छत्तीसगढ़ में निजी स्कूल प्रबंधन ने लंबे असहयोग आंदोलन के बाद 18 मई से आरटीई के तहत प्रवेश शुरू करने का फैसला लिया है। …और पढ़ें

HighLights
- निजी स्कूलों ने असहयोग आंदोलन के बीच लिया निर्णय
- डेढ़ माह की देरी से शुरू हो रहे आरटीई दाखिले
- 33 जिलों में 6,867 निजी स्कूल आरटीई से जुड़े
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर: छत्तीसगढ़ में निजी स्कूलों ने लंबे समय से चल रहे असहयोग आंदोलन के बीच बड़ा फैसला लेते हुए आरटीई के तहत प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की है। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने बताया कि बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए 18 मई से आरटीई के तहत दाखिले दिए जाएंगे।
डेढ़ माह की देरी से शुरू हो रही प्रक्रिया
RTE के तहत प्रवेश प्रक्रिया एक अप्रैल 2026 से शुरू होनी थी, लेकिन निजी स्कूल प्रबंधकों के विरोध के कारण यह प्रक्रिया अब करीब डेढ़ महीने की देरी से शुरू हो रही है। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने निजी स्कूलों के इस फैसले का स्वागत किया है।
फीस बढ़ाने की मांग पर अड़े स्कूल प्रबंधन
निजी स्कूल संचालक लंबे समय से आरटीई के तहत मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही वे आरटीई में प्रवेश के लिए एंट्री प्वाइंट के रूप में केजी-1 और नर्सरी कक्षाओं को भी शामिल करने की मांग कर रहे हैं।
वर्तमान में राज्य सरकार पहली से पांचवीं तक प्रति विद्यार्थी सात हजार रुपये प्रतिवर्ष प्रतिपूर्ति देती है। वहीं छठवीं से आठवीं तक 11,400 रुपये और नौवीं से 12वीं तक 15,000 रुपये की राशि निर्धारित है।
15 वर्षों से नहीं बढ़ी फीस
राज्य में एक अप्रैल 2011 से आरटीई के तहत प्रवेश की व्यवस्था लागू है। निजी स्कूल प्रबंधन का कहना है कि पिछले 15 वर्षों से प्रतिपूर्ति राशि में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है, जबकि स्कूल संचालन की लागत लगातार बढ़ रही है।
आरटीई प्रवेश से जुड़े प्रमुख आंकड़े
राज्य में आरटीई के तहत इस वर्ष कुल 3,08,439 आवेदन प्राप्त हुए हैं। प्रदेश के 33 जिलों में 6,867 निजी स्कूलों में 22,013 सीटें आरक्षित की गई हैं।
आरटीई में दाखिला देने के लिए निजी स्कूलों द्वारा लिए गए निर्णय का मैं स्वागत करता हूं। सरकार उनकी मांगों पर विचार करेगी।
– गजेंद्र यादव, मंत्री, स्कूल शिक्षा, छत्तीसगढ़
असहयोग आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार मांगें पूरी नहीं कर देती। वंचित वर्ग के बच्चों के हित को सर्वोपरि मानते हुए हमने यह संवेदनशील निर्णय लिया है।
– राजीव गुप्ता, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन
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