भास्कर न्यूज | बालोद चार हजार से ज्यादा पेड़ों की कटाई के एवज में पौधरोपण करने वन विभाग को अब तक राजस्व विभाग 20 एकड़ जमीन उपलब्ध नहीं करवा पाया है। लिहाजा 40 करोड़ रुपए से प्रस्तावित तरौद-दैहान बाइपास प्रोजेक्ट अटका हुआ है। जिला मुख्यालय में यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के उद्देश्य से तरौद से दैहान तक 7.80 किमी लंबी व 10 मीटर चौड़ा बाइपास मार्ग बनना प्रस्तावित है। इस प्रोजेक्ट को शासन स्तर से 2012 में मंजूरी मिली थी। जिसके बाद 2016 में 40 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति मिल चुकी है लेकिन 9 साल बाद भी काम शुरु नहीं हो पाया है। आलम यह है कि काम शुरू करवाना तो दूर, नींव तक नहीं रख पाए हैं। वजह यह है कि प्रोजेक्ट के दायरे में वन विभाग की लगभग 6 हेक्टेयर जमीन आ रही है। जमीन का अधिग्रहण करने के पहले पेड़ों की कटाई करवानी होगी। जिसके लिए पौधरोपण किया जाएगा। एक पेड़ की कटाई होगी, इसके एवज में 10 पौधे लगाए जाएंगे। जिसके लिए अब तक वन विभाग को पीडब्ल्यूडी व राजस्व विभाग जमीन उपलब्ध नहीं करवा पाए हैं। लिहाजा वन विभाग से एनओसी नहीं मिल पाई है। केंद्र सरकार(पर्यावरण बोर्ड) से अनुमति मिलने के बाद ही वन विभाग एनओसी दे पाएगा। पौधे लगाने की गारंटी के साथ 44 बिंदुओं पर जानकारी मांगी पीडब्ल्यूडी के प्रस्ताव पर वन विभाग ने पेड़ों की कटाई करने प्रस्ताव बनाकर भेजा है। इसके एवज में केंद्र सरकार ने प्रति पेड़ के कटाई के एवज में 10 गुना पौधे लगाने की गारंटी के साथ 44 बिंदु पर संबंधित विभाग को जानकारी मांगी है। भाजपा की सत्ता में बालोद शहर सहित 10 गांवों के लिए महत्वपूर्ण बाइपास बनाने की प्लानिंग बनी थी। जिस पर 2012 में मुहर लगी और 2016 में राशि स्वीकृत भी हुई, तब से अब तक काम शुरु होने का इंतजार शहरवासी सहित गांव के लोग कर रहे है। पीडब्ल्यूडी- शासन ने इस विभाग को काम पूरा कराने की जिम्मेदारी दी है। पीडब्ल्यूडी की ईई पूर्णिमा का कहना है कि हमने फाइल और रिपोर्ट बनाकर फॉरेस्ट में सबमिट कर दिया है। फॉरेस्ट से परमिशन मिलेगी, तभी तकनीकी स्वीकृति की कार्रवाई की जाएगी। राजस्व विभाग- शासन ने इस विभाग को जमीन अधिग्रहण, पीडब्ल्यूडी की मांग अनुरूप वन विभाग को जमीन उपलब्ध कराने, भूअर्जन प्रक्रिया पूरी करने की जिम्मेदारी दी है। एसडीएम नूतन कंवर, तहसीलदार आशुतोष शर्मा ने बताया कि उपयुक्त जमीन की तलाश कर रहे हैं। वन विभाग- इस विभाग से पीडब्ल्यूडी को एनओसी मिलेगी, तभी काम शुरु हो पाएगा। एसडीओ केएल साहू का कहना है कि केंद्र सरकार से अनुमति मिलने का इंतजार कर रहे हैं। इसके लिए विभागीय प्रक्रिया चल रही है। समझें, यह प्रोजेक्ट इसलिए महत्वपूर्ण पीडब्ल्यूडी की डीपीआर(डिटेल्स प्रोजेक्ट रिपोर्ट) के अनुसार नेशनल हाइवे 930 तरौद-दैहान बाइपास से जुड़ेगा। आवागमन की दृष्टि से महत्वपूर्ण दोनों प्रोजेक्ट एक-दूसरे के पूरक हैं। काम पूरा होने के बाद ही आवागमन की दृष्टिकोण से लोगों को फायदा मिलेगा। अभी सड़क कहीं कच्ची तो कहीं पक्की है। बाइपास बनने से बालोद शहर के मुख्य मार्गों में यातायात का दबाव कम होगा, क्योंकि रूट बदलने से राजनांदगांव मार्ग में चलने वाले भारी वाहनों की आवाजाही बाइपास यानी दूसरे मार्ग से होगी। वर्तमान में मिनट टू मिनट मुख्य मार्ग में मालवाहक वाहनों की आवाजाही हो रही है। वनभूमि पर केंद्र की अनुमति व वन विभाग की एनओसी जरुरी वन विभाग के जंगल की जमीन पर सरकारी योजना के क्रियान्वयन के लिए एनओसी लेना अनिवार्य है। जंगल के बजाय अगर प्रोजेक्ट के तहत दूसरे स्थान पर काम होता तो सिर्फ राज्य शासन से अनुमति लेनी पड़ती। केंद्र की अनुमति के बाद ही वन विभाग से एनओसी मिलेगी। इसके बिना काम शुरु नहीं कराया जा सकता। जब तक एनओसी नहीं मिलेगी, तब तक मामला अटका रहेगा। रिकॉर्ड में 40 करोड़ रुपए की लागत से प्रस्तावित 7.80 किलोमीटर का तरौद-दैहान बाइपास 9 साल से फाइल में ही कैद है।
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