कोर्ट ने पाया कि मृतका पति के साथ अलग रहती थी, इसलिए जेठ-जेठानी को आश्रित नहीं माना जा सकता। हिंदू संयुक्त परिवार की अवधारणा के तहत केवल सास कमला बाई …और पढ़ें

HighLights
- षष्ठम अपर मोटर दावा अधिकरण का फैसला।
- बीमा कंपनी की लापवाही पर दी दलीलें खारिज।
- यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस पर तय की देनदारी।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में षष्ठम अपर मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने बाइक से गिरकर हुई मौत के मामले में मृतका की सास के पक्ष में फैसला सुनाया है।
इसके तहत वाहन बीमाकर्ता कंपनी यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को उनके परिवार को 18 लाख तीन हजार 720 रुपये क्लैम की राशि प्रदान करने का आदेश दिया गया है। हादसे के मामले में पुलिस ने मृतका के पति को आरोपित बनाया था।
अधिकरण की पीठासीन अधिकारी मनीषा ठाकुर की अदालत ने फैसला सुनाया है। इसमें बीमा कंपनी को 30 दिनों के भीतर ब्याज सहित पूरी राशि जमा करने का निर्देश दिया है।
घटना 16 दिसंबर 2023 को हुई थी। अंजनी ध्रुव निवासी ग्राम भिलाई, मस्तरी अपने पति चोलाराम ध्रुव के साथ मोटरसाइकिल से जयराम नगर स्थित अस्पताल जा रही थी।
भिलाई पुल के पास तेज और लापरवाही से वाहन चलाने के कारण वह बाइक से गिर गई और सिर व शरीर पर गंभीर चोट लगने से उसकी मौके पर मौत हो गई। पुलिस ने पति के खिलाफ अपराध दर्ज किया था।
मृतका की सास कमला बाई ने मृतका के जेठ-जेठानी व उनके बच्चों को आश्रित बताते हुए 93.72 लाख रुपये का दावा प्रस्तुत किया था।
बीमा कंपनी के लापरवाही के तर्क कोर्ट ने किया खारिज
सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने मृतका की लापरवाही और चालक के पास वैध लाइसेंस न होने का तर्क दिया, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। न्यायालय ने कहा कि कंपनी कोई ठोस साक्ष्य या प्रत्यक्षदर्शी पेश नहीं कर सकी। पुलिस रिकार्ड से यह भी साबित हुआ कि चालक के पास 2035 तक वैध लाइसेंस था।
आश्रितों का ऐसे हुआ निर्धारण
आय के दस्तावेज प्रस्तुत नहीं होने पर कोर्ट ने मृतका की मासिक आय न्यूनतम मजदूरी के आधार पर 10 हजार 100 रुपये मानी। 22 वर्ष की आयु के आधार पर 40 प्रतिशत भविष्यगत आय जोड़कर और 18 का गुणांक लगाकर आश्रितता हानि 15 लाख 27 हजार 120 रुपये तय की गई। अन्य मद जोड़कर कुल मुआवजा 18 लाख तीन 720 रुपये निर्धारित हुआ।
सास आश्रित, जेठ-जेठानी को प्रेम-स्नेह व संपदा हानि मद से भुगतान
कोर्ट ने पाया कि मृतका पति के साथ अलग रहती थी, इसलिए जेठ-जेठानी को आश्रित नहीं माना जा सकता। हिंदू संयुक्त परिवार की अवधारणा के तहत केवल सास कमला बाई को आश्रित माना गया। वहीं जेठ-जेठानी और उनके बच्चों को प्रेम-स्नेह व संपदा हानि मद में कुल 1.92 लाख रुपये नकद दिए जाएंगे। शेष राशि कमला बाई को मिलेगी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि 30 प्रतिशत राशि तीन वर्ष के लिए एफडी में रखी जाएगी, जबकि 70 प्रतिशत राशि सीधे खाते में ट्रांसफर होगी।
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