राज्य में मनरेगा के तहत किए जा रहे कार्यों की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं। इस वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक केवल 45 प्रतिशत ग्राम पंचायतों में ही सोशल ऑडिट का कार्य पूरा हो सका है, जबकि शेष 55 प्रतिशत पंचायतों में यह प्रक्रिया अब तक शुरू भी नहीं
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सरकारी नियमों के अनुसार प्रत्येक ग्राम पंचायत में वित्तीय वर्ष में कम से कम दो बार सोशल ऑडिट किया जाना अनिवार्य है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि गांवों में मनरेगा के तहत हुए कार्य सही ढंग से पूरे हुए हैं और मजदूरों को समय पर भुगतान मिल रहा है। राज्य में कुल 11,690 ग्राम पंचायतें हैं।
इनमें से अभी तक सिर्फ 5,249 पंचायतों में ही एक बार ऑडिट हुआ है। बची 6441 से अधिक पंचायतों में ऑडिट नहीं होने से काम की गुणवत्ता, भुगतान में देरी और अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति सामने नहीं आ सकी है। सोशल ऑडिट टीमों की कमी, स्टाफ के अभाव और समन्वय की दिक्कतों के कारण प्रक्रिया धीमी पड़ी है। हालांकि ग्रामीण विकास विभाग का दावा है कि आगामी महीनों में शेष पंचायतों में ऑडिट कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
मनरेगा में होते हैं 250 से ज्यादा काम मनरेगा के तहत ढ़ाई सौ से ज्यादा तरह के काम कराए जा सकते हैं। इसमें पौधारोपण, जलाशयों और नदियों की सफाई और गहरीकरण, सिंचाई नहरों का निर्माण और सुधार, अनाज भंडारण के लिए गोदाम और कृषि से संबंधित शेडों का निर्माण, आवास निर्माण, पशुओं के लिए गौशाला बनाने जैसे काम शामिल हैं।
रायपुर समेत 8 जिलों के 60% गांवों में ऑडिट ही नहीं हुआ प्रदेश के 8 जिले सोशल ऑडिट में काफी पिछड़े हुए हैं। इन जिलों की 60% ग्राम पंचायतों में टीम नहीं पहुंची। वजह सोशल ऑडिट के लिए जिम्मेदार अफसरों और कर्मचारियों के राज्य से लेकर ब्लॉक स्तर पर लगभग आधे पद रिक्त हैं। स्वीकृत 586 पदों में से 266 रिक्त हैं। इसलिए ग्रामीण स्तर पर मनरेगा के तहत होने वाले कामों की स्थिति की पड़ताल नहीं हो पा रही है।
11 साल से कर्मचारियों की सेलरी नहीं बढ़ी, कर्मचारी छोड़ रहे जॉब सामाजिक अंकेक्षण इकाई में राज्य से लेकर ब्लॉक स्तर पर 586 पद स्वीकृत हैं लेकिन 266 पद रिक्त हैं। विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पिछले 11 साल से यहां पदस्थ कर्मचारियों की सेलरी नहीं बढ़ी है इसलिए वे काम छोड़कर जा रहे हैं। दूसरी तरफ, पिछले काफी समय से भर्ती भी नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि सेट अप के अनुसार पदों को भरने के लिए राज्य सरकार के पास प्रस्ताव भेजा गया है।
मनरेगा में 100 दिनों के रोजगार का हक: केंद्र सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को रोजगार देने के लिए मनरेगा योजना चलाई जाती है. इसके तहत जॉब कार्ड धारकों को साल में 100 दिनों का रोजगार मुहैया कराया जाता है। मनरेगा के तहत 250 से ज्यादा तरह के काम करके रोजाना 300 रुपए की कमाई की जा सकती है। मनरेगा योजना में जॉब कार्डधारक हर साल 100 दिनों के रोजगार का हकदार है।

भर्ती के लिए भेजा प्रस्ताव बहुत से कर्मचारियों ने नौकरी छोड़ दिया है इसलिए सोशल ऑडिट का काम प्रभावित हुआ है। भर्ती के लिए शासन को युक्तियुक्तकरण के साथ प्रस्ताव भेजा गया है। डॉ. जितेंद्र कुमार सिंगरौल, संचालक छग सामाजिक अंकेक्षण इकाई।
इसलिए होता है सोशल ऑडिट ग्रामीण विकास मंत्रालय पात्र परिवारों को मनरेगा में काम के लिए जॉब कार्ड देता है। लोगों को रोजगार मिल रहा है या नहीं इसकी पड़ताल के लिए ही सामाजिक अंकेक्षण इकाई की टीम ग्राम पंचायतों में जाती है और काम और भुगतान का फिजिकल वेरिफिकेशन और क्रॉस चेक करती है।
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