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रायपुर कमिश्नरेट के सभी 21 थानों के मालखानों को एडवांस और डिजिटल बनाया जा रहा है। शुरुआत सिटी कोतवाली थाने से हुई है। जब्त किए गए हर सामान पर यूनिक बारकोड लगाया जा रहा। बारकोड स्कैन करते ही यह तुरंत पता चल सकेगा कि संबंधित सामान किस केस से जुड़ा है, उसे कब जब्त किया गया और मालखाने में वह किस स्थान पर रखा गया है। चेन ऑफ कस्टडी मजबूत होगी। खास बात ये है कि ये पूरा सिस्टम जिस सॉफ्टवेयर पर रन होगा उसे छत्तीसगढ़ कैडर के IPS अधिकारी रॉबिन्सन गुड़िया ने डेवलेप किया है। रॉबिन्सन अभी नारायणपुर एसपी हैं। भास्कर ने सिटी कोतवाली के मालखाने में पहुंचकर इस सॉफटवेयर के वर्किंग पैटर्न, फायदे और महत्व को समझा। पढ़िए ये रिपोर्ट… पहले देखिए ये तस्वीरें- सबसे पहले मालखानों की अहमियत समझिए मालखाना किसी भी आपराधिक मामले में सबूतों की सुरक्षा और विश्वसनीयता से सीधे जुड़ा होता है। अपराध से जुड़े जब्त सामान, हथियार, नकदी, ड्रग्स, दस्तावेज सबकुछ यहां सुरक्षित रखे जाते हैं। इन्हीं जब्त माल को बाद में कोर्ट में सबूत के तौर पर पेश किया जाता है। यानी यहां रखे हर सामान से केस का सीधा कनेक्शन होता है। इनमें छेड़छाड़ यानी केस सीधा प्रभावित। लेकिन दिक्कत यह है कि भारत के थानों में जगह की कमी है। मालखानों में इतने सबूत या माल जमा हो गए हैं कि इन्हें संभालना मुश्किल है। ये बात मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर ने भी अपनी रिपोर्ट में मानी है। और मालखाने में रखा कोई भी जब्त सामान तब तक डिस्पोज, नष्ट, नीलाम या वापस नहीं किया जा सकता, जब तक उससे जुड़े केस में कानूनी प्रक्रिया पूरी न हो जाए या अदालत से अनुमति न मिल जाए। बार कोड से काम हो जाएगा आसान इस प्रोजेक्ट को लीड कर रहे रायपुर के एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस अमित तुकारात काम्बले ने बताया कि मालखाने में रखी केस प्रॉपर्टी के मैनेजमेंट के लिए ई-मालखाना सिस्टम काफी मददगार साबित होगा। पहले किसी केस से जुड़े सामान को कोर्ट में पेश करने के लिए उसे ढूंढने में काफी समय लगता था, लेकिन अब डिजिटल सिस्टम की मदद से संबंधित प्रॉपर्टी को तुरंत ट्रेस कर सही तरीके से प्रस्तुत किया जा सकेगा। फिलहाल, एक थाने में इसकी शुरुआत की गई है और आगे इसे आगे रायपुर के कमिश्नरेट के सभी 21 थानों में भी लागू करने की तैयारी चल रही है। ‘चेन ऑफ कस्टडी’ का पूरा रिकॉर्ड रहेगा सुरक्षित ई-मालखाना सिस्टम में हर जब्त सामान का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेगा। इसी पूरे प्रोसेस को ही चेन ऑफ कस्टडी कहा जाता है, जो किसी भी केस में सबूत की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। हर जब्त सामान को मिलेगा यूनिक बारकोड सेंट्रल जोन के एडिशनल डीसीपी तारकेश्वर पटेल ने बताया कि ई-मालखाना सिस्टम में हर जब्त सामान को अलग यूनिक नंबर और बारकोड दिया गया है। बारकोड स्कैन करते ही यह जानकारी तुरंत सामने आ जाती है। जैसे सामान किस अपराध से जुड़ा है, कब जब्त किया गया, वर्तमान में कहां रखा गया है, उसकी कानूनी स्थिति क्या है। तीन जगहों पर टैग किए जा रहे बारकोड भास्कर की टीम ने देखा कि बारकोड तीन अलग-अलग जगहों पर लगाए जा रहे हैं। पहला जब्त माल पर, जब्ती पत्रक और मालखाना रजिस्टर में। मकसद यह है कि जब्त सामान से जुड़ी हर जानकारी आपस में डिजिटल तरीके से लिंक रहे और किसी भी स्तर पर गड़बड़ी या भ्रम की स्थिति न बने। 1. जब्त माल पर बारकोड यह सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। बारकोड सीधे उस सामान पर लगाया जाएगा जो पुलिस ने जब्त किया है। इसका फायदा ये है कि सामान की तुरंत पहचान हो जाएगी। स्कैन करते ही केस नंबर, जब्ती तारीख और वर्तमान लोकेशन दिख जाएगी। एक जैसे सामान में भ्रम नहीं होगा। कोर्ट में पेश करने या वापस करने में आसानी होगी। उदाहरण के तौर पर अगर 20 मोबाइल जब्त हुए हैं, तो हर मोबाइल का अलग बारकोड होगा। 