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महिला आरक्षण बिल के विरोध को लेकर भारतीय जनता पार्टी आज से प्रदर्शन की शुरुआत कर रही है। राजधानी रायपुर में 20 अप्रैल को भाजपा महिला मोर्चा की जन आक्रोश यात्रा बलबीर जुनेजा इंडोर स्टेडियम से दोपहर 3 बजे निकलेगी और सुभाष स्टेडियम तक जाएगी, जहां सभा होगी। इस यात्रा में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, प्रदेश अध्यक्ष किरण देव,डिप्टी सीएम अरुण साव, कैबिनेट मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, सांसद रूपकुमारी चौधरी, कमलेश जांगड़े और लक्ष्मी वर्मा समेत जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल होंगे। लगातार होंगे प्रदर्शन नारी शक्ति वंदन अधिनियम संसद में पास नहीं होने के बाद भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन करने की रणनीति बनाई है। इसी कड़ी में लगातार छत्तीसगढ़ में भी विपक्ष के खिलाफ प्रदर्शन की शुरूआत आज से हो रही है। 20 अप्रैल को प्रदेश में जन आक्रोश महिला पदयात्रा के बाद 23 और 24 अप्रैल को प्रदेशभर में जन आक्रोश महिला सम्मेलन रखे जाएंगे। 26 और 27 अप्रैल को मंडल स्तर पर पुतला दहन किया जाएगा। इससे पहले रायपुर में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि 70 करोड़ महिला शक्ति की उम्मीदों पर पानी फेरा गया, वहीं भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री अरूण सिंह ने कहा कि कांग्रेस ने महिलाओं के अधिकारों के साथ गद्दारी की है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। कांग्रेस फूट डालो और राज करो की नीति अपनाती है -साय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि वे बहुत दुखी मन से मीडिया के बीच आए हैं और 33 प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण विपक्ष के रवैये की वजह से नहीं मिल पाया। उन्होंने कहा कि इंडी गठबंधन ने 70 करोड़ महिला शक्ति की उम्मीदों पर पानी फेरने का काम किया है। छत्तीसगढ़ में पंचायती राज में महिलाओं का आरक्षण 57 प्रतिशत है और विधानसभा में भी 21-22 प्रतिशत नारी शक्ति है। उन्होंने कहा कि इंडी गठबंधन के लोग अंग्रेजों की तरह “फूट डालो और राज करो” की नीति अपनाते हैं और समाजवादी पार्टी जैसी पार्टी धर्म के नाम पर आरक्षण की बात कहकर लोगों को बरगलाती है। उन्होंने कहा कि आने वाले वक्त में इंडी गठबंधन को इसका खामियाजा भुगतना होगा। कांग्रेस और इंडी गठबंधन का वास्तविक चेहरा सामने आ चुका है और देश की माता-बहनें सच्चाई जान चुकी हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने कहा है कि देश की महिलाओं की उम्मीदों पर पानी नहीं फिरने दिया जाएगा। लोकसभा में पास नहीं हो सका महिला आरक्षण बिल लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान (131वां संशोधन) बिल पास नहीं हो सका। बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया। इसे पारित करने के लिए 352 वोटों की आवश्यकता थी। इस बिल में लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 करने और महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान शामिल था। PM मोदी ने माफी मांगी, विपक्ष पर साधा निशाना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार शाम देश को संबोधित करते हुए महिला आरक्षण बिल पास नहीं हो पाने पर माताओं-बहनों से माफी मांगी। उन्होंने कहा कि इस बिल में संशोधन नहीं हो पाया और इसके लिए वे क्षमा चाहते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके लिए देशहित सर्वोपरि है, लेकिन कुछ दलों के लिए दलहित देशहित से बड़ा हो गया, जिसका नुकसान नारी शक्ति को उठाना पड़ा। उन्होंने कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके और समाजवादी पार्टी जैसे दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि इनकी राजनीति के कारण महिलाओं के अधिकारों को झटका लगा है। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि महिला आरक्षण प्रस्ताव गिरने के बाद विपक्षी दलों द्वारा खुशी जताई गई, जबकि देश की करोड़ों महिलाओं की नजर संसद पर थी। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति अपने अपमान को नहीं भूलती और इस पूरे घटनाक्रम को देश की महिलाएं याद रखेंगी। विशेष सत्र में लाया गया था प्रस्ताव महिला आरक्षण से जुड़े इस प्रस्ताव को पारित कराने के लिए केंद्र सरकार ने संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया था। मतदान के दौरान आवश्यक बहुमत नहीं मिलने के कारण यह बिल पारित नहीं हो सका।
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