2 हजार करोड़ रुपए के निर्माण पर ब्रेक:6 माह में डामर 50 हजार से बढ़कर 96 हजार रुपए टन हुआ, सड़कों का काम अटका

डामर के दाम ने प्रदेश की सड़कों की रफ्तार रोक दी है। छह महीने में डामर की कीमत 50 हजार से बढ़कर 96 हजार 500 रुपए प्रति टन पहुंच गई है। यानी लागत करीब दोगुनी होने से सड़क निर्माण और मरम्मत के करीब 2 हजार करोड़ रुपए के काम प्रभावित होने का दावा ठेकेदार कर रहे हैं। स्थिति यह है कि डामरीकरण के करीब 90 फीसदी काम पर असर पड़ा है। बारिश के बाद सड़क मरम्मत और पेचवर्क के टेंडर भी 50 से 60 फीसदी अधिक जा रहे हैं। बढ़ी कीमतों के कारण कई जगह एजेंसियां काम शुरू करने से पीछे हट रही हैं, तो कुछ जगह अधूरा काम रोक दिया गया है। 25 सितंबर को पीडब्ल्यूडी सचिव, ईएनसी और ठेकेदारों की बैठक में डामरीकरण के पीक सीजन में डामर की कमी और बढ़ी कीमतों को प्रमुख चिंता बताया गया। कॉन्ट्रैक्टर एसोसिएशन ने सरकार से रेट संशोधन की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि पुराने अनुबंधों में तय दर पर मौजूदा कीमत में काम करना घाटे का सौदा हो गया है। कोर कमेटी जल्द शासन को ज्ञापन सौंपने की तैयारी में है। केस 1 एक्सप्रेस-वे का 17 करोड़ का रिनुअल अटका: स्टेशन से सद्दाणी दरबार तक एक्सप्रेस-वे के रिनुअल के लिए 17 करोड़ रुपए का टेंडर जारी हो चुका है। डामर महंगा होने के बाद ठेका एजेंसी अनुबंध नहीं कर रही है। इसके कारण राजधानी की इस प्रमुख सड़क का रिनुअल शुरू नहीं हो पाया है। काम में देरी से सड़क की स्थिति और यातायात दोनों पर असर पड़ने की आशंका है। केस 2 महासमुंद-तुमगांव में 5 किमी के बाद काम बंद: महासमुंद से तुमगांव तक करीब 9 किमी सड़क के नवीनीकरण का टेंडर अप्रैल से पहले जारी हुआ था। एजेंसी करीब 5 किमी हिस्से में डामरीकरण कर चुकी थी। इसी दौरान डामर के दाम तेजी से बढ़े और काम रोक दिया गया। करीब 4 किमी हिस्सा अब भी बाकी है। केस 3 भैंसा भंडार-तेलसी में एजेंसी तय, काम शुरू नहीं रायपुर जिले में भैंसा भंडार से तेलसी तक करीब 30 किमी सड़क का डामरीकरण होना है। पीडब्ल्यूडी एजेंसी तय कर चुका है, लेकिन बढ़ी लागत के चलते काम शुरू नहीं हो सका। खराब और ऊबड़-खाबड़ सड़क से गुजरने वाले ग्रामीणों और वाहन चालकों को परेशानी उठानी पड़ रही है। केस 4 खारुन पुल पर फिर डामर, लेकिन इंतजार दुर्ग-रायपुर मार्ग के खारुन नदी ओवरब्रिज पर 1 अप्रैल से डामरीकरण शुरू हुआ था। एजेंसी ने एक महीने का ब्लॉक लिया था, लेकिन 16 दिन में काम पूरा कर दिया। भारी वाहनों की आवाजाही के बाद सतह पर फिर गड्ढे बनने लगे। अब दोबारा डामरीकरण की तैयारी है, लेकिन बेटुमेन की उपलब्धता नहीं होने से काम शुरू नहीं हो पाया है। सीधा असर लागत और समय दोनों पर प्रदेश में पीडब्ल्यूडी के करीब 2 हजार करोड़ रुपए के काम चल रहे हैं। सड़क, पुल, भवन, अस्पताल और आवासीय परियोजनाओं में डामर और सीमेंट की कीमत बढ़ने से निर्माण लागत बढ़ने के साथ समयसीमा भी प्रभावित हो रही है। सड़क मरम्मत और नई परियोजनाओं के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी वाले काम भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। यदि रेट संशोधन पर जल्द फैसला नहीं हुआ तो कई परियोजनाओं की लागत बढ़ने के साथ उनकी शुरुआत और पूर्णता की समयसीमा भी खिसक सकती है। डामर और कांक्रीट से दिसंबर तक सड़क के सभी गड्ढे भर दिए जाएंगे। डामर की उपलब्धता में किसी तरह की दिक्कत आती है तो संबंधित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाएगा।
