कोण्डागांव में पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा:48 वैद्यों की बाड़ी में बनेगा 'हीलर हर्बल गार्डन',औषधीय पौधों के लिए पहली किस्त मंजूर

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कोण्डागांव जिले में पारंपरिक चिकित्सा पद्धति और जड़ी-बूटियों के ज्ञान को फिर से बढ़ावा देने की पहल शुरू की गई है। जिला स्तरीय वैद्य सम्मेलन में ‘हीलर हर्बल गार्डन योजना’ का शुभारंभ किया गया। योजना के तहत जिले के 48 वैद्यों को अपनी बाड़ी में औषधीय पौधों का छोटा उद्यान विकसित करने के लिए पहली किस्त की स्वीकृति दी गई है। इसका उद्देश्य जंगलों और बाड़ियों तक सीमित होती जा रही पारंपरिक वनौषधियों को घर-आंगन तक पहुंचाना और उनके ज्ञान को अगली पीढ़ी तक संरक्षित करना है। करीब 200 वैद्य सम्मेलन में हुए शामिल सम्मेलन का आयोजन आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड की ओर से दक्षिण कोण्डागांव वनमंडल ने काष्ठागार परिसर में किया। बोर्ड अध्यक्ष विकास मरकाम ने योजना का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में दक्षिण कोण्डागांव और केशकाल वनमंडल क्षेत्र से करीब 200 वैद्य शामिल हुए। वैद्यों ने साझा किए जड़ी-बूटियों से इलाज के अनुभव सम्मेलन में वैद्य रामप्रसाद निषाद, सुखमन मरकाम, हीरालाल मरकाम, जेठूराम प्रधान, चिला पोथाम, जयनाथ मरकाम, विशाल सोरी, सकालु राम कोर्राम, मोहन नेताम और नथाराम नाग सहित अन्य वैद्यों ने पारंपरिक जड़ी-बूटियों से उपचार के अनुभव साझा किए। उन्होंने पारंपरिक ज्ञान को दस्तावेज के रूप में दर्ज करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर दिया। वैद्यों ने पहचान पत्र जारी करने, पारंपरिक उपचार पद्धतियों को दर्ज करने और लगातार कम हो रही वनौषधियों के संरक्षण में उनकी भूमिका तय करने की मांग भी रखी। कम हो रही वनौषधियों की जानकारी जुटाएगा विभाग दक्षिण कोण्डागांव वनमंडलाधिकारी चूड़ामणि सिंह ने वैद्यों के अनुभवों को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने अलग-अलग बीमारियों के विशेषज्ञ वैद्यों की सूची तैयार करने और औषधियों की मात्रा व उपयोग की जानकारी व्यवस्थित करने का सुझाव दिया। उन्होंने वैद्यों से ऐसी वनौषधियों की जानकारी देने को भी कहा, जिनकी उपलब्धता जंगलों में लगातार कम हो रही है, ताकि उनके संरक्षण और संवर्धन की योजना तैयार की जा सके। औषधीय पौधों के लिए मिलेगा आर्थिक और तकनीकी सहयोग बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जे.ए.सी.एस. राव ने बताया कि ‘हीलर हर्बल गार्डन’ के जरिए वैद्य अपनी बाड़ी में रोजमर्रा के उपयोग में आने वाली औषधीय वनस्पतियां उगा सकेंगे। इसके लिए बोर्ड की ओर से आर्थिक और तकनीकी सहयोग दिया जाएगा। इसके अलावा वैद्यों के समूहों को जड़ी-बूटियां पीसने के लिए निःशुल्क पल्वराइजर मशीन उपलब्ध कराने की भी योजना है। इससे पारंपरिक चिकित्सा से जुड़े वैद्यों को औषधीय सामग्री तैयार करने में सुविधा मिलेगी।
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