छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले का खैरी गांव, जो कभी अवैध कच्ची शराब के गढ़ के रूप में जाना जाता था, अब यहां के ग्रामीण पूर्ण शराबबंदी चाहते है। ग्रामीणों ने प्रशासन के सहयोग से गांव में पूर्ण शराबबंदी अभियान चलाया है। पिछले 5 दिन से यहां शराब बेचने पर
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दावा किया जाता है कि इस गांव में पिछले दल साल में 60 से ज्यादा युवाओं की मौत शराब सेवन से हुई थी। दशकों से खैरी गांव की 90 प्रतिशत आबादी का मुख्य व्यवसाय अवैध कच्ची शराब का निर्माण और बिक्री था।
इस अवैध कारोबार के कारण गांव में ऐसा माहौल था कि 20 साल पहले तक पुलिस भी वहां जाने से कतराती थी। ग्रामीणों में इतना भय था कि कोई भी पुलिस या मीडिया को जानकारी देने की हिम्मत नहीं कर पाता था।

ग्रामीणों भी गांव में शराबबंदी के लिए तैयार है।
गांव के बच्चे भी नशे की चपेट में आने लगे थे
इस अवैध शराब के सेवन से पिछले एक दशक में 60 से अधिक युवाओं की असामयिक मौत हुई। 12-15 वर्ष के बच्चे भी इस नशे की चपेट में आने लगे थे, जिससे गांव में एक गंभीर सामाजिक समस्या बन गई थी।
लगातार हो रही असमय मौतों और परिवारों पर पड़े इसके गंभीर प्रभाव ने धीरे-धीरे ग्रामीणों को बदलाव के लिए प्रेरित किया। हालांकि, अवैध शराब के कारोबार में लिप्त प्रभावशाली लोगों का भय और दबंगई अब भी एक बड़ी चुनौती थी।
ग्रामीण संत कुमार डहरिया के अनुसार, लोग आवाज उठाना चाहते थे, लेकिन दबंगों के डर से पीछे हट जाते थे। SP भावना गुप्ता ने थाना प्रभारी हेमंत पटेल को विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। जिसके बाद यहां शराबबंदी की गई।

पुलिस ने पहुंचकर गांव का स्थिति देखी।
जंगल, खेत, खलिहानों में शराब पूरा बंद
महिला सरपंच चित्ररेखा लक्ष्मी नारायण घृतलहरे ने कहा- 40-50 साल से चल रहे इस धंधे को अब पूरी तरह बंद करना है। गांव की महिलाओं और युवाओं का पूरा समर्थन है। पिछले पांच दिनों से गांव में पूर्ण शराबबंदी है। थाना प्रभारी की टीम ने जंगल, खेत, खलिहानों की तलाशी लेकर इसकी पुष्टि भी की।
पुलिस ने दी कार्रवाई की चेतावनी
थाना प्रभारी हेमंत पटेल ने ग्रामीणों को चेतावनी दी कि भविष्य में किसी भी तरह की गतिविधि पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी। ग्रामीणों ने पुलिस को आश्वस्त किया।
थाना प्रभारी पटेल ने कहा कि इसके लिए लगातार नजर और सक्रिय भूमिका की जरूरत होगी।

SP भावना गुप्ता।
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