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गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत चल रहे कार्यों में गंभीर अनियमितता सामने आई है। जिला पंचायत और कलेक्टर कार्यालय से कुछ ही दूरी पर गौरेला क्षेत्र की ग्राम पंचायत सेमरा में तालाब निर्माण कार्य में मजदूरों के बजाय भारी मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। मौके से मिले वीडियो और तस्वीरों में स्पष्ट देखा जा सकता है कि जिस कार्य के लिए ग्रामीण गरीबों को रोजगार मिलना चाहिए था, उसे जेसीबी और ट्रैक्टर जैसी मशीनों से तेजी से पूरा किया जा रहा है। इस कार्रवाई से न केवल मजदूरों के रोजगार पर असर पड़ रहा है, बल्कि मनरेगा के नियमों का भी खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। सरपंच ने दी सफाई यह कार्य पंचायत में सरपंच तूफान सिंह और सचिव किसन राठौर की देखरेख में कराया जा रहा है। सरपंच और सचिव ने अपनी सफाई में कहा कि जेसीबी का उपयोग केवल कचरा हटाने और ट्रैक्टर से उसे बाहर डंप करने के लिए किया गया था। हालांकि, यह दलील मनरेगा के दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं मानी जा रही है। मनरेगा में सीबी जैसी भारी मशीनों का उपयोग प्रतिबंधित मनरेगा योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में अकुशल श्रम के माध्यम से 100 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराना है। नियमों के अनुसार, मिट्टी खुदाई, ढुलाई या ऐसे अन्य कार्यों में जेसीबी जैसी भारी मशीनों का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है। केवल कुछ सीमित परिस्थितियों में ही कंक्रीट मिक्सर जैसी मशीनों के उपयोग की अनुमति है। प्रशासन और निगरानी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल दिनदहाड़े मशीनों से हो रहे इस कार्य ने स्थानीय प्रशासन और निगरानी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला पंचायत कार्यालय के पास ही नियमों का यह उल्लंघन जिला पंचायत सीईओ और मनरेगा एपीओ सहित अन्य अधिकारियों की भूमिका पर भी प्रश्नचिन्ह लगाता है। अब देखना होगा कि इस मामले के उजागर होने के बाद उच्च अधिकारी क्या कार्रवाई करते हैं।
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