सावन सोमवार और नागपंचमी का दुर्लभ संयोग:अमरकंटक से ज्वालेश्वर धाम तक उमड़ा आस्था का जनसैलाब,जयकारों से गूंजा MP-छत्तीसगढ़ बॉर्डर

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सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी के संयोग पर मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ सीमा स्थित प्रसिद्ध ज्वालेश्वर महादेव मंदिर में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। सुबह से ही हजारों कांवड़िए और शिवभक्त मंदिर की ओर पहुंचने लगे। श्रद्धालुओं ने पहले अमरकंटक में मां नर्मदा के उद्गम स्थल पर स्नान कर पूजा-अर्चना की और कांवड़ में पवित्र जल भरा। इसके बाद करीब 8 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर छत्तीसगढ़ स्थित ज्वालेश्वर महादेव पहुंचे। पूरे रास्ते ‘बोल बम’ और ‘हर हर महादेव’ के जयकारों से अंचल गूंजता रहा। नर्मदा उद्गम पर पूजा, फिर कांवड़ में भरा पवित्र जल हजारों श्रद्धालु सबसे पहले अमरकंटक स्थित मां नर्मदा के उद्गम स्थल पहुंचे। यहां नर्मदा मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद कांवड़ों की आरती कर श्रद्धालुओं ने नर्मदा जल भरा। कांवड़िए जल लेकर पैदल ही ज्वालेश्वर महादेव के लिए रवाना हुए। करीब 8 किलोमीटर की यात्रा के बाद श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और भगवान शिव का जलाभिषेक किया। स्वयंभू शिवलिंग पर चढ़ाया नर्मदा जल ज्वालेश्वर धाम पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं ने यहां स्थापित स्वयंभू शिवलिंग पर नर्मदा के उद्गम स्थल से लाया गया पवित्र जल अर्पित किया। इसके साथ ही बेलपत्र, दूध, दही और धतूरा चढ़ाकर भगवान भोलेनाथ की पूजा की गई। मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। नाग पंचमी पर नाग देवता की भी पूजा सावन सोमवार के साथ नाग पंचमी का संयोग होने से इस बार धार्मिक आयोजन का महत्व और बढ़ गया। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस अवसर पर भगवान शिव के साथ नाग देवता की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालुओं ने नाग देवता की पूजा कर सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना की। जयकारों से गूंजा MP-छत्तीसगढ़ बॉर्डर अमरकंटक से ज्वालेश्वर तक कांवड़ियों की आवाजाही के चलते पूरे क्षेत्र में भक्ति का माहौल बना रहा। रास्ते में जगह-जगह श्रद्धालुओं की भीड़ दिखाई दी। ‘बोल बम’, ‘हर हर महादेव’ और ‘जय भोलेनाथ’ के जयकारों से सीमावर्ती इलाका शिवमय नजर आया। सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी के इस संयोग ने ज्वालेश्वर धाम में श्रद्धा और भक्ति का विशेष वातावरण बना दिया।
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