-वीके भतपहरी, ईएनसी पीडब्ल्यूडी बिलासपुर : 177 करोड़ के 12 सड़क प्रोजेक्ट्स अटके, निगम के पांच और पीडब्ल्यूडी के 7 मार्ग डामर महंगा होने और तेल कंपनियों से सप्लाई बाधित होने का सीधा असर बिलासपुर के बुनियादी ढांचे पर पड़ा है। जिले में नगर निगम और पीडब्ल्यूडी के करीब 177.73 करोड़ रुपए की लागत वाले 12 बड़े सड़क प्रोजेक्ट अंतिम चरण में आकर अटक गए हैं। इन सभी सड़कों पर नाली, डिवाइडर और बेसवर्क का काम तो पूरा हो चुका है, लेकिन घाटे के डर से ठेकेदारों के हाथ खड़े करने के कारण अंतिम डामरीकरण नहीं हो पा रहा है। शहर के भीतर नगर निगम के 50 करोड़ रुपए के पांच अहम प्रोजेक्ट अटके हैं, जिनमें 17 करोड़ की लागत वाला अशोक नगर-बिरकोना मार्ग, 11 करोड़ का अटल पथ, 10 करोड़ का अपोलो चौक-रपटा चौक मार्ग, 9 करोड़ का गुरुनानक चौक-राजकिशोर नगर मार्ग और 3 करोड़ की लागत से बनने वाला साइंस कॉलेज-चांटीडीह सब्जी मंडी मार्ग शामिल है। वहीं जिले भर में पीडब्ल्यूडी के 127.73 करोड़ रुपए के सात प्रोजेक्ट्स पर ब्रेक लग गया है। इनमें सबसे बड़ा झटका 68.43 करोड़ के सिरगिट्टी-सरवानी-पासीद और 32 करोड़ के नेहरू चौक-दर्रीघाट प्रोजेक्ट को लगा है। इसके अलावा 16 करोड़ का तिफरा-अमेरी मार्ग, 5.54 करोड़ का गोंदइया-भरदैय्याडीह-कलमीटार, 2.70 करोड़ का भद्रापारा-बरभाठा, 1.05 करोड़ का सीपत-बेलतरा और 1.01 करोड़ रुपए का लगरा-गतौरा-मोपका-खैरा-जयरामनगर मार्ग भी डामर की आखिरी परत बिछने के इंतजार में ठप पड़ा है। ठेकेदारों की मांग है कि जब तक लागत का एस्टीमेट संशोधित नहीं होता, तब तक मौजूदा दरों पर काम आगे बढ़ाना संभव नहीं है। मंत्री व कमिश्नर को पत्र, एस्टीमेट संशोधन की मांग: छत्तीसगढ़ पीडब्ल्यूडी कांट्रेक्टर एसोसिएशन के सौरव मिश्रा का कहना है कि डामर की उपलब्धता नहीं है और कीमत कम होने की संभावना भी फिलहाल नहीं दिख रही है। इस संबंध में निगम आयुक्त और पीडब्ल्यूडी मंत्री को पत्र भेजा गया है। वहीं, नगर निगम ठेकेदार संघ के अध्यक्ष अभिषेक सिंह ठाकुर का कहना है कि एस्टीमेट संशोधित नहीं हुआ तो पुराने रेट पर काम करना मुश्किल होगा। शासन को भेजी गई है ठेकेदारों की मांग
ठेकेदारों ने एस्टीमेट संशोधित करने की मांग रखी है। उनकी मांग शासन को भेज दी गई है। शासन के निर्देश के अनुसार आगे की कार्रवाई होगी।
– प्रकाश सर्वे कमिश्नर, नगर निगम शासन स्तर पर चल रही है प्रक्रिया
डामर की बढ़ी हुई दर के संबंध में शासन से फिलहाल कोई मार्गदर्शन नहीं आया है, लेकिन शासन स्तर पर प्रक्रिया चल रही है।
– आरके रात्रे चीफ इंजीनियर, पीडब्ल्यूडी, बिलासपुर भिलाई: 10 करोड़ के प्रोजेक्ट 8 माह से ठप भिलाई नगर निगम में डामर की भारी किल्लत और बढ़ी कीमतों के कारण 10 करोड़ रुपए की सड़क डामरीकरण परियोजनाएं पिछले आठ महीनों से अटकी हुई हैं। प्रभावित प्रमुख मार्गों में वार्ड-18 (शास्त्री अस्पताल-साक्षरता चौक सर्विस रोड), वार्ड-17 (नेहरू भवन-शास्त्री अस्पताल मार्ग), वार्ड-21 (कैलाश नगर), वार्ड-23 (घासीदास नगर) और वार्ड-25 (जवाहर नगर) की सड़कें शामिल हैं। निगम अधिकारियों के अनुसार कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने से डामर के दाम काफी बढ़ गए हैं, जिससे पुराने अनुबंध दर पर घाटे की आशंका के चलते ठेकेदारों ने काम रोक दिया है। इसके अलावा 15 जून से 15 अक्टूबर तक बारिश के प्रतिबंध के कारण अब काम 15 अक्टूबर के बाद ही शुरू होने की उम्मीद है, तब तक शहरवासियों को खस्ताहाल और गड्ढों भरी सड़कों से ही जूझना पड़ेगा।