2. जब्ती पत्रक पर बारकोड जब्ती पत्रक वह कानूनी दस्तावेज होता है, जिसमें लिखा रहता है कि कौन सा सामान कब और कहां से जब्त किया गया। इसमें बारकोड लगाने का फायदा ये है कि दस्तावेज और असली सामान आपस में लिंक हो जाएंगे। स्कैन करते ही संबंधित जब्त माल की जानकारी खुल जाएगी। कोर्ट या जांच के दौरान रिकॉर्ड मिलान तेजी से होगा। फर्जी बदलाव या रिकॉर्ड गड़बड़ी की संभावना घटेगी। यानी अगर अधिकारी जब्ती पत्रक स्कैन करे, तो उसे सीधे उसी सामान का डिजिटल रिकॉर्ड मिल जाएगा। 3. मालखाना रजिस्टर में बारकोड मालखाना रजिस्टर वह रिकॉर्ड होता है, जिसमें जमा और निकासी की एंट्री होती है। इसमें बारकोड लगाने का फायदा रजिस्टर और डिजिटल सिस्टम का सिंक्रोनाइजेशन रहेगा। कौन सा सामान कब जमा हुआ और कब निकला, यह तुरंत ट्रैक होगा ऑडिट और निरीक्षण आसान होगा ‘चेन ऑफ कस्टडी’ मजबूत होगी। यानी रजिस्टर स्कैन करते ही पता चल जाएगा कि संबंधित सामान अभी मालखाने में है, कोर्ट गया है या जांच एजेंसी के पास है। सबूत खोजने में मुश्किल हुई तो डेवलेप किया सॉफ्टवेयर इस सॉफ्टवेयर को डेवलेप करने वाले IPS अधिकारी रॉबिन्सन गुड़िया ने भास्कर को बताया कि ट्रेनिंग के दौरान उन्हें कुछ वक्त के लिए लखनपुर थाने का प्रभारी बनाया गया था। इसी दौरान कोर्ट में साक्ष्य के तौर पर एक चाकू प्रेजेंट करना था। लेकिन मालखाने की हालत इतनी बिगड़ी हुई थी कि चाकू खोजने में बहुत वक्त लग गया। इसके बाद ही उन्हें ये सॉफ्टवेयर बनाने का ख्याल आया। साल 2021 में उन्होंने सॉफ्टवेयर पर काम शुरू किया। एक महीने में बीटा वर्जन तैयार कर लिया। दरअसल, रॉबिन्सन IIT कानपुर से बीटेक हैं। ऐसे में उन्हें सॉफ्टवेयर डेवलेप करने में बहुत कठिनाई नहीं हुए। वो इस सॉफ्टवेयर में लगातार अपडेट भी कर रहे हैं। नारायणपुर बनेगा राज्य का पहला डिजिटल मालखाना जिला रॉबिन्सन ने बताया कि अभी अलग-अलग थानों में मालखानों की व्यवस्था अलग तरीके से संचालित होती है, लेकिन अब लक्ष्य नारायणपुर जिले के सभी थानों में एकसमान डिजिटल सिस्टम लागू करना है। नारायणपुर ऐसा पहला जिला बनेगा, जहां सभी थानों में बारकोड आधारित मालखाना मैनेजमेंट सिस्टम काम करेगा। हर राज्य की पुलिस को मुफ्त दे रहे सॉफ्टवेयर रॉबिन्सन यह सॉफ्टवेयर फिलहाल पुलिस विभाग को पूरी तरह मुफ्त दे रहे हैं। उनका यह सॉफ्टवेयर छत्तीसगढ़ के अलावा बिहार और पंजाब पुलिस के कुछ थानों में उपयोग हो रहा है। 21 थानों के कर्मचारियों के हर महीने 200 घंटे बचेंगे सिटी कोतवाली थाना के प्राभारी सतीश सिंह कहते हैं कि वो बेहद खुश है कि शुरूआत उनके थाने से हुई। पूरा सॉफ्टवेयर उन्होंने खुद परखा है। इससे बहुत समय बचेगा। उन्होंने बताया केस की संख्या के हिसाब से एविडेंस खोजने की जरूरत पड़ती है। किसी महीने में ये संख्या होती है तो किसी महीने में ज्यादा। लेकिन हर महीने में औसतन 10 बार तो ऐसा होता ही है उन्हें जब्त सामान खोजने की जरूरत पड़ ही जाती है। एक बार खोजने जुटे तो घंटे भर का वक्त जाता ही है। SHO सतीश सिंह के बताए आंकड़ों पर ही बात करें तो एक थाने में महीनेभर में औसतन 10 बार केस प्रॉपर्टी या एविडेंस को कोर्ट के आदेश पर मालखाने से निकालना या वापस जमा करना पड़ता है। मैनुअल सिस्टम में हर बार रिकॉर्ड ढूंढने, रजिस्टर मिलाने और सामान खोजने में औसतन 1 घंटा लग जाता है। बारकोड आधारित डिजिटल सिस्टम में यही काम करीब 5 मिनट में हो रहा है। यानी एक बार में 55 मिनट बच रहे हैं। इस तरह से देखा जाए तो रायपुर कमिश्नरेट के एक 1 थाने का हर महीने 9 घंटे ज्यादा वक्त इसी में निकल रहा। और महीने भर में यही समय 200 घंटे के आसपास जा रहा है। ये समय सीधे-सीधे बचेगा। …………………. इनोवेशन से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… रायपुर के टेक एक्सपर्ट ने बनाया छत्तीसगढ़ का पहला AI-प्लेटफॉर्म: 8k रेजोल्यूशन की इमेज तैयार कर रहा, ChatGPT-जैमिनी से बेहतर होने का दावा छत्तीसगढ़ के टेक एक्सपर्ट गौरव तिवारी ने “जेमिनाई GT” नाम का एक AI (Artificial Intelligence) प्लेटफॉर्म तैयार करने का दावा किया है। उनका कहना है कि यह प्लेटफॉर्म कई मामलों में ओपन AI के चैट GPT और गूगल के जेमिनाई जैसे बड़े AI टूल्स से बेहतर काम करेगा।
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