ड्यूटी-ऑवर में निजी प्रैक्टिस की तो नर्सिंग होम पर कार्रवाई:कलेक्टर ने की स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा, डीएमएफ से खरीदी जाएंगी जरूरी मशीनें

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कलेक्टर अजीत वसंत ने गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक ली। उन्होंने जिले में स्वास्थ्य सेवाओं, अस्पतालों में उपलब्ध सुविधाओं और जरूरी व्यवस्थाओं की जानकारी ली। कलेक्टर ने कहा कि अगर अस्पताल के डॉक्टर ड्यूटी के समय निजी प्रैक्टिस करते पाए गए तो संबंधित नर्सिंग होम के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर ने अधिकारियों को स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने और बेहतर सुविधा दिए जाने की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ सभी पात्र लोगों को समय पर मिलना चाहिए। बैठक में कलेक्टर ने जिले में चल रही स्वास्थ्य योजनाओं और कार्यक्रमों की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को कमियों को दूर करने और स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार सुधार करने के निर्देश दिए। बैठक में सीएमएचओ डॉ. पी.एस. मार्को, सीएस जेके रेलवानी, सभी बीएमओ और अन्य अधिकारी मौजूद रहे। निजी प्रेक्टिस पर सख्त कार्रवाई करें कलेक्टर ने अधिकारियों को ड्यूटी के समय निजी प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों के नर्सिंग होम पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि डॉक्टर और अन्य स्वास्थ्यकर्मी ड्यूटी के समय स्वास्थ्य केंद्रों में मौजूद रहें। कलेक्टर ने कहा कि डॉक्टर तय समय पर अस्पताल में रहेंगे तो मरीजों को इलाज के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। उन्होंने अस्पतालों में खाली पदों की जानकारी भी ली और इन पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया की समीक्षा की। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भर्ती प्रक्रिया में किसी तरह की शिकायत नहीं आनी चाहिए। डीएमएफ से खरीदी जाएंगी मशीनें बैठक में कलेक्टर ने अस्पतालों में मशीनों की उपलब्धता की जानकारी ली। उन्होंने लुण्ड्रा और मैनपाट में निजी सेंटरों के माध्यम से पोर्टेबल सोनोग्राफी मशीन की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। साथ ही डीएमएफ से स्वीकृत दो अल्ट्रासाउंड मशीनों की खरीदी प्रक्रिया जल्द पूरी करने को कहा। कलेक्टर ने यह भी कहा कि सभी स्वास्थ्य केंद्रों में दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक रखा जाए, ताकि मरीजों को इलाज के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो। उन्होंने अस्पतालों में मरीजों को मिल रही स्वास्थ्य सुविधाओं की भी जानकारी ली। मातृ मृत्यु के कारणों की समीक्षा, रोकथाम के निर्देश कलेक्टर ने मातृ मृत्यु के कारणों की समीक्षा की और गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच व इलाज कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मातृ मृत्यु के मुख्य कारणों की पहचान कर उन्हें रोकने के लिए बेहतर योजना बनाई जाए। उन्होंने गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीयन, नियमित जांच और हाई रिस्क गर्भावस्था की पहचान करने पर जोर दिया। ऐसी महिलाओं की लगातार निगरानी करने के निर्देश भी दिए गए। कलेक्टर ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के जरिए गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों को अस्पताल में प्रसव, सही पोषण और प्रसव से जुड़ी जरूरी सावधानियों के बारे में जागरूक करने को कहा।
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