सरगुजा जिले के मैदान में युवक का शव लेकर ग्रामीण पिकअप से असगवां तक पहुंचे। वहां से तीन किलोमीटर दूर शव को ढोकर सुगापानी गांव तक पहुंचेे। सड़क नहीं बनने के कारण असगवां तक शव वाहन नहीं पहुंच पाती है। 10 दिनों पूर्व एक सीएएफ जवान के शव को भी ग्रामीण ढोक
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दरअसल मैनपाट ब्लॉक अंतर्गत असगवां तक कच्ची सड़क है। इससे लगे सुगापानी, ढाबपारा, टिकरापारा, गिर्राडीह, नवलपारा आदि कस्बों तक पहुंचने के लिए सड़क नहीं है। यहां मछली नदी में पुल नहीं है। इसके कारण गाड़ियां बस्तियों तक नहीं पहुंच पाती है। किसी की मौत होने पर शवों को गांव तक पैदल ढोकर पहुंचना पड़ता है।

वाहनों के चलने लायक नहीं है पहाड़ी सड़क, पुल भी नहीं
शव ढोकर तीन किलोमीटर पैदल चले ग्रामीण ग्राम सुगापानी निवासी युवक अमित किण्डो (26 वर्ष) धरमजयगढ़ में जेसीबी चलाता था। बाइक से अपने मैनेजर के साथ जाने के दौरान वह सड़क हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। हॉस्पिटल में उसकी मौत हो गई। परिजनों को पोस्टमॉर्टम के बाद शव सौंपा गया एवं शववाहन उपलब्ध कराया गया। शव वाहन ग्रामीण इलाके में नहीं पहुंच पाती इसलिए परिजन पिकअप से शव लेकर असगवां चौक तक पहुंचे।
परिजन अमित किण्डो के शव को ढोकर तीन किलोमीटर पैदल चले और सुगापानी पहुंचाया, जहां उसका अंतिम संस्कार किया गया।

मृतक की भाभी ने कहा-चुनाव के बाद नहीं आए विधायक
सीएएफ के जवान का शव भी ढोकर पहुंचाया 10 दिनों पूर्व सीएएफ जवान लवरेंस बड़ा की भी हार्टअटैक से मौत होने पर परिजनों को उसका शव तीन किलोमीटर ढोना पड़ा था। लवरेंस छुट्टी में घर आया था। तबीयत बिगड़ने पर उसे हॉस्पिटल में दाखिल किया गया। वहां उसकी मौत हो गई। लवरेंस बड़ा के शव को असगवां तक लाया गया, जहां से शव को तीन किलोमीटर ढोकर गांव तक पहुंचाया गया।

सीएएफ जवान के भाई बोले-तीन किलोमीटर ढोया शव
10 दिनाें में दो ग्रामीणों के शवों को ढोए जाने से ग्रामीण भी व्यथित हैं। सीएएफ जवान लवरेंस बड़ा के भाई सुलेमान बड़ा ने कहा कि हम मरने के बाद भी अपने भाई को सुख नहीं दे सके, जबकि वह सीएएफ का जवान था। अमित किण्डो की भाभी जयमणी किण्डो ने कहा कि रामकुमार टोप्पो ने पूर्व में आश्वासन दिया था कि गांव तक सड़क बन जाएगी, लेकिन वे चुनाव जीतने के बाद क्षेत्र में झांकने तक नहीं आए।
पूर्व सरकार में स्वीकृत थी सड़क-अमरजीत पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार में सुगापानी से असगवां होते हुए नान दमाली तक सड़क निर्माण को मंजूरी दी गई थी। सड़क को बजट में शामिल किया गया था। सरकार बदली तो इस सड़क निर्माण कार्य को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इसके कारण ग्रामीणों को परेशान होना पड़ रहा है।
सड़क के लिए की गई है पहल-MLA विधायक रामकुमार टोप्पो ने कहा कि पूर्व विधायक एवं मंत्री अमरजीत भगत यहां 20 सालों तक विधायक एवं पांच साल मंत्री भी रहे। उन्होंने सड़क क्यों नहीं बनवाई। विधायक मद से अस्थाई चलने लायक सड़क बनवाई जा सकती थी। टोप्पो ने कहा कि जब वे विधायक बनें तो सीतापुर विधानसभा क्षेत्र में 50 पहुंचविहीन क्षेत्र थे। इसमें से 45 के कनेक्टिविटी की समस्या दूर हो गई है। कई पुल-पुलियों के निर्माण की स्वीकृृति मिल गई है। शेष पांच क्षेत्रों की कनेक्टिविटी गर्मी तक बहाल करने की पूरी कोशिश है।
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