छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर आंवला नवमी (अक्षय नवमी) का पर्व पारंपरिक श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर सुहागिन महिलाओं ने आंवला वृक्ष की पूजा-अर्चना की।
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महिलाओं ने अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। शहर के इमलीपारा, कंकालीनपारा व दसपुर सहित ग्रामीण इलाकों में आंवला वृक्ष के पास भीड़ उमड़ी। महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा करते हुए आंवले के पेड़ पर कच्चा सूत या मौली लपेटकर परिक्रमा की।

आंवला नवमी के दिन पूजा माना जाता है फलदायी
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आंवला वृक्ष में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का वास होता है। इसलिए इस दिन इनकी पूजा करना अत्यधिक फलदायी माना जाता है।
पूजा-अर्चना समाप्त होने के बाद, श्रद्धालुओं ने परंपरा के अनुसार, आंवला वृक्ष के नीचे बैठकर सामूहिक रूप से भोजन ग्रहण किया। इस पर्व पर आंवले के दान और ब्राह्मणों को भोजन कराने का भी विशेष महत्व बताया गया है।
महिलाओं ने इस दौरान आंवला नवमी की कथा सुनी और एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं दीं। यह पर्व धार्मिक आस्था के साथ-साथ दान, पुण्य और प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश भी देता है।
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