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छत्तीसगढ़ में इलाज के बाद मासूम समेत 3 मौत:कोंडागांव-बलरामपुर में महिला-बच्चे ने इंजेक्शन लगाते ही दम तोड़ा, मनेन्द्रगढ़ में ऑपरेशन के बाद गई जान




छत्तीसगढ़ के कोंडागांव, बलरामपुर और मनेन्द्रगढ़ से इलाज के बाद मौत के तीन मामले सामने आए हैं। कोंडागांव में इंजेक्शन लगने के बाद 32 वर्षीय महिला की मौत का आरोप लैब टेक्नीशियन पर लगा है। बलरामपुर में कथित झोलाछाप के इलाज के बाद 3 साल के बच्चे ने दम तोड़ दिया, जबकि मनेन्द्रगढ़ में ऑपरेशन के बाद 35 वर्षीय महिला की मौत हुई है। तीनों मामलों में परिजनों ने इलाज में लापरवाही के आरोप लगाए हैं और पुलिस व स्वास्थ्य विभाग जांच कर रहे हैं। केस 1: कोंडागांव में इंजेक्शन के बाद महिला की मौत कोंडागांव जिले के विश्रामपुरी में ग्राम पिटेचुआ कोटवारपारा की रहने वाली मिथिला नेताम सर्दी-खांसी से परेशान थी। पति सुनील कुमार नेताम 18 अगस्त की सुबह उसे ब्लड टेस्ट कराने के लिए लैब टेक्नीशियन सहदेव वर्मा के घर ले गए थे। आरोप है कि ब्लड सैंपल लेने के बाद सहदेव वर्मा ने मिथिला के हाथ में इंजेक्शन लगाया। परिजनों का कहना है कि इंजेक्शन लगने के कुछ ही देर बाद मिथिला की तबीयत अचानक बिगड़ गई और वह बेहोश हो गई। हालत गंभीर होने पर परिजन उसे तुरंत विश्रामपुरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। मृतका के देवर विजय नेताम ने बताया कि परिवार को यह जानकारी नहीं है कि मिथिला को कौन सा इंजेक्शन लगाया गया था। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। मिथिला के तीन बच्चे हैं, इसलिए परिवार ने उचित मुआवजे की भी मांग की है। मामले की शिकायत पुलिस में की गई है। लैब टेक्नीशियन से मांगा जवाब विश्रामपुरी के बीएमओ डॉ. अनुराग भारती ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने सहदेव वर्मा से जवाब मांगा है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। केस 2: बलरामपुर में 3 साल के बच्चे की मौत बलरामपुर के कोतवाली थाना क्षेत्र में कथित झोलाछाप डॉक्टर के इलाज के बाद 3 साल के बच्चे की मौत का मामला सामने आया है। परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है। ग्राम जमुआटांड़ का रहने वाला अभीस चेरवा (3 साल) बुखार से पीड़ित था। परिजनों के अनुसार, अभीस को बुखार आने पर वे उसे सरनाडीह गांव में भूलेश्वर सिंह के पास इलाज के लिए ले गए थे। आरोप है कि इलाज के दौरान बच्चे को इंजेक्शन लगाया गया। इसके बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। हालत गंभीर होने पर परिजन बच्चे को घर ले जाने लगे, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। बच्चे की अचानक मौत से परिवार में मातम छा गया। घटना की सूचना मिलने के बाद कोतवाली पुलिस ने मर्ग कायम किया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट होगी। इसके बाद ही इलाज में लापरवाही या किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी तय की जा सकेगी। तीन महीने में चौथी मौत का दावा स्थानीय लोगों का कहना है कि कोतवाली थाना क्षेत्र में पिछले करीब तीन महीने में कथित झोलाछाप डॉक्टरों के इलाज के बाद मौत का यह चौथा मामला है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। इन मामलों की सही जानकारी जांच और स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी। केस 3: मनेन्द्रगढ़ में ऑपरेशन के बाद महिला की मौत मनेन्द्रगढ़ के मेट्रो हॉस्पिटल में ऑपरेशन के बाद 35 वर्षीय महिला नीतू सिंह की मौत का मामला सामने आया है। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज और ऑपरेशन में लापरवाही का आरोप लगाते हुए सिटी कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई है। सिरौली निवासी नीतू सिंह को पेट दर्द की शिकायत के बाद मेट्रो हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने जांच के बाद गर्भाशय का ऑपरेशन करने की सलाह दी। परिजनों के अनुसार, ऑपरेशन के बाद नीतू को होश नहीं आया और उनकी हालत लगातार बिगड़ती गई। हालत गंभीर होने पर अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें सूरजपुर के एक निजी अस्पताल में रेफर कर दिया। वहां इलाज के दौरान नीतू सिंह की मौत हो गई। महिला की मौत के बाद परिजन और ग्रामीण मनेन्द्रगढ़ सिटी कोतवाली पहुंचे और अस्पताल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने ऑपरेशन में कथित लापरवाही की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। स्वास्थ्य विभाग की टीम भी अस्पताल पहुंची और इलाज व ऑपरेशन से जुड़े दस्तावेज जब्त किए हैं। मनेन्द्रगढ़ के 220 बिस्तरीय शासकीय अस्पताल के अधीक्षक डॉ. स्वप्निल तिवारी ने बताया कि मेट्रो हॉस्पिटल से महिला के इलाज और ऑपरेशन से जुड़े दस्तावेज जब्त कर लिए गए हैं। जिला प्रशासन के निर्देश पर फिलहाल मेट्रो हॉस्पिटल की ओपीडी बंद कर दी गई है। फिलहाल तीनों मामलों में जांच जारी है। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मौतें चिकित्सकीय लापरवाही के कारण हुईं या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी।

बलरामपुर में कथित झोलाछाप डॉक्टर के इलाज के बाद एक तीन वर्षीय बच्चे की मौत का मामला सामने आया है। यह घटना कोतवाली थाना क्षेत्र में हुई। मृतक की पहचान ग्राम जमुआटांड़ निवासी अभीस चेरवा (3 वर्ष) के रूप में हुई है। परिजनों ने उपचार में लापरवाही का आरोप लगाया है। परिजनों के अनुसार, अभीस को बुखार आने पर उसे सरनाडीह गांव में भूलेश्वर सिंह के पास इलाज के लिए ले जाया गया था। आरोप है कि उपचार के दौरान बच्चे को इंजेक्शन लगाया गया, जिसके बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। बच्चे की हालत गंभीर होने पर परिजन उसे घर ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। मासूम की अचानक मौत से परिवार में मातम छा गया है। हालांकि, मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगा। घटना की सूचना मिलने पर कोतवाली पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मामले की जांच के बाद ही बच्चे की मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी। जांच पूरी होने के बाद ही किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी या इलाज में लापरवाही के संबंध में स्थिति स्पष्ट होगी। स्थानीय लोगों और ग्रामीणों के अनुसार, कोतवाली थाना क्षेत्र में पिछले लगभग तीन महीने के भीतर कथित झोलाछाप डॉक्टरों के इलाज के बाद यह चौथी मौत का मामला बताया जा रहा है। हालांकि, इन मामलों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित जांच और स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के आधार पर ही हो सकेगी। ऐसे लगातार सामने आ रहे मामलों ने ग्रामीण क्षेत्रों में बिना उचित चिकित्सा योग्यता या वैध अनुमति के कथित रूप से इलाज करने वालों की गतिविधियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल, पुलिस जांच जारी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।



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