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बलरामपुर जिले में दशहरा छुट्टी के बाद गैरहाजिर पाए गए 250 से अधिक शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव के इस आदेश को लेकर शिक्षक संगठनों में विवाद खड़ा हो गया है।
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स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से 6 अक्टूबर 2025 को अलग-अलग सरकारी स्कूलों में औचक निरीक्षण किया गया था। इस दौरान कई शिक्षक और कर्मचारी बिना स्वीकृत छुट्टी के गैरहाजिर पाए गए। इसके बाद डीईओ ने संबंधित प्रधान-पाठकों को तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
हालांकि, इस कार्रवाई पर शिक्षक संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है। उनका सवाल है कि यदि निरीक्षण 6 अक्टूबर को हुआ था, तो नोटिस 15 अक्टूबर को क्यों जारी किया गया? संगठनों का यह भी कहना है कि शासन की ओर से 18 अक्टूबर तक शिक्षकों को वेतन जारी करने के निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं, ऐसे में यह कार्रवाई अनावश्यक और अनुचित है।
250 से अधिक शिक्षकों ने लिया ऑफलाइन छुट्टी
जानकारी के मुताबिक, जिलेभर में लगभग 250 से अधिक शिक्षकों को ये नोटिस भेजे गए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन शिक्षकों ने विभागीय पोर्टल पर छुट्टी के लिए आवेदन नहीं किया और ऑफलाइन छुट्टी लिया, उन्हें ही ये नोटिस जारी किए गए हैं।
विवाद तब और बढ़ गया जब कुछ संकुल समन्वयकों ने दावा किया कि 6 अक्टूबर को उनके ओर से कोई निरीक्षण नहीं किया गया था और न ही कोई रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी गई थी। इसके बावजूद नोटिस में उनके नाम से निरीक्षण का उल्लेख किया गया है।
आदेश तत्काल वापस नहीं लेने पर आंदोलन की चेतावनी
सहायक शिक्षक/समग्र शिक्षक फेडरेशन के जिला प्रवक्ता प्रभाकर मुखर्जी ने इन नोटिसों को “निरर्थक और निराधार” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह आदेश जानबूझकर समन्वयक और शिक्षकों के बीच भेदभाव पैदा कर रहा है। मुखर्जी ने चेतावनी दी कि यदि आदेश तत्काल वापस नहीं लिया गया और प्रधान-पाठकों पर कार्रवाई की गई, तो संगठन उग्र आंदोलन करेगा।
इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव ने कहा कि जिन शिक्षकों ने ऑफलाइन छुट्टी के लिए आवेदन किया था, उन्हीं को नोटिस जारी किए गए हैं।
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