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छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अमर बिल्डर (अमर इंफ्रा) के संचालक चतुर्भुज राठी के ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई महेश कॉलोनी स्थित निवास पर चल रही है। इसके अलावा उसके दफ्तर में भी जांच चल रही है। जानकारी के मुताबिक ईडी के अधिकारी सुबह करीब 6 बजे दो गाड़ियों में पहुंचे और कार्यालय को घेरकर जांच शुरू की। टीम दस्तावेजों, कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच कर रही है। बताया जा रहा है कि अमर इंफ्रा ग्रुप के तहत 6 से अधिक फर्म संचालित हैं, जिनके वित्तीय लेन-देन और निवेश से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। यह भी बताया रहा है कि चतुर्भुज राठी स्थानीय स्तर पर सक्रिय भाजपा नेता भी हैं। हालांकि ईडी की ओर से अब तक इस कार्रवाई को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। वहीं ये कार्रवाई भारतमाला प्रोजेक्ट घोटाला से भी जुड़ा बताया जा रहा है। भाजपा-कांग्रेस के नेताओं के नाम आए सामने बता दें कि राज्य में निर्माणाधीन भारतमाला प्रोजेक्ट में हुए मुआवजा घोटाले में भाजपा-कांग्रेस के विधायक और दिग्गज नेताओं के नाम भी सामने आए हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) इनकी भूमिका की जांच कर रही है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि जिन क्षेत्रों से यह प्रोजेक्ट गुजर रहा है, वहां दिग्गज नेताओं ने अपने रिश्तेदारों के नाम पर जमीन खरीदी। बाद में उन्हीं जमीनों का मुआवजा भी लिया। पटवारी-आरआई की भूमिका पटवारी और आरआई ने मुआवजे के प्रकरण बनाकर कलेक्टर को भेजे। जिन पर हस्ताक्षर के बाद मुआवजा जारी किया गया। इन नेताओं से जुड़े लोगों के ठिकानों पर ईडी ने 27 अप्रैल को छापेमारी की थी। वहां से कुछ दस्तावेज मिले हैं, जिनसे नेताओं की कड़ियां जुड़ने के संकेत मिले हैं। इसमें एक दिग्गज भाजपा नेता से संबंधित दस्तावेज भी शामिल बताया जा रहा है। 12 जिलों के कलेक्टर जांच के घेरे में 12 जिलों के तत्कालीन कलेक्टरों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। इनमें से 6 कलेक्टरों की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है, जिन पर मोटा कमीशन लेने का आरोप है। इनमें रायपुर, कोरबा, धमतरी, बिलासपुर और दुर्ग के तत्कालीन कलेक्टरों के नाम सामने आए हैं। पकड़े गए आरोपियों ने भी पूछताछ में इनका जिक्र किया है। ईओडब्ल्यू का दावा- राजस्व अधिकारियों ने किया घोटाला आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) ने सरकार के निर्देश पर भारतमाला प्रोजेक्ट के मुआवजा घोटाले में एफआईआर दर्ज की है। इस मामले की जांच के बाद तत्कालीन एसडीएम निर्भय साहू समेत 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इसमें पटवारी, राजस्व निरीक्षक, प्रॉपर्टी डीलर और किसान भी शामिल हैं। मामले की जांच पूरी हो चुकी है और जल्द ही ईओडब्ल्यू इस प्रकरण में अंतिम चालान पेश करने की तैयारी में है। रायपुर के बाद सबसे ज्यादा गड़बड़ी कोरबा में ईओडब्ल्यू के इसी मामले के आधार पर ईडी ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की है, लेकिन ईडी बड़े अधिकारियों (आईएएस) की भूमिका की अलग से जांच कर रही है। रायपुर के बाद सबसे अधिक मुआवजा गड़बड़ी कोरबा जिले में सामने आई है। यहां मनमाने तरीके से मुआवजा बांटा गया। ईडी कोरबा के तत्कालीन दो महिला और एक पुरुष कलेक्टर की भूमिका की जांच कर रही है। आरोप है कि इन्हें मोटा कमीशन पहुंचाया गया। पूर्व मंत्री, विधायक और दिग्गज नेताओं पर भी जांच ईडी पूर्व मंत्रियों, विधायकों के साथ दिग्गज भाजपा, कांग्रेस और जोगी कांग्रेस से जुड़े नेताओं की भूमिका की जांच कर रहा है। उनके करीबी और रिश्तेदारों के नाम सामने आए हैं, जिनके जरिए जांच एजेंसी नेताओं तक कड़ियां जोड़ रही है। इस मामले में करीब दो दर्जन प्रॉपर्टी डीलर और बिचौलियों के नाम भी सामने आए हैं। कुछ अधिकारियों के रिश्तेदारों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है। ……………………… इससे जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… 66.9 लाख कैश और 37 किलो चांदी जब्त: भारतमाला मुआवजा केस में ED की रेड, रायपुर-धमतरी में 8 ठिकानों पर कार्रवाई, अफसरों से बदसलूकी प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीमों ने मंगलवार सुबह रायपुर, अभनपुर, धमतरी और कुरुद स्थित 8 अलग-अलग ठिकानों पर दबिश दी। जांच एजेंसी को शिकायत मिली थी कि भारतमाला हाईवे प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण के दौरान मुआवजा राशि में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई है। पढ़ें पूरी खबर…
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