बिलासपुर की विशेष रेलवे मजिस्ट्रेट अदालत ने पर्सनल आईडी से अवैध रूप से ई-टिकट बनाकर बेचने वाले चांपा के ‘विनय च्वाइस सेंटर’ संचालक विनय कुमार केंट को …और पढ़ें

HighLights
- च्वाइस सेंटर पर आरपीएफ की रेड
- पर्सनल आईडी से ई-टिकट बेचने वाला दोषी
- आरोपित से इलेक्ट्रॉनिक सामान और नकदी जब्त
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। रेलवे टिकटों की कालाबाजारी और अवैध कारोबार पर लगाम कसते हुए बिलासपुर की विशेष रेलवे मजिस्ट्रेट अदालत ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। पर्सनल यूजर आईडी का गलत इस्तेमाल कर व्यावसायिक रूप से ई-टिकट बेचने वाले आरोपी विनय कुमार केंट को अदालत ने दोषी करार दिया है। विशेष रेलवे मजिस्ट्रेट शंकर कश्यप की अदालत ने आरोपी द्वारा जुर्म स्वीकार किए जाने के बाद उसे रेलवे अधिनियम की धारा 143 के तहत 5,000 रुपये के नकद अर्थदंड से दंडित किया है।
इस पूरे अवैध कारोबार का पर्दाफाश चांपा आरपीएफ (रेलवे सुरक्षा बल) की टीम ने किया था। 5 अक्टूबर 2021 को आरपीएफ ने मुखबिर की सटीक सूचना पर चांपा के झरनापारा स्थित ‘विनय च्वाइस सेंटर’ पर औचक दबिश दी थी। जांच के दौरान पता चला कि संचालक विनय कुमार केंट आईआरसीटीसी (IRCTC) की आधिकारिक एजेंट आईडी के बजाय अपनी व्यक्तिगत आईडियों— ‘विनय12345’ और ‘विनय280796’ का उपयोग कर रहा था। इन पर्सनल आईडी के जरिए उसने चालाकी से 32 आरक्षित ई-टिकटें तैयार की थीं, जिन्हें वह जरूरतमंद यात्रियों को ऊंचे दामों पर बेचकर अतिरिक्त रकम वसूल रहा था।
आरपीएफ ने मौके से 8,444.40 रुपये मूल्य की अवैध रेल टिकटें बरामद की थीं। इसके साथ ही टिकट बनाने में प्रयुक्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे लैपटॉप, मोबाइल फोन, प्रिंटर और टिकट बिक्री के 760 रुपये नगद भी जब्त किए गए थे। आरपीएफ चांपा ने आरोपी के खिलाफ रेलवे एक्ट के तहत मामला दर्ज कर चालान बिलासपुर रेलवे कोर्ट में पेश किया था। न्यायिक सुनवाई के दौरान पुख्ता इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के सामने आरोपी ने अपना गुनाह कबूल कर लिया। रेलवे सुरक्षा बल के अधिकारियों का कहना है कि पर्सनल आईडी का व्यावसायिक उपयोग करना कानूनन अपराध है और टिकट दलालों के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
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