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रेलवे में कोच अटेंडर की नौकरी कर रहा साइबर ठगों का बिचौलिया गुरुवार को पकड़ा गया। ट्रेन अटेंडर का काम करते हुए वह अलग-अलग शहरों से म्यूल अकाउंट की व्यवस्था कर दस्तावेज ठगों तक पहुंचाने का काम करता था। आरोपी पांच बड़े मामलों का मास्टर माइंड था। रेंज साइबर थाने की टीम ने म्यूल अकाउंट से जुड़े बड़े मास्टर माइंड को गिरफ्तार किया है।
पांच साइबर अपराधों का मुख्य आरोपी दीपक विश्वकर्मा (45) गिरफ्तारी से बचने के लिए रेलवे में कोच अटेंडर बनकर लगातार अपना ठिकाना बदल रहा था। इसकी जानकारी पुलिस को साइबर क्राइम पोर्टल में दर्ज म्यूल बैंक खातों की विशेष जांच से हुई। आरोपी द्वारा दिए गए सभी खाते डिजिटल अरेस्ट, शेयर ट्रेडिंग फर्जी एप और गूगल रिव्यू जैसे बड़े साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल हो रहे थे।
जैसे ही पुलिस उसके घर पहुंची, वह भाग गया। इसके बाद दीपक ने गिरफ्तारी से बचने रेलवे में कोच अटेंडर की नौकरी शुरू कर दी। इसी आड़ में वह दिल्ली, यूपी और भोपाल में सक्रिय अपने अन्य साथियों तक लोगों से खरीदे गए म्यूल अकाउंट पहुंचाता था। गुरुवार को वह म्यूल अकाउंट के पासबुक और एटीएम लेने बिलासपुर आया, जिसकी सूचना पुलिस को थी, इसलिए आरोपी आसानी से पकड़ा गया।
बिलासपुर | बिलासपुर | खुद को बिल्डर बताकर युवक ने 10 से ज्यादा दुकान संचालकों को लाखों रुपए का सामान ठग लिया। आरोपी दुकानदारों से सामान खरीदता था और एवज में फर्जी चेक देता था। सिविल लाइन पुलिस ने रिपोर्ट पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है। जरहाभाठा स्थित दीपक इंटरप्राइजेस के संचालक विशाल पमनानी से 2 अगस्त को उज्जवल की पहचान ग्राहक के रूप में हुई। उसने 89,400 रुपए का इलेक्ट्रिक सामान खरीदा और ऑनलाइन पेमेंट का झांसा देने के बाद बैंक चेक दिया, जो बाउंस हो गया। इसी प्रकार उज्जवल ने सांवारिया इलेक्ट्रिकल्स से 1.26 लाख, मित्तल सेल्स मोपका से 3.07 लाख, साई इलेक्ट्रिकल्स से 1.34 लाख और दीप टिम्बर एंड हार्डवेयर से 9.60 लाख सहित कुल 20 लाख से अधिक का सामान ठग लिया।
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