र है, जिसमें झूठे साक्ष्य तैयार कर अदालत को गुमराह किया गया।

शिकायतकर्ता गिरीश देवांगन ने क्या कहा

गिरीश देवांगन ने अपनी शिकायत में कहा कि, यह स्पष्ट रूप से एक संज्ञेय अपराध है। EOW/ACB ने न केवल अदालत को धोखा दिया, बल्कि संविधान और न्यायिक प्रक्रिया की मर्यादा का उल्लंघन किया है। उन्होंने अदालत से मांग की है कि इस मामले की सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूतों की जांच कराई जाए और संबंधित अधिकारियों को कड़ी सजा दी जाए।

क्यों है यह मामला बड़ा ?

सीनियर एडवोकेट फैजल रिजवी के मुताबिक, यह देश में पहली बार हुआ है जब किसी जांच एजेंसी ने अभियुक्त का बयान दर्ज कराने की जगह अपने कार्यालय से टाइप किया हुआ बयान अदालत में पेश किया। यह न केवल अदालत के साथ धोखाधड़ी है, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 21 (न्याय के अधिकार) का खुला उल्लंघन भी है।

फैजल रिजवी ने बताया कि घटना ने राज्य की जांच एजेंसियों की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला आने वाले समय में न्यायिक सुधारों के लिए मिसाल बन सकता है।

पूर्व सीएम बघेल बोले- जांच एजेंसियां सुपारी ले रही हैं क्या

भूपेश बघेल ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ पर लिखा- अब जांच एजेंसियां झूठे बयानों और सबूतों का निर्माण भी खुद ही करने लगी हैं क्या? किसी को भी फंसाने के लिए अब जांच एजेंसियां सुपारी ले रही हैं क्या? जांच एजेंसी ईओडब्लू/एसीबी पर झूठे साक्ष्य बनाकर अदालत के साथ आपराधिक धोखाधड़ी की शिकायत बेहद गंभीर है।

बघेल ने लिखा कि वकीलों की शिकायत पर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने EOW/ACB के निदेशक, DSP और ASP को नोटिस जारी किया है। देश की न्यायिक व्यवस्था में ऐसा पहली बार हुआ है, जब कोई जांच एजेंसी अभियुक्त का बयान दर्ज करवाने की जगह अपने कार्यालय से लाए हुए बयान को अभियुक्त का बयान बताकर उस पर हस्ताक्षर करवा ले।

बघेल ने लिखा कि ऐसे में किसी भी नागरिक को न्याय मिलने की संभावना खत्म होती है। उम्मीद है कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट भी इसका संज्ञान लेंगे।

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570 करोड़ की कोल लेवी, देवेंद्र-नवनीत करते थे वसूली: D देवेंद्र-RS रानू साहू के लिए कोडवर्ड, गिट्‌टी-रेती मतलब करोड़-लाख, जुगनू-टावर ग्रुप के वॉट्सएप चैट मिले

EOW-ED की चार्जशीट के अनुसार आरोपियों ने घोटाले का हिसाब-किताब करने के लिए पाल ग्रुप, दुर्ग ग्रुप, वीकली ग्रुप, टावर ग्रुप और जुगनू ग्रुप बनाए थे।

EOW-ED की चार्जशीट के अनुसार आरोपियों ने घोटाले का हिसाब-किताब करने के लिए पाल ग्रुप, दुर्ग ग्रुप, वीकली ग्रुप, टावर ग्रुप और जुगनू ग्रुप बनाए थे।

छत्तीसगढ़ कोयला घोटाले में मास्टरमाइंड सूर्यकांत तिवारी ने अफसरों और नेताओं की मिलीभगत से 570 करोड़ से ज्यादा की वसूली कराई। वसूली का काम देवेंद्र डडसेना और नवनीत तिवारी संभालते थे। लेन-देन के लिए वॉट्सऐप पर पाल, दुर्ग, वीकली, टावर और जुगनू नाम से ग्रुप बनाए गए थे। बातचीत में कोडवर्ड का इस्तेमाल होता था। पढ़ें पूरी खबर…



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