छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की कोर्ट मैनेजर भर्ती परीक्षा विवादों में घिर गई है। आयोग ने 22 मई 2026 को आरटीआई के तहत एक परीक्षार्थी को जवाब दिया क …और पढ़ें

HighLights
- लोक सेवा आयोग के पास नहीं हैं कोर्ट मैनेजर परीक्षा के मॉडल उत्तर; पारदर्शिता पर खड़े हुए सवाल
- कोरबा के हेमंत चौहान की आरटीआई से खुला राज; कोर्ट मैनेजर भर्ती की हड़बड़ी से बढ़ा संदेह
- पुरानी बैठक का हवाला देकर परीक्षा के अंक छुपा रहा CGPSC; युवाओं ने पूछा— कैसे हुआ मूल्यांकन?
नई दुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। कोर्ट मैनेजर भर्ती परीक्षा को लेकर छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
कोरबा निवासी परीक्षार्थी हेमंत कुमार चौहान ने 19 अप्रैल 2026 को आयोजित कोर्ट मैनेजर मुख्य परीक्षा के संबंध में सूचना के अधिकार के तहत 1 मई को आवेदन देकर अपने अंक, मॉडल उत्तर, मार्किंग स्कीम, टॉप-100 अभ्यर्थियों के अंक और मॉडरेशन प्रक्रिया की जानकारी मांगी थी। आयोग के जनसूचना अधिकारी अपूर्व श्रीवास्तव ने 22 मई को जवाब देते हुए कहा कि चयन प्रक्रिया अभी पूर्ण नहीं हुई है, इसलिए जानकारी देना उचित नहीं है। साथ ही यह भी कहा गया कि परीक्षा के लिए कोई मॉडल उत्तर तैयार नहीं किए गए तथा मूल्यांकन संबंधी दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं।
जवाब ,दस्तावेज सत्यापन, साक्षातकार और चयन सूची एक ही दिन
विवाद इसलिए गहरा गया क्योंकि जिस दिन आयोग ने यह जवाब जारी किया, उसी दिन दस्तावेज सत्यापन और साक्षात्कार की प्रक्रिया पूरी कर अंतिम चयन सूची भी जारी कर दी गई। इससे आयोग के जवाब और वास्तविक कार्रवाई के बीच सीधा विरोधाभास सामने आ गया। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब अंतिम चयन सूची उसी दिन तैयार थी, तब चयन प्रक्रिया अधूरी होने का तर्क कैसे दिया गया।
अभ्यार्थियों में ऐसे बढ़ा संदेह
कोर्ट मैनेजर के 22 पदों के लिए 4 जनवरी 2026 को प्रारंभिक परीक्षा आयोजित की गई थी। इसके बाद 19 अप्रैल को मुख्य परीक्षा हुई और महज आठ दिन बाद 27 अप्रैल को उसका परिणाम भी घोषित कर दिया गया। फिर 7 मई को दस्तावेज सत्यापन और इंटरव्यू की सूचना जारी की गई तथा 22 मई को चयन सूची जारी कर दी गई। पूरी प्रक्रिया की तेजी और आरटीआई में दिए गए जवाब ने अभ्यर्थियों के बीच संदेह को और बढ़ा दिया है।
पुरानी बैठक का हवाला देकर नहीं दी जानकारी
हेमंत कुमार चौहान ने आरटीआई में केवल परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ी बुनियादी जानकारियां मांगी थीं। आयोग ने 2016 की एक पुरानी बैठक का हवाला देकर जानकारी देने से इनकार कर दिया। वहीं मॉडल उत्तर और मूल्यांकन दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने का दावा भी किया गया। अब सवाल उठ रहे हैं कि संवैधानिक संस्था होने के बावजूद यदि मूल्यांकन प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज ही उपलब्ध नहीं हैं, तो परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित की गई।
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