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महासमुंद के मेडिकल कॉलेज सह जिला अस्पताल में मरीजों को निजी अस्पतालों तक पहुंचाने वाले कथित दलालों पर अस्पताल प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। लंबे समय से मिल रही शिकायतों और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में दर्ज शिकायत के बाद संयुक्त संचालक सह अस्पताल अधीक्षक डॉ. बसंत महेश्वरी ने 24 जून 2026 को सख्त आदेश जारी किए हैं। इन आदेशों में सभी वार्ड प्रभारियों, नर्सिंग स्टाफ, मेट्रन, वार्ड बॉय, आया, सुरक्षा कर्मियों और अन्य कर्मचारियों को ऐसे संदिग्ध बाहरी व्यक्तियों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। अस्पताल प्रशासन द्वारा जारी आदेश में बताया गया है कि लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ बाहरी व्यक्ति अस्पताल कर्मचारी या मरीज के परिजन बनकर परिसर में घुस जाते हैं। ये लोग मरीजों और उनके परिजनों को सरकारी अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था पर संदेह पैदा कर निजी अस्पतालों में बेहतर इलाज का झांसा देते हैं। इनका उद्देश्य कमीशनखोरी के लिए मरीजों को निजी अस्पतालों में ले जाना होता है। कई बार वे अपने निजी वाहनों से मरीजों को सीधे निजी अस्पतालों तक पहुंचाते भी हैं। सीएम हेल्पलाइन पर की शिकायत जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री के नेतृत्व में संचालित सीएम हेल्पलाइन 1076 पर एक जागरूक नागरिक ने अस्पताल परिसर में सक्रिय कथित दलालों के नेटवर्क की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप था कि ये लोग मरीजों और उनके परिजनों को अच्छे इलाज का लालच देकर निजी अस्पतालों में भर्ती कराते हैं, जिसके बदले उन्हें कमीशन मिलता है। यह शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचने के बाद अस्पताल प्रशासन को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए, जिसके बाद अधीक्षक ने यह आदेश जारी किया। स्पताल में संदिग्ध दिखे तो तुरंत अधीक्षक दें जानकारी आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि यदि अस्पताल परिसर, वार्ड, ओपीडी, इमरजेंसी या किसी भी विभाग में कोई संदिग्ध बाहरी व्यक्ति मरीजों को निजी अस्पताल ले जाने के लिए प्रेरित करता हुआ मिले, या स्वयं को अस्पताल कर्मचारी बताकर गुमराह करता दिखाई दे, तो इसकी सूचना तत्काल अस्पताल अधीक्षक कार्यालय को दी जाए। कर्मचारियों को ऐसे मामलों में पूरी सतर्कता बरतने और किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं। अस्पताल प्रशासन ने माना है कि ऐसे लोगों की वजह से मरीजों के इलाज में दिक्कत होती है। कई बार इमरजेंसी वार्ड में बेवजह विवाद और अफरा-तफरी की स्थिति बन जाती है, जिससे डॉक्टरों का काम भी प्रभावित होता है। संयुक्त संचालक सह अस्पताल अधीक्षक डॉ. बसंत महेश्वरी ने बताया कि इस मामले में सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर शिकायत मिली थी। इसके अलावा भी अलग-अलग माध्यमों से लगातार ऐसी शिकायतें आ रही थीं। अस्पताल में कई बार यह पहचान करना मुश्किल हो जाता है कि कौन असली मरीज या परिजन है और कौन बाहरी व्यक्ति। इसलिए सभी वार्ड प्रभारी, स्टाफ और सुरक्षा कर्मियों को निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे संदिग्ध लोगों पर नजर रखें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत जानकारी अस्पताल प्रशासन को दें।
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