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बालोद जिले के डौंडीलोहारा ब्लॉक के ग्राम तुएगोंदी में शनिवार को देव जात्रा का आयोजन किया गया। जामड़ीपाठ में पूजा पद्धति और अवैध निर्माण को लेकर चल रहे विवाद के बीच इस आयोजन में बालोद, राजनांदगांव और धमतरी जिले के करीब 15 हजार से अधिक लोग शामिल हुए, लेकिन पुलिस प्रशासन करीब 30 किमी दूरी से सुरक्षा के दृष्टिकोण से गाड़ियों में जांच चलती रही। करीब 1 हजार से अधिक पुलिस बल सुरक्षा की दृष्टि से लगाए गए थे। डौंडीलोहारा से जामड़ीपाठ की ओर जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर बेरिकेड्स लगाए गए थे। मंदिर की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग को पूरी तरह बंद कर दिया गया था। कई जगहों पर आदिवासी समाज के लोगों और पत्रकारों के बीच अंदर जाने को लेकर पुलिस प्रशासन के साथ तीखी बहस होती रही। 18 गांव के देवी-देवताओं को किया गया आमंत्रित इस कार्यक्रम में डौंडीलोहारा रियासत के रजवाड़े के समय स्थापित देवी-देवताओं सहित आस-पास के करीब 18 गांव के देवी देवता और देवपंचो को आमंत्रित किया गया था। शुक्रवार देर शाम डौंडीलोहारा से मां दंतेश्वरी, शीतला मंदिर सहित आंगा देवता और अन्य देवी-देवता तुएगोंदी पहुंचे। जहां पूजा अर्चना के बाद रात 10 बजे से देव जात्रा और देवताओं के बीच सहमति लेने और गांव बनाने का कार्य प्रारंभ किया गया। शनिवार सुबह 11 बजे तक पूजा चला। 4 किमी खड़ी पहाड़ चढ़कर पहुंचे पाठ बाबा आदिवासी समाज की ओर से तुएगोंदी में पूजा के बाद पाठ बाबा और जल कैना देवता को मनाने के लिए बैगा-सिरहा और देवपंच पैदल 4 किमी खड़ी पहाड़ चढ़ाई कर जामड़ी पाठ पहुंचे। जहां से सीढ़ियों के द्वारा नीचे उतर कर जल कैना (जल देवता) को मनाने की प्रक्रिया देर शाम तक चलती रही। मधुमक्क्खियों का हुआ हमला, सैकड़ों लोग भागे देव जात्रा के दौरान सिर्फ चिन्हित लोगों को पाठ बाबा तक जाने की अनुमति थी। समाज के लोगों ने अन्य लोगों को पाठ बाबा तक जाने के लिए मना किया। लेकिन फिर भी भीड़ दर्शन करने के जाने लगे। इसी दौरान सैकड़ों लोगों पर मधुमक्क्खियो ने हमला कर दिया। जिसके बाद लोग जान बचा कर इधर उधर भागने लगे।
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