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फर्जी निवास प्रमाणपत्र के माध्यम से सीआरपीएफ में भर्ती होने वाले जवान की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने फर्जी प्रमाणपत्र बनाने वाले गिरोह के 4 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। फर्जी निवास प्रमाणपत्र बलरामपुर तहसील से जारी हुआ था। मामले में बलरामपुर थाने में धोखाधड़ी का अपराध दर्ज किया गया था। आरोपी ने कई फर्जी निवास प्रमाण पत्र जारी कराना स्वीकार किया है। जानकारी के मुताबिक, 204 कोबरा बटालियन, सीआरपीएफ जगदलपुर में पदस्थ कांस्टेबल सुमित सिंह का निवास प्रमाण पत्र जांच में फर्जी मिला था। सुमित पिता अचल सिंह निवासी ग्राम रुंध जिला धौलपुर राजस्थान जो कि छत्तीसगढ़ राज्य के कोटे का अवैध लाभ लेकर वर्ष 2023 में सीआरपीएफ में एसएससी के माध्यम से भर्ती हुआ था। जांच में खुलासा हुआ कि सुमित सिंह का फर्जी निवास प्रमाण पत्र बलरामपुर तहसील से जारी किया गया था। यह प्रमाण पत्र ई डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के माध्यम से बनवाया गया था। चार आरोपी किए गए गिरफ्तार
बलरामपुर तहसीलदार ने मामले में 28 अप्रैल को थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि सीआरपीएफ कांस्टेबल सुमित सिंह का निवास प्रमाण पत्र विशाल सोनी पिता स्व. सुरेश सोनी के शैक्षणिक दस्तावेजों तथा अन्य आवश्यक दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर बनवाया गया है। सुमित सिंह मूलतः मनिया जिला धौलपुर राजस्थान का निवासी है। पुलिस ने सुमित सिंह व अन्य के खिलाफ धारा 318(2), 319(2), 336(3), 338, 340(2), 61(2) बीएनएस एवं 66(सी), 66(डी) आईटी एक्ट का अपराध दर्ज किया था। सुमित सिंह की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने पुलिस ने जांच की तो पता चला कि छत्तीसगढ़ के विभिन्न स्थानों से फर्जी निवास प्रमाण पत्र जारी कराने का सरगना विवेक सिंह तोमर (24 वर्ष) निवासी अंबा, जिला मोरेना मध्यप्रदेश है। विवेक सिंह तोमर एवं उसके अन्य साथी आकाश सिंह (22 वर्ष) निवासी मोरेना मध्यप्रदेश को पुलिस ने रायपुर से हिरासत में लिया। पुलिस जांच में पता चला कि विवेक सिंह तोमर ने स्वयं का भी डोंगरगढ़ से फर्जी दस्तावेजों का उपयोग कर छत्तीसगढ़ राज्य का निवास प्रमाण पत्र बनवाया गया है। आकाश शर्मा के द्वारा अपना नाम बदलकर तुकेश्वर पिता भोजराम निवासी पुलिस लाइन के पीछे बलरामपुर के नाम से फर्जी आधार कार्ड, पेन कार्ड, बनवाया गया है। तहसील कार्यालय में ऑनलाइन एप्लीकेशन जमा कर अवैध तरीके से स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र बनवाने वाले आरोपी ओमप्रकाश चंद्रवंशी (28 वर्ष) निवासी राजनांदगांव को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया। सभी आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। 3 से 4 लाख रुपये में फर्जी प्रमाणपत्र
पुलिस जांच में पता चला कि विवेक सिंह तोमर के द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य के बाहर के लोगों का छत्तीसगढ़ राज्य का स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र बनवाने के लिए काम अपने सहयोगियों को दिया जाता था। प्रति व्यक्ति के हिसाब से 4-5 हज़ार रुपये लेकर सहयोगी ई डिस्ट्रिक्ट पोर्टल में अलग-अलग लोगों के दस्तावेज में छेड़छाड़ कर आनलाइन आवेदन जमा करते थे। आरोपी विवेक सिंह तोमर के द्वारा एक प्रमाण पत्र बनवाने के लिए प्रति व्यक्ति 3-4 लाख रुपये प्राप्त किया है। सीआरपीएफ की भर्ती में छत्तीसगढ़ राज्य का कट ऑफ अन्य राज्यों की तुलना में कम रहने के कारण अन्य राज्य के लोग यहा के कोर्ट से फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनवाकर भर्ती हुए हैं। तहसील कार्यालय डोंगरगढ़ से ऐसे लगभग 20-25 लोगों का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया गया है, जिनमें से कई सशस्त्र बलों में भर्ती हुए हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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