30 साल से व्हीलचेयर का इंतजार,राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता का दर्द:धमतरी के दिव्यांग चित्रकार बसंत साहू बोले- 1996 से रहा हूं आवेदन, नहीं मिली मदद

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धमतरी जिले के कुरूद निवासी राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित दिव्यांग चित्रकार बसंत साहू ने सोशल मीडिया पर अपनी पीड़ा साझा करते हुए प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मदद की गुहार लगाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 30 वर्षों से लगातार आवेदन देने के बावजूद उन्हें एक इलेक्ट्रॉनिक व्हीलचेयर और सम्मानजनक जीवन जीने के लिए आवश्यक सहायता नहीं मिल सकी। बसंत साहू ने अपनी फेसबुक पोस्ट में 1996 के तत्कालीन कलेक्टर और 2026 के वर्तमान कलेक्टर की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि तीन दशकों में उन्होंने हर कलेक्टर के समक्ष अपनी मांग रखी, लेकिन आज तक उनकी बुनियादी जरूरत पूरी नहीं हो सकी। 1995 के सड़क हादसे ने बदल दी जिंदगी बसंत साहू की जिंदगी 15 सितंबर 1995 को हुए एक सड़क हादसे के बाद पूरी तरह बदल गई। बाइक दुर्घटना में उनकी रीढ़ की हड्डी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे वे करीब 95 प्रतिशत दिव्यांग हो गए। डॉक्टरों ने उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और बिस्तर पर ही चित्रकारी शुरू कर दी। बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के उन्होंने अपनी कला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। देश-विदेश तक बनाई पहचान आज बसंत साहू की पेंटिंग्स देश और विदेश में सराही जाती हैं। उन्होंने अपनी कलाकृतियों के माध्यम से बस्तर कला और छत्तीसगढ़ की संस्कृति को नई पहचान दिलाई है। उनके योगदान के लिए उन्हें 3 दिसंबर, अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय सम्मान से भी नवाजा जा चुका है। दिव्यांग बच्चों को भी दे रहे प्रशिक्षण बसंत साहू केवल एक कलाकार ही नहीं, बल्कि समाजसेवी भी हैं। वे कुरूद स्थित ‘बसंत फाउंडेशन’ में स्कूली बच्चों और 80 से 90 प्रतिशत तक दिव्यांग बच्चों को चित्रकला का प्रशिक्षण देते हैं। उनके कई छात्र आज खैरागढ़ कला विश्वविद्यालय में अध्ययन कर रहे हैं। ‘यह सिर्फ मेरी नहीं, हजारों दिव्यांगों की आवाज’ बसंत साहू का कहना है कि उन्होंने वर्ष 1996 से 2026 तक हर कलेक्टर को आवेदन दिया। उनकी मांग सिर्फ एक इलेक्ट्रॉनिक व्हीलचेयर और सम्मानजनक जीवन जीने लायक सहायता की रही, लेकिन तीन दशक बाद भी उन्हें इंतजार है। उन्होंने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा कि यह केवल उनकी नहीं, बल्कि उन हजारों दिव्यांगों की आवाज है, जो वर्षों से अपनी बुनियादी सुविधाओं का इंतजार कर रहे हैं। कलेक्टर बोले- शासन को भेजा गया है प्रस्ताव धमतरी कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने बताया कि बसंत साहू को विभाग की सामान्य ट्राइसाइकिल नहीं चाहिए, बल्कि उनकी आवश्यकता एक विशेष इलेक्ट्रॉनिक ट्राइसाइकिल या व्हीलचेयर की है, जिसकी कीमत अधिक होने के कारण यह नियमित सरकारी योजना में शामिल नहीं है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेज दिया गया है। फंड स्वीकृत होने पर बसंत साहू को यह सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
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