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भास्कर न्यूज | बालोद मुक्त अवधूत क्रीड़ा स्थली बेलमांड में आयोजित पांच दिवसीय मुक्तानुभूति प्रवचन में मानस कोकिला गिरिजा देवी शर्मा ने मैं हूँ की सहज अभिव्यक्ति को आध्यात्मिक दृष्टि से समझाते हुए कहा कि यही परमात्मा की मूल अनुभूति है, जो सभी धर्मों और सभी मानवों में समान रूप से विद्यमान है। उन्होंने कहा कि मैं हूं पर कोई विरोध नहीं है चाहे व्यक्ति किसी भी धर्म, शिक्षा या विचारधारा से जुड़ा हो, यह आत्मबोध सार्वभौमिक है। उन्होंने शास्त्रों, मानस, भगवद्गीता और भागवत पुराण के विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि गुरु की कृपा से ही आत्मज्ञान और मुक्तानुभूति की प्राप्ति संभव है। प्रवचन में गिरिजा देवी शर्मा ने गुरु महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि जिस कुल में गुरु भक्त जन्म लेते हैं, वह कुल स्वयं धन्य हो जाता है। उन्होंने भक्ति, संत संग और गुरु प्राप्ति को जीवन का सर्वोच्च मार्ग बताते हुए मीरा बाई और रविदास के प्रसंगों का उल्लेख किया। कार्यक्रम में पंडवानी गायक प्रहलाद निषाद (सिंघनगढ़) द्वारा वेदमती शैली में प्रस्तुति दी गई। उन्होंने महाभारत के कर्ण प्रसंग सहित विभिन्न कथाओं का भावपूर्ण वर्णन किया। साथ ही चांदैनी, भरथरी और मुक्तमंदाकिनी भजनों ने छत्तीसगढ़ी संस्कृति की सोंधी महक बिखेरी। इस आध्यात्मिक आयोजन में बालोद, बेमेतरा, कवर्धा, खैरागढ़-छुईखदान- गंडई , धमतरी, कांकेर, दुर्ग एवं राजनांदगांव सहित अनेक जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं मुक्तनुचर उपस्थित रहे।
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