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अंबिकापुर के घनी आबादी वाले इलाके में संचालित मुकेश प्लास्टि एजेंसी में लगी भीषण आग के बाद कलेक्टर सरगुजा ने एक्शन लेते हुए सभी पटाखा गोदामों को शहर से बाहर हटाने का निर्देश दिया है। कलेक्टर ने मुकेश प्लास्टिक हाउस में लगी भीषण आग की जांच के लिए कमेटी भी बनाई है। इसमें एफएसएल के अधिकारी भी शामिल किए गए हैं। दुकान में बड़ी मात्रा में पटाखों के विस्फोट हुए, यह भी जांच के दायरे में है। अंबिकापुर के राममंदिर के सामने गली में संचालित मुकेश प्लास्टिक हाउस में गुरुवार दोपहर भीषण आग लग गई थी, जिसे काबू करने में 20 घंटे से अधिक का समय लगा। आग अब भी बिल्डिंग के अंदरूनी इलाके में लगी हुई है, लेकिन तीन मंजिला मकान के उपरी माले के ढहने के कारण फायर ब्रिगेड का अमला बाहर से ही पानी डाल रहा है। मौके पर शुक्रवार देर शाम तक फायर ब्रिगेड का अमला तैनात रहा।
आगजनी की जांच करेगा संयुक्त दल
जिला दंडाधिकारी व कलेक्टर अजीत वसंत ने आगजनी की जांच के लिए संयुक्त जांच दल का गठन किया गया है। कलेक्टर ने सात दिवस के भीतर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर द्वारा गठित जांच दल में अंबिकापुर एसडीएम, सीएसपी अंबिकापुर, एफएसएल के अधिकारी,, जिला नगर सेना तथा नगर पालिक निगम के ईई शामिल हैं। जांच दल घटना के सभी पहलुओं की विस्तृत जांच करेगा। इसमें पटाखों के विस्फोट से आग के भयावह होना भी शामिल है। हादसे के बाद मौके पर कलेक्टर, एसपी सहित करीब तीन घंटे मौजूद रहे, इस दौरान भी पटाखों में धमाके होते रहे। वहीं संचालक का दावा है कि दुकान में पटाखे नहीं रखे गए थे। सभी पटाखा गोदाम शहर से बाहर होंगे शिफ्ट
कलेक्टर अजीत वसंत ने आगजनी की घटना के बाद नगर में संचालित फटाका गोदामों को शहर से बाहर शिफ्ट करने का आदेश दिया है। अंबिकापुर में कुल 08 स्थाई फटाका लायसेंसधारी एवं 02 फटाका निर्माण के लायसेंसधारी हैं। इनमें मो. जुनैद, सतीश कुमार जैन, विनोद कुमार जैन, रोशनलाल गोयल, आशीष कुमार अग्रवाल, अजय कुमार गोयल, गौरीशंकर पाण्डेय, मुकेश कुमार अग्रवाल (दो लाइसेंस, जिनमें एक फटाका निर्माण हेतु) तथा मनोज कुमार मारू (फटाका निर्माण हेतु) शामिल हैं। एसडीएम अंबिकापुर सभी गोदामों को शहर से बाहर संचालित होने की जांच करेंगे। इसमें यह भी देखा जाएगा कि क्या ये सभी गोदाम रिहायसी क्षेत्र में स्थित हैं। गोदाम तक फायर ब्रिगेड के पहुंचने की क्या व्यस्था है। अवैध भण्डारण अथवा घनी आबादी के बीच गोदाम पाए जाते हैं तो उन्हें स्थानांतरित कराया जाएगा।
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