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पूर्व मंत्री मोहन मरकाम ने भाजपा पर महिला आरक्षण बिल को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा यह गलत प्रचार कर रही है कि कांग्रेस और विपक्षी दलों ने बिल का समर्थन नहीं किया, जिससे यह पारित नहीं हो सका। मोहन मरकाम ने स्पष्ट किया कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023’ (106वां संविधान संशोधन) संसद के दोनों सदनों से पारित हो चुका है और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हस्ताक्षर के बाद यह कानून बन गया है। मरकाम के अनुसार भाजपा ने 16 अप्रैल 2026 को संसद में जो 131वां संविधान संशोधन विधेयक प्रस्तुत किया था, वह महिला आरक्षण के संदर्भ में नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा महिला आरक्षण को एक मुखौटा बनाकर परिसीमन संशोधन बिल और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन बिल पास कराना चाहती थी। 131वें संविधान संशोधन विधेयक के प्रस्ताव सरकार की ओर से लोकसभा में प्रस्तुत इस 131वें संविधान संशोधन विधेयक में कई प्रस्ताव थे। इसमें लोकसभा की सीटें 850, राज्यों में 815 और केंद्र शासित प्रदेशों में 35 करने का प्रस्ताव शामिल था। परिसीमन के लिए 2011 की जनगणना का आधार विधेयक में परिसीमन के लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाने की बात कही गई थी। साथ ही, पुडुचेरी, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के कानूनों में संशोधन का भी प्रस्ताव था, ताकि परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक को लागू किया जा सके। विधेयक गिरने पर कांग्रेस का दावा मरकाम ने बताया कि यह विधेयक इसलिए गिर गया, क्योंकि भाजपा सरकार के परिसीमन बिल पर देश के अन्य राज्यों को आपत्ति थी। उनका दावा था कि भाजपा आरक्षण को सामने रखकर परिसीमन बिल पास करना चाहती थी। नई जनगणना और परिसीमन पर सवाल उन्होंने कहा कि जब 2026-27 की जनगणना शुरू हो चुकी है और सरकार जाति जनगणना की भी बात कर चुकी है, तो फिर 2011 की जनगणना को आधार मानकर परिसीमन क्यों कराया जा रहा है? उन्होंने पूछा कि नए आंकड़ों के आधार पर परिसीमन क्यों नहीं किया जा रहा है। मोहन मरकाम ने यह भी सवाल उठाया कि यदि महिला आरक्षण बिल को तुरंत लागू करना है, तो सरकार परिसीमन का इंतजार किए बिना वर्तमान सदस्य संख्या में ही 33 प्रतिशत का आरक्षण क्यों नहीं देना चाहती।
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