अमेरिका ने भारत की सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देते हुए 657 प्राचीन वस्तुएं लौटाईं। …और पढ़ें

HighLights
- अमेरिका ने भारत को 657 प्राचीन धरोहरें लौटाईं
- 2014 में न्यूयॉर्क में निजी संग्रह में ट्रैक हुई
- 2025 में मैनहट्टन अधिकारियों ने प्रतिमा जब्त की
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर: अमेरिका ने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करते हुए लगभग 1.4 करोड़ डॉलर मूल्य की 657 प्राचीन वस्तुएं वापस सौंपी हैं। इन धरोहरों में रायपुर से चोरी हुई बहुमूल्य अवलोकितेश्वर की कांस्य प्रतिमा भी शामिल है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 20 लाख डॉलर (लगभग 19 करोड़ रुपये) है। यह दुर्लभ प्रतिमा महासमुंद जिले के ऐतिहासिक सिरपुर स्थित लक्ष्मण मंदिर परिसर के पास से प्राप्त हुई थी।
43 साल पहले हुई थी चोरी
शिलालेख के अनुसार इस प्रतिमा का निर्माण सिरपुर निवासी कारीगर द्रोणादित्य ने किया था। यह प्रतिमा वर्ष 1939 में मिले कांस्य प्रतिमाओं के भंडार का महत्वपूर्ण हिस्सा थी, जिसे बाद में रायपुर के महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय में संरक्षित किया गया। जानकारी के मुताबिक, वर्ष 1982 के आसपास यह प्रतिमा संग्रहालय से चोरी हो गई और तस्करी के जरिए अमेरिका पहुंचा दी गई।
न्यूयॉर्क में हुई पहचान और जब्ती
वर्ष 2014 में इस प्रतिमा को न्यूयॉर्क के एक निजी संग्रह में ट्रैक किया गया, जिसके बाद इसकी जांच शुरू हुई। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद 2025 में मैनहट्टन जिला अटॉर्नी के ‘एंटीक्विटीज ट्रैफिकिंग यूनिट’ ने इसे जब्त कर लिया। इसके बाद इसे भारत को वापस सौंपने की प्रक्रिया पूरी की गई।
उत्कृष्ट शिल्पकला का उदाहरण
यह प्रतिमा अपनी कलात्मक बनावट के लिए विशेष मानी जाती है। इसमें अवलोकितेश्वर को अलंकृत सिंहासन पर बैठे हुए दर्शाया गया है। सिंहासन के ऊपर दोहरे कमल की नक्काशी इसकी प्रमुख विशेषता है, जो उस समय की उन्नत शिल्पकला को दर्शाती है।
तस्करी नेटवर्क का खुलासा
इस मामले में अंतरराष्ट्रीय कला तस्कर सुभाष कपूर और उनके नेटवर्क से जुड़ी नैन्सी वीनर का नाम सामने आया है। इन धरोहरों को न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास में दूत राजलक्ष्मी कदम की मौजूदगी में भारत को सौंपा गया, जिससे देश की सांस्कृतिक विरासत को बड़ी राहत मिली है।
यह वापसी न केवल रायपुर, बल्कि पूरे देश के लिए सांस्कृतिक गौरव का क्षण है। अवलोकितेश्वर की प्रतिमा को वापस लाया जाएगा। इसके लिए भारत सरकार का पत्र का इंतजार कर रहे हैं। जैसे ही सूचना मिलेगी, हम उसे लेने जाएंगे।
– राजेश अग्रवाल, पुरातत्व एवं संस्कृति मंत्री
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