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छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। समुदाय के लोग आज कलेक्ट्रेट पहुंचे और अपनी शिकायत दर्ज कराई। नांगा बैगा जनशक्ति संगठन और बैगा समाज के पदाधिकारी बड़ी संख्या में जिला कार्यालय में एकत्रित हुए। समाज का आरोप है कि अन्य जातियों के लोग फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करके ‘बैगा’ जनजाति का प्रमाण पत्र बनवा रहे हैं और सरकारी नौकरियों का अनुचित लाभ उठा रहे हैं। आरोप है कि बिलासपुर के ग्राम पोड़ी, सीपत और मस्तूरी क्षेत्र के लगभग 55 व्यक्तियों ने फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से बैगा जाति का प्रमाण पत्र हासिल किया है। ग्रामीणों का कहना है कि इन व्यक्तियों का न तो स्थानीय बैगा गांवों से कोई सामाजिक संबंध है और न ही इनके पूर्वज कभी इस क्षेत्र में निवास करते थे। ग्रामीणों ने बताया कि ये फर्जी प्रमाण पत्र पहले बिलासपुर और अब गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले से जारी किए गए हैं। इस संबंध में पूर्व में भी सूची सहित शिकायतें की गई थीं, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। बैगा समाज ने चेतावनी दी है कि यदि उनके संवैधानिक अधिकारों के साथ हो रहे इस खिलवाड़ को नहीं रोका गया, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। समुदाय ने प्रशासन से इन 55 संदिग्ध नामों की तत्काल जांच शुरू करने की मांग की है।
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