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हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित धर्म स्वातंत्र्य विधेयक की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। डिवीजन बेंच ने कहा कि चूंकि राज्य सरकार ने अभी तक इस अधिनियम को लागू करने की तारीख अधिसूचित नहीं की है, इसलिए इसे चुनौती देना ””प्री-मैच्योर”” यानी समय से पहले है। ऐसे में याचिका चलने योग्य नहीं है। दरअसल, अमरजीत पटेल ने धर्म स्वातंत्र्य विधेयक की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें तर्क दिया गया था कि यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21, 25 और 29 का उल्लंघन करता है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि यह कानून धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्ति की पसंद के मौलिक अधिकार पर कठोर प्रतिबंध लगाता है, इसलिए इसे असंवैधानिक घोषित कर निरस्त किया जाना चाहिए। राज्य शासन ने याचिका की मेंटेंबिलिटी पर उठाए सवाल
एडवोकेट जनरल विवेक शर्मा ने याचिका की मेंटेंबिलिटी पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह सही है कि विधानसभा से पारित होने के बाद विधेयक को राज्यपाल की मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन, विधेयक की धारा 1(3) के अनुसार, यह उस तारीख से लागू होगा जिसे सरकार गजट में प्रकाशित करेगी। फिलहाल, सरकार ने इसकी अधिसूचना जारी नहीं की है। हाईकोर्ट ने माना कि जब तक सरकार नोटिफिकेशन जारी नहीं करती, कानून प्रभावी नहीं माना जाएगा। कानून लागू होने से पहले ही उस पर सुनवाई का कोई आधार नहीं बनता। छत्तीसगढ़ में अभी लागू नहीं हुआ है अधिनियम
धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 19 मार्च 2026 को छत्तीसगढ़ विधानसभा में विधेयक पारित हुआ। 6 अप्रैल 2026 को राज्यपाल ने विधेयक पर हस्ताक्षर किए। 10 अप्रैल 2026 को अधिसूचना प्रकाशित हुई, जिसमें राज्यपाल की मंजूरी की जानकारी दी गई। अब जब राज्य सरकार अलग से तारीख तय करेगी, तभी यह प्रदेश में पूरी तरह लागू होगा। राज्य सरकार ने अभी तक लागू होने की तारीख अधिसूचित नहीं की है। आर्थिक प्रलोभन, दबाव या छल से धर्मांतरण पर सजा का प्रावधान
बता दें कि राज्य सरकार के इस विधेयक में जबरन, प्रलोभन या धोखाधड़ी से धर्मांतरण पर कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। नए कानून के अनुसार अवैध धर्मांतरण पर 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान किया गया है।
इसमें आर्थिक प्रलोभन, दबाव या छल से धर्म बदलवाने को अपराध की श्रेणी में रखा गया है। साथ ही संगठित या बड़े स्तर पर धर्मांतरण कराने पर और सख्त दंड देने का उल्लेख है।
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