छत्तीसगढ़ में एक पत्नी अपने पति को पालतू चूहा कहती थी, इसे हाईकोर्ट ने मानसिक क्रूरता माना है। दरअसल शादी के 10 साल बाद पति पत्नी के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि तलाक लेने की नौबत आ गई। परेशान पति ने कोर्ट में बताया कि पत्नी उसे अपने माता-पिता से अलग रह
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पति को पालतू चूहा कहने और माता-पिता से अलग रहने की जिद करने को हाईकोर्ट ने मानसिक क्रूरता माना है। हाईकोर्ट ने कहा कि भारतीय संयुक्त परिवार की व्यवस्था में पति को माता-पिता से अलग करने की जिद करना मानसिक क्रूरता है।

पति को पालतू चूहा कहने पर हाईकोर्ट ने इसे मानसिक क्रुरता माना है।
2009 में हुई थी शादी, रायपुर में रहते थे
बता दें, कि रायपुर के रहने वाले दंपती की 28 जून 2009 को शादी हुई थी। 5 जून 2010 को उनका एक बेटा हुआ। पति ने अपनी पत्नी पर क्रूरता और परित्याग के आरोप लगाते हुए फैमिली कोर्ट रायपुर में तलाक के लिए याचिका लगाई।
जहां 23 अगस्त 2019 को दोनों का तलाक मंजूर हुआ। पत्नी ने इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की। पति ने अपने पक्ष में तर्क दिया कि पत्नी ने उनके माता-पिता के साथ दुर्व्यवहार किया और उनसे अलग रहने की जिद की।
ऐसा करने से इनकार करने पर पत्नी आक्रामक व्यवहार करने लगी। उसे शारीरिक रूप से भी नुकसान पहुंचाया। यह भी बताया कि माता-पिता की बात मानने के लिए पत्नी अपमानजनक रूप से उसे पालतू चूहा कहती थी।
इसके अलावा उसने खुद गर्भपात करने का प्रयास किया। बताया कि पत्नी 24 अगस्त 2010 को तीजा के दौरान अपने मायके चली गई और उसके बाद कभी वापस नहीं आई।
टेक्स्ट मैसेज को कोर्ट ने माना सबूत
मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पत्नी द्वारा भेजे गए एक टेक्स्ट मैसेज को भी सबूत माना। इस मैसेज में पत्नी ने कहा था कि अगर तुम अपने माता-पिता को छोड़कर मेरे साथ रहना चाहते हो तो जवाब दो, वरना मत पूछो।
हर परीक्षण के दौरान पत्नी ने स्वीकार किया था कि उसने यह मैसेज भेजा था। उसने यह भी माना कि वह अगस्त 2010 के बाद अपने ससुराल नहीं लौटी।
पत्नी की लाइब्रेरियन, पति का बैंक में जॉब था
फैमिली कोर्ट ने दोनों पक्षों की आय पर विचार करते हुए हाई कोर्ट ने पाया कि पत्नी लाइब्रेरियन के पद पर कार्यरत हैं, जबकि पति छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक में अकाउंटेंट हैं। वर्तमान में पत्नी अपने बेटे के साथ रहती हैं।
हाई कोर्ट ने पत्नी को 5 लाख रुपए स्थायी गुजारा भत्ता देने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा बेटे को हर माह गुजारा भत्ता देना होगा। बेटे के पालन-पोषण के लिए 6 हजार और उसे हर माह एक हजार रुपए गुजारा भत्ता मिल रहा है।
सभी बातों को ध्यान में रखते हुए हाई कोर्ट ने पति को अपनी पूर्व पत्नी को एकमुश्त 5 लाख रुपए स्थायी गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया है। मामले की सुनवाई जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की डिवीजन बैंच में हुई।
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस एके प्रसाद की डिवीजन बेंच ने तलाक केस में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। उन्होंने कहा कि, बेरोजगार पति को ताना मारना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए पति की तलाक की अर्जी मंजूर कर ली है। पढ़ें पूरी खबर…
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