मूक-बधिर से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल की कैद:जशपुर में पॉक्सो अदालत का फैसला, दूसरे केस में दोषी को 7 साल की जेल

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जशपुर जिले में महिलाओं और नाबालिगों से जुड़े दो गंभीर मामलों में अदालतों ने दोषियों को कड़ी सजा सुनाई है। पॉक्सो कोर्ट ने नाबालिग मूक-बधिर बालिका से दुष्कर्म के मामले में एक आरोपी को 20 वर्ष के कठोर कारावास, जबकि विशेष एससी/एसटी अदालत ने शादी का झांसा देकर शोषण करने के मामले में दूसरे आरोपी को 7 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। पहला मामला फरसाबहार थाना क्षेत्र का है। 14 सितंबर 2024 को गजाधर पैंकरा (62) ने 13 वर्षीय मूक-बधिर बालिका को बहला-फुसलाकर सुनसान स्थान पर ले जाकर दुष्कर्म किया था। परिजनों ने बालिका के व्यवहार में बदलाव देखने के बाद सांकेतिक भाषा के जरिए घटना की जानकारी ली और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। मूक-बधिर बालिका से दुष्कर्म, 20 साल की सजा फरसाबहार पुलिस ने मेडिकल और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाकर समय पर चालान पेश किया। विशेष पॉक्सो न्यायालय कुनकुरी ने आरोपी को BNS की धारा 64(2)(ट) और पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी ठहराते हुए 20 साल के कठोर कारावास, 1,000 रुपये जुर्माना और पीड़िता को शासन की योजना के तहत मुआवजा देने का आदेश दिया। शादी का झांसा देकर शोषण, 7 साल की जेल दूसरा मामला कुनकुरी थाना क्षेत्र का है। मध्य प्रदेश के सतना निवासी मनोज कुमार पाण्डेय (44) ने खुद को अविवाहित बताकर साथ काम करने वाली युवती से प्रेम संबंध बनाए और शादी का झूठा वादा कर उसका शारीरिक शोषण किया। इस दौरान पीड़िता ने एक बच्चे को भी जन्म दिया। बाद में पीड़िता को पता चला कि आरोपी पहले से शादीशुदा है और उसके बच्चे भी हैं। शिकायत पर पुलिस ने BNS की धारा 69 और एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। विशेष एससी/एसटी न्यायालय जशपुर ने गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराते हुए 7 वर्ष के सश्रम कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई। SSP बोले- अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह ने कहा कि महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगों के खिलाफ अपराधों पर जशपुर पुलिस जीरो टॉलरेंस नीति के तहत काम कर रही है। ऐसे मामलों में त्वरित जांच, मजबूत साक्ष्य और प्रभावी पैरवी के जरिए दोषियों को कड़ी सजा दिलाना पुलिस की प्राथमिकता है।
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