![]()
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिला में बिजली विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारी को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर ठगबाजों ने 37 लाख की ठगी की। फर्जी IPS और CBI अफसर बनकर गिरोह ने घटना को अंजाम दिया। घटना के बाद मामले की सूचना पर पुलिस ने राजस्थान से महिला समेत 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। मामला कोतवाली थाना क्षेत्र का है। मिली जानकारी के मुताबिक केसर परिसर में रहने वाला नरेन्द्र ठाकुर 66 साल छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत परेषण कंपनी से परिवेक्षक के पद पर पदस्थ थे और जनवरी 2022 में सेवानिवृत्त हुए हैं। उन्होंने 17 फरवरी 2026 को साइबर थाना में लिखित आवेदन देते हुए शिकायत दर्ज कराई कि उसके साथ 36 लाख 97 हजार 117 रुपये की ठगी की गई है। जिसके बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अपराध कायम कर जांच शुरू की। इस दौरान पीड़ित ने बताया कि 14 जनवरी 2026 को उसके मोबाइल पर एक अज्ञात महिला का कॉल आया। जिसने स्वयं को टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया से संबंधित बताते हुए कहा कि उसके पहचान पत्र का उपयोग कर जियो कंपनी का मोबाइल नंबर लेकर गलत गतिविधियां की जा रही है। इसके बाद कॉल को फर्जी टेलीकॉम अधिकारी और दिल्ली के बारह खंभा रोड पुलिस स्टेशन के फर्जी अधिकारी से कनेक्ट कराया गया। जिन्होंने पीड़ित को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने और गिरफ्तारी की धमकी दी। इसके बाद एक अन्य व्यक्ति ने वीडियो कॉल कर स्वयं को IPS अधिकारी नीरज ठाकुर बताया और पीड़ित को डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाते हुए कहा कि उसके खिलाफ गंभीर अपराध दर्ज है। उसे जांच में सहयोग करना होगा।
अलग-अलग खातों में रुपये ट्रांसफर कराए
ठगों ने पीड़ित से उसके बैंक खाते, संपत्ति और अन्य वित्तीय जानकारी ली और यह कहकर अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करवाई कि जांच पूरी होने के बाद राशि वापस कर दी जाएगी। ठगों की धमकी और दबाव में आकर पीड़ित ने 30 जनवरी से 11 फरवरी 2026 के बीच कुल 36,97,117 रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए। बाद में परिजनों को जानकारी होने पर उन्हें ठगी का अहसास हुआ। ऐसे में जांच में साइबर थाना द्वारा तत्काल पीड़ित के लगभग 2 लाख रुपये होल्ड कराया गया।
पुलिस को जांच करने पर मिली जानकारी
इसके बाद पीड़ित के रिपोर्ट पर रायगढ़ साइबर थाने द्वारा बैंक खातों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच की गई। जिसमें पीड़ित द्वारा आरोपियों को भेजे गए 4.50 लाख रूपये भीलवाड़ा राजस्थान के बैंकों में जमा होने की जानकारी मिली। बैंक डिटेल और तकनीकी साक्ष्य जुटा कर आरोपियों का पता लगाया गया।
पुलिस टीम राजस्थान पहुंची
जिसमें बड़ी जानकारी मिलने पर SSP शशि मोहन सिंह के मार्गदर्शन पर थाना प्रभारी साइबर विजय चेलक के नेतृत्व में विशेष टीम गठित कर भीलवाड़ा राजस्थान रवाना किया गया। जहां साइबर थाना की पुलिस टीम आरोपियों का पता तालाश की। ऐसे में बंधन बैंक भीलवाड़ा के एम्पलाई राहुल व्यास की संलिप्तता अपराध में पाई गई। तब उसे तत्काल हिरासत में लेकर पूछताछ किया गया, जिससे पूरे गैंग का खुलासा हुआ।
अलग-अलग जगहों से आरोपियों को पकड़ा
