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छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिला के कचकोबा ग्राम पंचायत में रहने वाले बिरहोर जनजाति के बच्चों की शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए जेपीएल द्वारा प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में अब बिरहोर बच्चे अंग्रेजी माध्यम स्कूल में अपनी पढ़ाई कर रहे हैं। जहां उन्हें पढ़ाई से लेकर परिवहन व अन्य सुविधाएं निशुल्क मिल रही है। इन बच्चों की पढ़ाई की सभी व्यवस्था जिंदल फाउंडेशन द्वारा की जाती है। ग्राम पंचायत कचकोबा का सीतापारा मोहल्ला में राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र बिरहोर जनजाति के लोग रहते हैं। इस मोहल्ले में 33 परिवार हैं और इनकी आबादी 106 है। पहले यहां के लोग जंगल जाते थे, जंगल से तेंदू, चार, महुआ, चिरौंजी इनके आजीविका का साधन हुआ करते थे। यहां के बच्चे पढ़ाई पर ध्यान नहीं देते थे। साल 2006 में जिंदल पावर तमनार द्वारा यहां के लोगों का जीवन स्तर सुधारने और इनको शिक्षित करने के लिए बालवाड़ी की शुरूआत की गई। यहां प्रारंभिक शिक्षा मिलने के बाद बच्चों को आसपास के सरकारी स्कूलों में भर्ती किया जाता था। चूंकि उनके पालक आजीविका के लिए जंगल जाते थे, इसलिए वे शिक्षा का महत्व नहीं दे पा रहे थे। जिसके कारण बच्चे बीच में ही प्राइमरी की पढ़ाई छोड़ देते थे। इनकी समस्या को देखते हुए जेपीएल द्वारा यह निर्णय लिया गया कि इस विशेष पिछड़ी जनजाति के बच्चों को प्रारंभ से ही अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा दी जाए ताकि वे शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ सकें। इसके बाद उन बच्चों को नर्सरी से ही जिंदल के स्कूलों में भर्ती किया जाने लगा।
बच्चों की स्कूल, परिवहन की व्यवस्था फ्री
सीतापारा के बिरहोर जनजाति के बच्चों के लिए बालवाड़ी सेंटर बनाया गया है, जहां खेलकूद की भी व्यवस्था की गई है वहां प्रारंभिक शिक्षा दी जाती है, फिर नर्सरी में उन विद्यार्थियों को भर्ती किया जाता है। इस सेंटर को कोऑर्डिनेट करने वाले आनंद पंडा ने बताया कि बच्चों के जूता, मोजा, ब्लेजर, यूनिफार्म से लेकर सभी कॉपी, पेन, पुस्तक तक की व्यवस्था जिंदल फाउंडेशन द्वारा किया जाता है। इन विद्यार्थियों को ओपी जिंदल स्कूल कुंजेमुरा में फ्री में पढ़ाई कराई जाती है। इन विद्यार्थियों के आने जाने के लिए बस की भी सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
महिलाओं को भी पढ़ा रहे
शादी के बाद भी पढ़ने की इच्छुक महिलाओं को भी आगे बढ़ने के लिए पढ़ाने का काम जिंदल फाउंडेशन द्वारा किया जा रहा है। गांव की हीरमति बिरहोर ने बताया कि उसकी शादी हो चुकी है, उसे आगे पढ़ने की इच्छा हुई तो जिंदल फाउंडेशन द्वारा पत्राचार के माध्यम से उसकी व्यवस्था की गई।
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