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Home » Women lying on the ground, Baiga passing over them, VIDEO | जमीन पर लेटी महिलाएं, बैगा ऊपर से गुजरे VIDEO: छत्तीसगढ़ की मां-अंगारमोती की मान्यता, संतान के लिए 800 महिलाओं का रजिस्ट्रेशन; परंपरा बंद करने की मांग – Chhattisgarh News
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Women lying on the ground, Baiga passing over them, VIDEO | जमीन पर लेटी महिलाएं, बैगा ऊपर से गुजरे VIDEO: छत्तीसगढ़ की मां-अंगारमोती की मान्यता, संतान के लिए 800 महिलाओं का रजिस्ट्रेशन; परंपरा बंद करने की मांग – Chhattisgarh News

By adminOctober 25, 2025No Comments5 Mins Read
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छत्तीसगढ़ के गंगरेल स्थित मां अंगारमोती मंदिर में दीपावली के बाद पहले शुक्रवार को देव मड़ई का आयोजन हुआ। इस दौरान संतान प्राप्ति की मन्नत लेकर 800 से अधिक महिलाएं पेट के बल जमीन पर लेटीं। बैगा उनके ऊपर से चलकर मां अंगारमोती माता तक पहुंचे, जो यहां की

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गंगरेल बांध में स्थित मां अंगारमोती में यह परंपरा 50 साल पहले ही शुरू हुई है। यहां प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां आने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं, खासकर निःसंतान दंपतियों को संतान सुख मिलता है।

इस परंपरा पर अंध श्रद्धा निर्मूलन समिति ने ऑब्जेक्शन लिया है। समिति के अध्यक्ष दिनेश मिश्र ने इसे अनुचित और अमानवीय बताते हुए इस परंपरा को बंद कराने की मांग की है और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। जिसके बाद मंदिर ट्रस्ट ने दिनेश मिश्र को नोटिस भेजवाया है।

ग्रामीण मानते है कि बैगाओं में देवता आते है। जो उनके ऊपर से गुजरते है।

ग्रामीण मानते है कि बैगाओं में देवता आते है। जो उनके ऊपर से गुजरते है।

परंपरा 50 साल पहले ही शुरू हुई है।

परंपरा 50 साल पहले ही शुरू हुई है।

सूनी गोद भरने की कामना से पहुंचती है महिलाएं

मान्यता के मुताबिक, देव मड़ई के दिन 52 गांवों के देवी-देवताओं यहां आते है। सभी देवी-देवता एक साथ गंगरेल में ढाई परिक्रमा लगाकर सीधे मां अंगारमोती के दरबार में पहुंचते हैं और भेंट चढ़ाते हैं।

मन्नत लेकर पहुंची महिलाओं ने बताया कि वे सूनी गोद भरने की कामना से यहां आई हैं। उन्होंने कहा कि बचपन से सुनते आ रहे हैं कि मां अंगारमोती सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।

दीपावली के बाद पहले शुक्रवार (24 अक्टूबर) को आयोजित इस विशाल मेले में संतान प्राप्ति के लिए महिलाएं विशेष रूप से आती हैं, हालांकि अन्य मन्नतें लेकर भी श्रद्धालु पहुंचते हैं।

कुछ महिलाओं ने बताया कि वे लंबे समय से मंदिर दर्शन के लिए आ रही हैं, लेकिन मनोकामना लेकर पहली बार मां अंगारमोती के दरबार में पहुंची हैं। उन्होंने अपने हाथों में नारियल का फूल लेकर तीन घंटे से अधिक समय तक इंतजार किया।

महिलाओं के मुताबिक, यह सबकी अपनी-अपनी श्रद्धा का विषय है। जो लोग इसे नहीं मानते, उनके लिए यह अंधविश्वास हो सकता है, लेकिन भक्तों के लिए यह गहरी आस्था का प्रतीक है।

कुछ महिलाओं ने यह भी बताया कि मां अंगार मोती के बारे में यह भी सुना है कि मड़ई के दिन संतान प्राप्ति के लिए महिलाएं मन्नत लेकर बैठती है। मन्नत के लिए वह खुद मां अंगार मोती दरबार में पहुंची हुई। जिसके लिए करीब 3 घंटे से इंतजार करते रहते हैं।

