नईदुनिया प्रतिनिधि बिलासपुर। बिलासपुर के जल संसाधन विभाग सेवा परिसर में स्थित आस्था और चमत्कार का केंद्र ‘कालजयी शिव मंदिर’ आज 25 मई 2026 को अपनी स्थापना के गौरवशाली 16 वर्ष पूरे कर चुका है। आज ही के दिन 25 मई 2010 को इस मंदिर की नींव जल संसाधन विभाग के तत्कालीन मुख्य अभियंता आरपी द्विवेदी और स्टेनो आरके गुप्ता के मार्गदर्शन में रखी गई थी। 16वें स्थापना वर्ष के पावन अवसर पर आज सुबह से ही पूरा मंदिर परिसर ‘हर-हर महादेव’ और वैदिक मंत्रोच्चार से गुंजायमान हो रहा।
पुजारी बालमुकुंद तिवारी और सहयोगी पंडित सतिष पांडेय,चंद्र्कांत,रामेश्वर दुबे सहित ज्योतिषाचार्य मनोज तिवारी के सानिध्य में आज महादेव का गन्ने के रस, घृत, पंचामृत, शहद और गंगाजल से विशेष रुद्राभिषेक किया गया।
इसके बाद बाबा का प्रिय फूलों से दिव्य श्रृंगार कर महाआरती की गई, जिसमें विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों सहित बिलासपुर के सैकड़ों नागरिकों ने हिस्सा लिया। इस मंदिर की सबसे बड़ी महिमा यह है कि इसे बिलासपुर का ‘उज्जैन धाम’ माना जाता है। यहाँ ग्रह दोष, पितृदोष और विशेष रूप से कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए रायपुर, कोरबा, अंबिकापुर समेत पूरे प्रदेश से लोग आते हैं। अनुष्ठान के लिए विशेष तौर पर नासिक से पवित्र मिट्टी मंगवाई जाती है। 16वें वर्षगांठ के इस पावन मौके पर आज सुंदरकांड पाठ, महाभंडारा और छप्पन भोग का आयोजन किया गया है, वहीं शाम होते ही पूरा शिवालय रंग-बिरंगी लाइटों की रौशनी से सराबोर नजर आ रहा है।
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स्थापना के 16 वर्ष पूर्ण: 25 मई 2010 को स्थापित हुए बिलासपुर के इस प्रसिद्ध मंदिर ने आज 25 मई 2026 को अपने सफल 16 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस उपलक्ष्य में भव्य स्थापना दिवस मनाया जा रहा है।
उज्जैन के महाकाल सा स्वरूप: मान्यता है कि यहाँ भगवान शिव ‘कालजयी’ (काल को जीतने वाले) के रूप में साक्षात उज्जैन के महाकालेश्वर की तरह विराजित हैं, जो भक्तों को अभय का वरदान देते हैं।
नासिक की विशेष पूजा पद्धति: यहाँ कालसर्प दोष निवारण के लिए महाराष्ट्र के नासिक से विशेष रूप से मिट्टी लाई जाती है, जिससे शिवलिंग और नागफास यंत्र बनाकर वैदिक रीति से अनुष्ठान होता है।
मंत्रोच्चार से गूंजा परिसर: स्थापना पर्व के पावन सोमवार को भोलेनाथ का गन्ने के रस, दूध, दही, पंचामृत और शहद से महाअभिषेक किया गया। शाम को पूरा परिसर रंग-बिरंगी लाइटों से जगमगा उठा।
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