तालाब में डूबते बच्चे को बचाने वाले 11 वर्षीय प्रेमचंद साहू को वीर बाल दिवस पर साहिबजादा फतेह सिंह वीरता पुरस्कार मिला। छठवीं के छात्र प्रेमचंद साहस औ …और पढ़ें

HighLights
- तालाब में कूदकर डूबते बच्चे की जान बचाई
- वीर बाल दिवस पर वीरता पुरस्कार से सम्मान
- पुलिस अफसर बनकर समाज सेवा का सपना।
लक्ष्मी कुमार, नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। तालाब में डूबते बच्चे को बचाने के लिए जब 11 वर्षीय प्रेमचंद साहू पानी में कूदा, तब उसने यह नहीं सोचा कि वह खुद बच पाएगा या नहीं। उसने सिर्फ इतना देखा कि किसी की सांसें डूब रही हैं। चंपारण गांव के इस नन्हे बालक की यही निर्भीकता अब उसकी पहचान बन गई है। वीर बाल दिवस पर आयोजित विशेष समारोह में प्रेमचंद को साहिबजादा फतेह सिंह अवार्ड (वीरता पुरस्कार) से सम्मानित किया गया।
प्रेमचंद छठवीं का छात्र है, लेकिन उसकी सोच उम्र से कहीं बड़ी है।
गांव में रहने वाले लोग बताते हैं कि वह बचपन से ही गलत बातों का विरोध करता है और किसी को मदद की जरूरत हो तो सबसे पहले आगे बढ़ जाता है। शायद यही वजह रही कि जब उसने तालाब में एक बच्चे को डूबते देखा तो डर उसे छू भी नहीं सका। आसपास मौजूद लोग शोर मचाते रहे और प्रेमचंद बिना रुके पानी में उतर गया। कुछ ही पलों में वह बच्चे को बाहर लेकर आया और उसकी जान बच गई।
अपने आसपास गलत चीजें बर्दाश्त नहीं
इस साहसिक कदम ने प्रेमचंद को गांव का हीरो बना दिया। लेकिन उसके सपने यहीं नहीं रुकते। प्रेमचंद बड़ा होकर पुलिस अफसर बनना चाहता है। वह कहता है कि पुलिस बनकर अपराधियों को पकड़ूंगा और लोगों की मदद करूंगा। उसे अपने आसपास होने वाली गलत चीजें पसंद नहीं और वह चाहता है कि सब सुरक्षित रहें।
पैसों की कमी उसके हौसले को न तोड़ दे
- पिता सुखदेव कहते हैं कि बेटा बड़ा सपना देखता है। डर बस यही है कि कहीं पैसों की तंगी उसके हौसले को न तोड़ दे। अगर उसे पढ़ने का मौका मिला तो वह जरूर आगे बढ़ेगा। वीरता पुरस्कार मिलने के बाद प्रेमचंद की आंखों में चमक है, लेकिन उसके सवाल अब भी वही हैं।
सात सदस्यों के परिवार में सबसे छोटा
- चंपारण गांव के सुखदेव साहू के परिवार में पत्नी, चार बेटियां, एक बेटा प्रेमचंद और बुजुर्ग मां हैं। प्रेमचंद सरकारी स्कूल में पढ़ता है। पढ़ाई में सामान्य, लेकिन हिम्मत और सोच में असाधारण। पुलिस बनने के सपने की राह आसान नहीं है। प्रेमचंद के पिता सुखदेव साहू पेशे से ड्राइवर हैं।
- उनकी मासिक आमदनी करीब नौ हजार रुपये है। सात सदस्यों का परिवार इस आय में जैसे-तैसे गुजर-बसर कर रहा है। आर्थिक तंगी ने परिवार के कई सपनों को पहले ही रोक दिया है। दो बेटियों को 10वीं के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी, जबकि बड़ी बेटी 12वीं के बाद नौकरी करने लगी। मां पार्वती साहू भी कभी-कभार खेतों में मजदूरी कर घर चलाने में हाथ बंटाती हैं।
<