इस साल 800 महिलाओं ने रजिस्ट्रेशन करवाया था।

इस साल 800 महिलाओं ने रजिस्ट्रेशन करवाया था।

दिवाली के बाद पहले शुक्रवार को होता है आयोजन

पुजारी तुकाराम मरकाम ने कहा दीपावली के बाद पहले शुक्रवार को गंगरेल में अंगार मोती के दरबार में देव मेला का आयोजन होता है। छत्तीसगढ़ में देव मड़ई गंगरेल के माँ अंगार मोती मंदिर में प्रदेश में पहले होता है।और सभी मनोकामना लेकर पहुंचते है।

मनोकामना श्रद्धा भक्ति के साथ मांगते हैं। जिसकी मनोकामना पूर्ण होती है और मां अंगार मोती माता निसंतान को संतान देने के लिए प्रसिद्ध है। महिलाए श्रद्धा भाव से गोद की फुल के लिए आते हैं। उनकी मनोकामना पूर्ण होती है। बताया गया कि मड़ई के दिन 52 गांव के देवी देवता पहुंचते हैं। यह सदियों से चली आ रही है।

संतान प्राप्ति की मनोकामना लेकर महिलाएं पहुंचती है।

संतान प्राप्ति की मनोकामना लेकर महिलाएं पहुंचती है।

गंगरेल बांध बना तब से चली आ रही परंपरा

माँ अंगार मोती मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष जीवराखन लाल मराई ने बताया कि कई साल पुरानी परंपरा रहा है। जब सन 1974-75 में गंगरेल बांध बना तो माता डुबान क्षेत्र में आ गई। इसके बाद 52 गांव के भक्तों ने बैलगाड़ी में लाकर गंगरेल में माता की स्थापना की। तब से आज तक परंपरा चलती आ रही है।

जितने भी डूबान क्षेत्र में आते हैं वहां के 52 गांव की देवी देवता मड़ाई में आते हैं। कई साल परंपरा का निर्वाहन अब तक किया जा रहा है। महिलाएं अपनी मन्नत लेकर के आते हैं। परण विधि के साथ महिलाएं अपने साथ नारियल फूल लेकर जमीन पर लेटती है।

अध्यक्ष ने यह भी बताया इस वर्ष मन्नत लेकर पहुंची महिलाओं में से करीब 800 महिलाओं ने अपना पंजीयन कराया था। बताया गया कि महाराष्ट्र उड़ीसा और मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल से भी महिलाएं पहुंची हुई थी। इनमें खासकर महिलाएं जो निसंतान होती है वह संतान प्राप्ति के लिए मनोकामना लेकर पहुंचती है। जिनकी मनोकामना माँ मोती माता पूरी करती है।

जब से गंगरेल बांध बना तब से चली आ रही परंपरा।

जब से गंगरेल बांध बना तब से चली आ रही परंपरा।

इस परंपरा को बंद करने की मांग

इधर अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति से इस परंपरा को अंधविश्वासी बताते हुए बंद कराने की मांग की है। समिति के अध्यक्ष डॉ दिनेश मिश्र. ने कलेक्टर को पत्र लिख कर ये मांग की। दिनेश मिश्र का कहना है कि बैगाओं के महिलाओं के ऊपर चलने की परंपरा अनुचित और अमानवीय है।

पत्र में उन्होंने लिखा है कि धार्मिक आस्था, अनुष्ठान की स्वतंत्रता तो सबको है पर सन्तान प्राप्ति के नाम पर महिलाओं के साथ ऐसे हानिकारक रिवाज और कुरीतियों को बंद होना चाहिए।

दिनेश मिश्र को नोटिस जारी

वहीं, अंध श्रद्धा निर्मूलन समिति ने इस परंपरा को बंद करवाने की मांग पर मां अंगार मोती ट्रस्ट के अध्यक्ष ने कहा दिनेश मिश्र नामक व्यक्ति को नोटिस भी जारी किया गया था। अध्यक्ष ने कहा आस्था का कोई मापदंड नहीं होता और ना ही कोई नियम कानून कायदा है आस्था तो आस्था है और आस्था से बड़ा कोई चीज नहीं हो सकता।

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ये तस्वीर पिछले साल की है।

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