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गुरमीत वाधवा की गिरफ्तारी के पीछे एक पूरी फिल्मी कहानी सामने आई है। वाधवा खुद को ‘फोर्ब्स इंडिया’ पत्रिका का मैनेजिंग एडिटर बताकर लोगों को प्रभावित करता था। उससे जुड़े लोगों के मुताबिक वह बेहद चालाक और प्रभावशाली तरीके से बात करने वाला शख्स था, जो बड़े-बड़े दावे कर किसी को भी अपने झांसे में ले लेता था। वह मुख्यमंत्री से लेकर जिलाधिकारियों तक से करीबी संबंध होने का दावा करता था। इसी प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए वह 28 अक्टूबर 2025 को मुख्य सचिव विकासशील से मिला। उसने एक पत्र सौंपा, जिसमें दावा किया गया था कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने उसे छत्तीसगढ़ के हर जिले के पांच अस्पतालों की जांच का जिम्मा दिया है। इसी आधार पर उसने सरदार बीरा सिंह अस्पताल की जांच कर गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया। वाधवा की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए सचिवालय ने तत्काल कार्रवाई की। अपर सचिव ने संचालक स्वास्थ्य सेवाएं को जांच के निर्देश दिए, जिसके बाद 11 नवंबर 2025 को दुर्ग के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने जांच दल भेजा। जांच में अस्पताल पूरी तरह मानकों के अनुरूप पाया गया- विशेषज्ञ डॉक्टर, पंजीकृत स्टाफ और सभी जरूरी सुविधाएं मौजूद थीं। वाधवा के सभी आरोप निराधार निकले। अस्पताल प्रबंधन की पड़ताल में यह भी सामने आया कि ‘फोर्ब्स इंटरनेशनल’ नाम की संस्था भारत में पंजीकृत ही नहीं है। इसके बाद अस्पताल ने 10 दिन पहले वाधवा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई, जिस पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने शुक्रवार को उसे गिरफ्तार कर लिया। नेताओं की फोटो का दुरुपयोग वाधवा मंत्री के साथ फोटो खिंचवा कर उसका दुरुपयोग करता है। इसका खुलासा भी पुलिस की जांच में हुआ। उसने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के साथ खिंचवाई गई फोटो को अपनी शिकायत के साथ लगाया था। उस फोटो को आधार मानते हुए ही प्रशासन ने भी विश्वास कर लिया था कि उसे मौखिक आदेश मिला होगा। अब सवाल यह है कि अभी तो सिर्फ एक अस्पताल ने शिकायत की है, लेकिन इस पत्र के आधार पर वह जाने कितने अस्पतालों को ठग चुका होगा। व्हिसल ब्लोअर निकला एक डॉक्टर एसबीएस अस्पताल के बाद उसने एक और अस्पताल को टारगेट बनाया। उसको राजभवन के नाम से ब्लैकमेल करना शुरू किया। वाधवा ने खुद को राज्यपाल का करीबी बताया। डॉक्टर जब झांसे में नहीं आया तो वाधवा ने उसकी 100 से अधिक शिकायतें की। अब आए दिन अस्पताल की जांच करने कोई न कोई टीम पहुंच जाती। इस पर डॉक्टर ने केंद्रीय और राज्य स्वास्थ्य मंत्रालय में सूचना के अधिकार से जानकारी मांगी कि जेपी नड्डा ने क्या कोई वाधवा को जांच का आदेश दिया है। जवाब में वे दस्तावेज सामने आए जो उसने फर्जी तरीके से मुख्य सचिव को दिए थे, लेकिन ऐसा कोई पत्र नहीं मिला जिसमें वाधवा को जांच के लिए कहा गया हो। इस पर डॉक्टर ने केंद्र से लेकर राज्य तक में वाधवा के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई।
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