राजधानी रायपुर से निकली सिख समाज की शहीदी यात्रा मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिला मुख्यालय पहुंची। मनेन्द्रगढ़ में पंज प्यारों की अगुवाई में कीर्तन करते हुए यह यात्रा शहर के चौक-चौराहों से गुरुद्वारा पहुंची।
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इस दौरान सिख समाज के लोगों के साथ नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिमा यादव और अन्य जनप्रतिनिधियों ने यात्रा का स्वागत किया। सभी ने गुरु ग्रंथ साहिब जी के दर्शन किए।
समाज के गुरमीत सिंह ने बताया कि गुरु तेग बहादुर साहिब की 350वीं शहीदी शताब्दी के उपलक्ष्य में यह यात्रा 2 अक्टूबर को गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा रायपुर से निकाली गई है। यह यात्रा पूरे प्रदेश का भ्रमण कर 12 अक्टूबर को रायपुर में ही खत्म होगी।

क्यों मनाते है गुरु तेग बहादुर साहिब की शहीदी शताब्दी
समाज के सदस्यों ने बताया कि गुरु तेग बहादुर साहिब ने कश्मीरी पंडितों की पुकार पर हिंदू धर्म की रक्षा के लिए मुगल बादशाह औरंगजेब की नीतियों का डटकर मुकाबला किया था।
इसी के परिणामस्वरूप, उन्हें दिल्ली में उनके तीन वफादार साथियों भाई सती दास, भाई मति दास और भाई दयाला जी सहित सैकड़ों अनुयायियों के साथ गिरफ्तार कर लिया गया था।
चांदनी चौक में सैकड़ों शिष्यों को शहीद करने के बाद, भाई सती दास जी को आरी से चीर दिया गया, भाई मति दास जी को जीवित जला दिया गया और भाई दयाला जी को उबाल कर मार डाला गया। अंत में, गुरु साहिब का शीश धड़ से अलग कर दिया गया।
आज भी दिल्ली के चांदनी चौक में स्थित शीश गंज और रकाब गंज गुरुद्वारा इन शहीद स्थलों के साक्षी हैं।

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