नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। हिर्री पुलिस ने कोयले की अफरा-तफरी और उच्च गुणवत्ता के कोयले में निम्न गुणवत्ता का कोयला मिलाकर सप्लाई करने के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए एक कोल डिपो संचालक को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपित को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया है।
ट्रांसपोर्टर आशीष केसरी ने हिर्री थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी कि वह कोल परिवहन और लिफ्टिंग का कार्य करता है। वर्तमान में एसईसीएल रामपुर खदान से उच्च गुणवत्ता का जी-6 ग्रेड कोयला ब्रज आयरन एंड स्टील लिमिटेड भेजने का कार्य किया जा रहा था। इसी क्रम में दो ट्रेलर में 5500 से 5800 जीसीव्ही क्षमता वाला कोयला लोड कर प्लांट भेजा गया था। प्लांट पहुंचने के बाद कंपनी के केमिस्ट ने कोयले का लैब परीक्षण कराया।
जांच रिपोर्ट में कोयले की गुणवत्ता 4203 और 4220 जीसीव्ही पाई गई। इससे स्पष्ट हुआ कि रास्ते में या डिपो में उच्च गुणवत्ता के कोयले में निम्न गुणवत्ता का कोयला मिलाया गया है। शिकायत के बाद हिर्री पुलिस ने बीएनएस की धारा 316(3), 317(2), 317(4), 3(5) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। एसएसपी रजनेश सिंह, एएसपी मधुलिका सिंह तथा सीएसपी चकरभाठा डीआर टंडन के निर्देशन में पुलिस टीम ने डिघोरा स्थित कोल डिपो और घटनास्थल का निरीक्षण किया।
पुलिस ने यार्ड में मौजूद संदिग्ध निम्न गुणवत्ता के कोयले का सैंपल लिया और दोनों ट्रेलरों को जब्त कर लिया। जांच के दौरान डिपो संचालक रामकुमार आर्य की भूमिका सामने आने पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपित चकरभाठा क्षेत्र का निवासी है और कोल डिपो संचालन करता था। पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि उच्च गुणवत्ता वाले महंगे कोयले में कम गुणवत्ता का सस्ता कोयला मिलाकर उद्योगों को सप्लाई किया जा रहा था, जिससे लाखों रुपये का अवैध लाभ अर्जित किया जा रहा था। मामले में पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस खेल में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा कितने समय से इस तरह की गड़बड़ी की जा रही थी।
लैब टेस्ट में खुला कोयला घोटाले का राज
ब्रज आयरन एंड स्टील लिमिटेड में जब एसईसीएल रामपुर खदान से भेजे गए कोयले की जांच की गई तो पूरा मामला सामने आया। कंपनी के केमिस्ट ने ट्रेलरों में पहुंचे कोयले का लैब परीक्षण किया। दस्तावेजों में कोयले की गुणवत्ता जी-6 श्रेणी यानी 5500 से 5800 जीसीव्ही दर्ज थी, लेकिन परीक्षण में कोयला मात्र 4203 और 4220 जीसीव्ही का निकला। इससे उद्योग प्रबंधन को संदेह हुआ कि रास्ते में कोयले की अदला-बदली या मिश्रण किया गया है। इसके बाद मामले की शिकायत हिर्री थाने में की गई। जांच में यह तथ्य सामने आया कि कोल डिपो में उच्च गुणवत्ता के कोयले में निम्न गुणवत्ता का कोयला मिलाकर ट्रकों के जरिए उद्योगों तक सप्लाई किया जा रहा था। इस गड़बड़ी से उद्योगों को आर्थिक नुकसान पहुंच रहा था, वहीं आरोपी अवैध मुनाफा कमा रहे थे।
पुलिस ने ट्रेलर और संदिग्ध कोयला किया जब्त
मामले की गंभीरता को देखते हुए हिर्री पुलिस तत्काल सक्रिय हुई। अधिकारियों के निर्देश पर पुलिस टीम ने डिघोरा स्थित घटनास्थल और कोल डिपो का निरीक्षण किया। मौके पर यार्ड में बड़ी मात्रा में निम्न गुणवत्ता का कोयला मिला। पुलिस ने जांच के लिए कोयले के सैंपल लिए और शेष कोयले को जब्त कर लिया। इसके अलावा ट्रेलर को भी कब्जे में लिया गया। पुलिस ने स्थल पंचनामा और नजरी नक्शा तैयार कर तकनीकी जांच शुरू की। जांच के दौरान डिपो संचालक रामकुमार आर्य की भूमिका संदिग्ध पाई गई। पूछताछ में पर्याप्त सबूत मिलने के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
कोयला कारोबार के बड़े नेटवर्क की जांच शुरू
हिर्री पुलिस की कार्रवाई के बाद अब पूरे कोयला कारोबार में सक्रिय नेटवर्क की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि उच्च गुणवत्ता वाले कोयले में निम्न गुणवत्ता का कोयला मिलाने का यह खेल कब से चल रहा था और इसमें कितने लोग शामिल हैं। संभावना जताई जा रही है कि उद्योगों को सप्लाई किए जाने वाले कोयले में लंबे समय से इस तरह की हेराफेरी की जा रही थी। जांच एजेंसियां अब परिवहन, डिपो संचालन और सप्लाई चेन से जुड़े लोगों की भूमिका खंगाल रही हैं। पुलिस को आशंका है कि इस अवैध कारोबार से लाखों रुपये का मुनाफा कमाया गया। अधिकारियों का कहना है कि मामले में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई के बाद कोयला कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप मचा हुआ है।
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