डिप्टी CM बोले-बस्तर में लोकतंत्र जीता, नक्सलवाद हारा:एर्राबोर में जनप्रतिनिधि ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी, हर घर तिरंगा की अपील की

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बस्तर में शांति और लोकतंत्र की बदलती तस्वीर के बीच ढाई साल के लंबे अंतराल के बाद पहली बार एक जनप्रतिनिधि एर्राबोर पहुंचे। कभी नक्सली हिंसा और काले झंडों के लिए पहचाने जाने वाले एर्राबोर में ऐतिहासिक परिसर में जनसभा आयोजित हुई। जनप्रतिनिधि ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और लोगों से आगामी राष्ट्रीय पर्व पर हर घर में तिरंगा फहराने की अपील की। कहा- बस्तर के कोने-कोने में हुई लोकतंत्र की जीत जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज बस्तर के कोने-कोने में लोकतंत्र की जीत और हिंसा की हार हुई है। अब बस्तर में तिरंगा फहराने से रोकने वाली कोई ताकत नहीं बची है। उन्होंने कहा कि पिछले पांच राष्ट्रीय पर्वों के दौरान बस्तर के सैकड़ों सुदूर गांवों में पहली बार तिरंगा फहराया गया है। मासूम कट्टम ज्योति का किया जिक्र एर्राबोर के हिंसक अतीत को याद करते हुए उन्होंने नक्सली हिंसा में मारी गई एक साल की मासूम कट्टम ज्योति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मासूम ज्योति समेत कई निर्दोष आदिवासियों और जवानों के बलिदान के बाद आज बस्तर में सुरक्षा और शांति की स्थिति बनी है। उन्होंने कहा कि एक समय 15 अगस्त और 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर तिरंगा फहराने पर पाबंदी थी और ग्रामीणों को काले झंडे लगाने के लिए मजबूर किया जाता था। अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं और संविधान का राज बस्तर के हर हिस्से तक पहुंचा है। आईईडी मुक्त गांव बनाने का लक्ष्य ‘बस्तर तिरंगा यात्रा’ ऐसे इलाकों से होकर गुजर रही है, जहां नक्सली हिंसा में ग्रामीणों और जवानों की जान गई। यात्रा का समापन कारीगुट्टा की पहाड़ी पर होगा। प्रशासन और सुरक्षा बल हर गांव को आईईडी मुक्त बनाने के अभियान में जुटे हैं। लघु वनोपज से मजबूत होगी ग्रामीणों की अर्थव्यवस्था जनसभा में बस्तर की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। कहा गया कि लघु वनोपज बस्तर की आर्थिक ताकत है। इसके बेहतर प्रसंस्करण, भंडारण और मार्केटिंग से स्थानीय परिवारों की आय बढ़ाई जा सकती है। बताया गया कि हिंसा का रास्ता छोड़कर 3 हजार से अधिक लोग मुख्यधारा में लौट चुके हैं। पंचायतों को कैडर-मुक्त कर ‘इलवद पंचायत’ बनाने की दिशा में भी काम चल रहा है। अंत में जनप्रतिनिधि ने कहा कि अब बस्तर में तिरंगा फहराने से रोकने वाली कोई ताकत नहीं है। हर घर, पंचायत और संस्थान पर तिरंगा लहराना ही बस्तर के स्वाभिमान और बदलती तस्वीर की पहचान बने।
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