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चिरमिरी में चल रही श्रीराम कथा के दौरान जगतगुरु रामभद्राचार्य ने नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत के बयान पर पलटवार किया है। महंत ने रामभद्राचार्य को ‘न जगतगुरु, न गांव का गुरु’ और ‘भाजपा का प्रचारक’ बताया था। इसके जवाब में जगतगुरु ने व्यासपीठ से महंत को खुली चुनौती दी। लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में जगतगुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि ‘मेरे जगतगुरु होने का पूर्ण परीक्षण कर लें, मैं हर कसौटी पर खरा हूं।’ उन्होंने बताया कि जगतगुरु बनने के लिए शास्त्रों में निर्धारित मापदंड होते हैं, जिसमें तीन ग्रंथों पर भाष्य लिखना अनिवार्य है। उन्होंने दावा किया कि सभी अखाड़ों और संत समाज ने उन्हें मान्यता दी है। रामभद्राचार्य ने आगे कहा कि वह ‘ऐसे-वैसे जगतगुरु नहीं’ हैं और 22 भाषाओं में धारा प्रवाह बोल सकते हैं। जिन्हें राम से प्रेम करने वालों से दिक्कत है, उन्हें मिर्ची लग रही उन्होंने कांग्रेस और पुराने घटनाक्रमों पर भी निशाना साधा। जगतगुरु ने कहा, ‘जिन्हें राम से प्रेम करने वालों से दिक्कत है, उन्हें मिर्ची लग रही है। जो राम जी से प्रेम करेगा उसे मेरा आशीर्वाद मिलेगा।’ निहत्थे रामभक्तों पर गोलियां तक चलवाई गई थी रामजन्मभूमि आंदोलन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि, ‘वो दिन मत भूलिए जब निहत्थे रामभक्तों पर लाठियां ही नहीं, गोलियां तक चलवाई गई थीं। हम रामजन्मभूमि के लिए महीनों जेल में रहे, आपने क्या किया उसका जवाब दीजिए।’ देश को गर्त में किसने पहुंचाय, जवाब दें जगतगुरु ने देश विभाजन का मुद्दा उठाते हुए पूछा, ‘देश को गर्त में किसने पहुंचाया, देश का विभाजन किसने करवाया, देश को टुकड़ों में किसने बांटा, इसका जवाब भी देना होगा।’ जगतगुरु के इन बयानों के दौरान पूरा स्टेडियम ‘जय श्रीराम’ के नारों से गूंज उठा। भक्तों ने हाथ उठाकर समर्थन जताया। चिरमिरी की यह श्रीराम कथा अब धार्मिक आयोजन से आगे बढ़कर राजनीतिक और वैचारिक संग्राम का केंद्र बनती दिख रही है।
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