![]()
सोमवार को महासमुंद तहसील भर के गौसेवकों ने एकजुट होकर भारत सरकार के नाम एसडीएम महासमुंद को प्रार्थना पत्र सौंपा। उनकी स्पष्ट मांग है कि गौमाता को आधिकारिक रूप से राष्ट्र माता का दर्जा दिया जाए और संविधान के महत्वपूर्ण अनुच्छेदों में संशोधन कर गौ-संरक्षण को मौलिक कर्तव्यों का हिस्सा बनाया जाए। गौसेवकों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि केवल निर्देश देने भर से गौवंश सुरक्षित नहीं होगा, इसके लिए कानून को सशक्त करना होगा। ज्ञापन में मुख्य रूप से तीन संवैधानिक संशोधनों का सुझाव दिया गया है। वर्तमान में यह अनुच्छेद राज्यों को निर्देश देता है, लेकिन मांग है कि इसमें संशोधन कर पूरे देश में गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध और तस्करी पर कठोर दंड का राष्ट्रीय कानून बने। मूल कर्तव्यों में गौ-संस्कृति के संरक्षण को स्पष्ट रूप से जोड़ा जाए ताकि नागरिक अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूक रहें। प्राकृतिक पर्यावरण के संरक्षण के साथ देशी नस्लों के संवर्धन को प्रत्येक नागरिक का अनिवार्य कर्तव्य घोषित किया जाए। ज्ञापन में इस मांग के पीछे 5 प्रमुख तर्क दिए गए हैं, जो देश की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण से सीधे जुड़े हैं। जैविक खेती, पंचगव्य उत्पाद और बायोगैस के जरिए गौवंश किसानों की आय दोगुनी करने का सबसे बड़ा जरिया है। गौ-संरक्षण से आत्मनिर्भर भारत के सपने को मजबूती मिलेगी। रासायनिक खाद के बढ़ते प्रयोग के बीच देशी गाय का गोबर और गौमूत्र भूमि की उर्वरता बनाए रखने का एकमात्र प्राकृतिक विकल्प है। अभी अलग-अलग राज्यों में अलग कानून होने के कारण तस्करी को बढ़ावा मिलता है। राष्ट्रीय कानून बनने से तस्करी पर पूरी तरह लगाम लगेगी। गाय भारतीय सभ्यता और कृषि का आधार रही है। उसे राष्ट्रीय सम्मान देना देश की साझा संस्कृति का सम्मान होगा। मांग पत्र को केंद्र सरकार तक भेजा जाएगा : एसडीएम अक्षा गुप्ता ने गौसेवकों के ज्ञापन को स्वीकार करते हुए आश्वस्त किया कि उनकी भावनाओं और मांग पत्र को उचित माध्यम से केंद्र सरकार तक भेजा जाएगा। इस दौरान बड़ी संख्या में गौसेवक, प्रबुद्ध नागरिक और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
<
