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बलरामपुर जिले में सामाजिक बैठक में शामिल नहीं होने पर समाज ने 250 रुपए का जुर्माना लगा दिया। जुर्माने की रकम नहीं अदा करने पर परिवार को समाज से बहिष्कृत कर दिया गया। 20 सालों से परिवार समाज से बहिष्कृत होने के कारण अब बेटे-बेटियों की शादी भी नहीं हो पा रही है। पीड़ित ने पुलिस से भी गुहार लगाई, लेकिन पहल नहीं हुई। मामला शंकरगढ़ थाना क्षेत्र का है। जानकारी के मुताबिक, शंकरगढ़ थाना क्षेत्र के आमगांव निवासी महाबीर प्रसाद गुप्ता का परिवार बीते दो दशकों से समाज से बहिष्कृत है। पीड़ित महाबीर प्रसाद गुप्ता ने बताया कि 2007 में एक सामाजिक बैठक में शामिल होने के लिए उन्होंने रजिस्टर में हस्ताक्षर किया था। वे बाजारों में दुकान लगाते थे। मां की तबीयत खराब होने पर वे गृह ग्राम झारखंड चले। मां का देहांत होने के कारण वे दाह-संस्कार के बाद लौटे। समाज ने लगाया जुर्माना, नहीं अदा करने पर बहिष्कार
सामाजिक बैठक में शामिल न होने पर महाबीर प्रसाद गुप्ता पर समाज ने 250 रुपए का अर्थदंड लगा दिया। उस समय यह रकम बड़ी थी और वे रकम नहीं चुका सके। समाज ने लिखा-पढ़ी कर उनके परिवार को बहिष्कृत कर दिया और नाता तोड़ लिया। 20 सालों से बहिष्कार झेलते अब परिवार थक चुका है। बेटे-बेटी की नहीं हो रही शादी
महाबीर प्रसाद गुप्ता ने बताया कि उस समय बच्चे छोटे थे, अब बड़े हो गए हैं। सामाजिक बहिष्कार के कारण बेटे-बेटियों की शादी नहीं हो पा रही है। कोई रिश्ता आता भी है तो समाज के लोग रिश्ते तोड़वा देते हैं। पीड़ित ने बताया कि वे समाज की बैठक में शामिल होकर बहिष्कार समाप्त करने की गुहार लगा चुके हैं, लेकिन समाज के लोगों ने उन्हें बैठक से बाहर कर दिया। पीड़ित के बेटे और बेटी ने कहा कि वे सामाजिक बहिष्कार से थक चुके हैं और चाहते हैं कि यह समाप्त हो। पीड़ित महाबीर प्रसाद गुप्ता ने बताया कि सामाजिक बहिष्कार की सूचना उन्होंने शंकरगढ़ थाने और बलरामपुर एसपी को भी दी थी, लेकिन पहल नहीं हो सकी। गांव के दूसरे समाज के लोग भी सामाजिक बहिष्कार से वाकिफ हैं। गांव के रामा शंकर पैकरा ने कहा कि परिवार दो दशक से बहिष्कृत है। इसे समाप्त होना चाहिए। मामले में जानकारी चाहे जाने पर शंकरगढ़ थाना प्रभारी जितेंद्र जायसवाल से संपर्क नहीं हो सका।
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