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अंबिकापुर में करोड़ों की तालाब भूमि फर्जी दस्तावेजों से बेचने का खुलासा, नौ लोगों पर प्राथमिकी के आदेश

अंबिकापुर शहर के सबसे व्यस्ततम इलाके प्रतीक्षा बस स्टैंड और रिंग रोड से लगी करोड़ों की कीमती तालाब की भूमि को फर्जी दस्तावेजों के सहारे बेचने का राजफाश हुआ है। सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश मिश्रा ने इस प्रकरण में दस्तावेजों के साथ कलेक्टर से शिकायत की थी। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रकरण की जांच करने का निवेदन किया था। भाजपा पार्षद आलोक दुबे ने भी शिकायत की थी।

इन शिकायतों की जांच के बाद कलेक्टर अजीत वसंत ने क्रेता-विक्रेता समेत नौ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी के आदेश दिए हैं। फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र, कूटरचना और फर्जी वारिस खड़ा कर जमीन बिक्री में ग्राम पंचायत अमलभिट्ठी के सरपंच-सचिव की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है।

यह प्रकरण अंबिकापुर स्थित खसरा नंबर 3714 रकबा 0.250 हेक्टेयर भूमि का है, जो प्रतीक्षा बस स्टैंड से लगी हुई है और रिंग रोड से जुड़ी होने के कारण इसकी बाजार कीमत करोड़ों में आंकी जा रही है। यह भूमि नगर निगम अंबिकापुर के मास्टर प्लान 2021 में 19 तालाबों की सूची में पांचवें नंबर पर दर्ज है, जिसका कुल रकबा 6.25 एकड़ है।

संपूर्ण क्षेत्र तालाब के रूप में स्थित है, जहां आसपास के लोग निस्तारी, नहाने-धोने, पशुओं को पानी पिलाने और दाह संस्कार जैसे कार्य करते हैं। वर्ष 2002 में यहां छठ घाट का निर्माण भी हुआ था, जहां छठ पूजन होता है।

आरोप था कि वंशावली के फर्जी वारिस बनकर इस जमीन को आजाद इराकी को बेच दिया गया और जल क्षेत्र को पाटकर प्लाटिंग की जा रही है। कलेक्टर अजीत वसंत ने एसडीएम बीएस नेताम से प्रकरण की जांच कराई, जिसमें गड़बड़ी उजागर हुई है। कलेक्टर ने जांच प्रतिवेदन के आधार पर स्पष्ट किया है कि फर्जी और दोषपूर्ण दस्तावेजों के आधार पर छल-कपट और धोखाधड़ी की गई है।

खसरा नंबर 3714 की वास्तविक भूमि स्वामी जैलाल पिता जोधन गोंड के स्थान पर केवल जैलाल पिता बोधन बनाकर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार किया गया। विक्रेता चंद्रशेखर यादव पिता स्व. जगतपाल यादव और क्रेता आजाद इराकी पिता रियाजुद्दीन इराकी निवासी जयनगर, सूरजपुर द्वारा आदिवासी वर्ग की इस भूमि को गैर आदिवासी को वारिस बताकर अवैध अंतरण किया गया।

यह भूमि वर्ष 1954-55 के पूर्व से जैलाल वल्द बोधन जाति गोंड के नाम पर दर्ज थी। भूमि स्वामी की मृत्यु 23 अप्रैल 1976 को हुई थी, लेकिन दूसरा पक्ष मृत्यु 12 अप्रैल 1963 बताकर नामांतरण करा रहा था। नगर पालिक निगम अंबिकापुर ने स्पष्ट किया है कि मृत्यु प्रमाण पत्र निगम में दर्ज ही नहीं है और निगम ने इसे जारी नहीं किया है।

अमलभिट्ठी के पटवारी ने जयलाल पिता देवराम के वारिसानों की जानकारी दी थी, लेकिन उसका उपयोग जैलाल पिता बोधन के वारिस के रूप में फौती नामांतरण के लिए कर लिया गया। ग्राम पंचायत अमलभिट्ठी के सचिव और सरपंच की भूमिका भी संदेहास्पद पाई गई है, क्योंकि उन्होंने जयलाल पिता देवराम के वारिसों के रहते हुए जयलाल पिता बोधन का मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के लिए पंचनामा तैयार किया।

कलेक्टर अजीत वसंत ने तहसीलदार अंबिकापुर को आदेश जारी किया है कि इस फर्जी अंतरण में मुख्य भूमिका निभाने वाले नौ लोगों के खिलाफ संबंधित थाने में छल-कपट और धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज कराई जाए।

इनमें विक्रेता चंद्रशेखर यादव पिता स्व. जगतपाल यादव, क्रेता आजाद इराकी पिता रियाजुद्दीन इराकी निवासी जयनगर सूरजपुर तथा अन्य सहखातेदार विक्रेतागण नोहरसाय, रामकुमार, श्रीलाल, पूर्णिमा सभी पिता भोला, जनकुंवर पति भोला, चंद्रभान यादव पिता जगतपाल और मीरा यादव पति जगतपाल सभी निवासी ग्राम अमलभिट्ठी तहसील लखनपुर शामिल हैं।

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