पुलिस ने राहुल व्यास से पूछताछ कर उसके गिरोह के आरोपी रविराज सिंह उसकी पत्नी आरती राजपूत आरोपी संजय मीणा और गौरव व्यास को राजस्थान के अलग-अलग स्थानों पर दबिश देकर हिरासत में लेकर ट्रांजिट रिमांड पर रायगढ़ लाया गया है। राहुल व्यास वर्तमान में बंधन बैंक, भीलवाड़ा राजस्थान का कर्मचारी है उसने बताया कि 2007 से मनिकेलाल वर्मा शासकीय महाविद्यालय भीलवाड़ा में पढ़ाई के दौरान आरती राजपूत से जान-पहचान थी। आरती राजपूत क्वालिटी एनालिस्ट व ऑनलाईन वेबसाईट बनाने का काम करती थी, उसके पति रविराज सिंह चव्हाण है।
संदिग्ध रुपये आने पर ठगो से जुड़ गए
करीब 3 साल पहले एक अन्य नंबर से उसके, आरती और रविराज के खाते में संदिग्ध रूप से रुपये आने लगे। तब इन लोगों ने साइबर ठगों से संपर्क किया। जब इनके खातों में मोटी रकम आने लगी तो ये पैसे नहीं लौटाकर खुद साइबर ठगी करने और रुपये कमाने का प्लान बनाकर साइबर ठगों से जुड़ गये। अपना खाता साइबर ठगी के लिए उपलब्ध कराये। इन्होंने विभिन्न वेबसाईटों गूगल के माध्यम से विडियो देखकर साइबर ठगी सीखना बताये।
ठगी में अपना खाता इस्तेमाल किया
इस दौरान उन्होंने रायगढ़ के एक व्यक्ति (पीड़ित नरेन्द्र ठाकुर) से 36.97 लाख की साइबर ठगी में इनका खाता इस्तेमाल होना स्वीकार किया है। आरोपी राहुल ने उसके एचडीएफसी बैंक एकाउंट और बैंक आफ बड़ौदा के बैंक अकाउंट में कुल 4 लाख 50 हजार रुपये आने की बात स्वीकारी और जिसके दो लाख पचास हजार रुपये संजय मीणा को आरती राजपूत के कहने पर दिया था।
जांच में आरोपियों के खाते में संदिग्ध रकम मिले
जांच करने पर आरोपियों के मोबाईल के व्हाटसअप में विभिन्न कॉल रिकार्डिंग और व्हाटसअप चैटिंग कर घटना को अंजाम देने की बाते चैटिंग पर मिली है। जांच में आरोपी गौरव व्यास के बैंक खाते में 60 लाख ठगी के पाया गया। वहीं अन्य आरोपियों के खाते में भी संदिग्ध रकम मिली है।
देश भर में 1 करोड़ से अधिक की ठगी की
पुलिस ने इन सभी आरोपियों के बैंक खाता को सीज कराया है। आरोपियों के कब्जे से 7 मोबाइल, 1 लैपटॉप जब्त किया गया है। जांच में इस बात की भी जानकारी हुई कि इस गैंग ने पूरे देश में करीब 1 करोड़ 40 लाख 77 हजार 300 की ठगी की है। प्रकरण में और भी आरोपियों की संलिप्तता के सबूत मिले हैं, जिनकी जांच की जा रही है। पुलिस द्वारा सभी आरोपियो को गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
किसी को OTP और बैंक डिटेल न दे
SSP शशि मोहन सिंह ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट, फर्जी सीबीआई, पुलिस या टेलीकॉम अधिकारी बनकर आने वाले कॉल पूरी तरह साइबर ठगी हो सकते हैं। कोई भी जांच एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर पैसे ट्रांसफर नहीं कराती। ऐसे कॉल आने पर घबराएं नहीं, किसी को ओटीपी, बैंक डिटेल या रकम ट्रांसफर न करें और तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी साइबर थाने में शिकायत करें।
गिरफ्तार आरोपी
1. राहुल व्यास पिता मकेश कुमार व्यास सदर बाजार गणेश मंदिर के पास नहरी रायपुर, भीलवाडा राजस्थान 2. रविराज सिंह पिता राजू सिंह, 27 साल निवासी सिरोदनिया थाना देवगढ़ जिला राजसमन राजस्थान, शारदा 2 ड्रीम सिटी-सी-127, थाना गंगरोप, जिला भीलवाड़ा राजस्थान 3. संजय मीणा पिता खेमराज मीणा 27 साल निवासी 10 एस-11 पटेल नगर थाना प्रतापनगर, जिला भीलवाड़ा राजस्थान 4. आरती राजपूत पति रविराज चव्हाण 26 साल, निवासी, सिरोदनिया थाना देवगढ़ जिला राजसमन राजस्थान, शारदा ड्रीम सिटी-सी-127, थाना गंगरोप, जिला भीलवाड़ा राजस्थान 5. गौरव व्यास पिता ब्रम्हानंद व्यास 24 साल, निवासी 351/10, आई-सेक्टर, आजाद नगर थाना प्रतापनंगर जिला भीलवाड़ा राजस्थान
<
